फ़टी छतरी की आत्मकथा Fati chhatri ki atmakatha in hindi

Fati chhatri ki atmakatha in hindi

आज हम आपके लिए लाए हैं एक फ़टी छतरी की आत्मकथा पर हमारे द्वारा लिखित यह लेख तो चलिए पढ़ते हैं आज के हमारे इस लेख को


मैं एक फ़टी छतरी हूं। मैं एक घर पर रखी रहती हूं अक्सर घर के गरीब लोगों को बरसात के दिनों में मेरी याद आ जाती है। मेरा गरीब मालिक जब भी बरसात के दिनों में घर से कहीं बाहर जाता है तो वह मुझे साथ ले जाता है। मैं बरसात के पानी से उसकी मदद करती हूं

मेरी वजह से वह पूरा नहीं भींग पाता लेकिन मैं फटी हुई छतरी हूं इस वजह से छतरी में से पानी गिरता रहता है और मेरा मालिक आधा भीग जाता है। मैं मुंह से कुछ बोल नहीं पाती इसलिए मैं अपने मालिक से कुछ नहीं कहती लेकिन मैं सोचती हूं कि अगर मैं अपने मुंह से कुछ बोलती तो वास्तव में मैं यही बोलती कि तू नई छतरी ले ले जिससे बरसात के दिनों में भीगने से बच सके।

बरसात के दिनों में पानी की वजह से वह सारे लोग भी भीग जाते हैं लेकिन जिनके पास छतरी होती है वह बच जाते हैं। वैसे भी यदि मालिक से छतरी की कहूं तो भी वह ले नहीं पाएगा क्योंकि वो एक गरीब है। आज भी मुझे याद है जब पहली बार मुझे बाजार से खरीद कर अपने घर लाया था उसने मुश्किल से इधर उधर से इंतजाम करके मुझे खरीदा था।

मैं जब उसके घर में आई तो मुझे काफी खुशी थी। कई साल चलने के बाद आखिर में फट गई लेकिन मेरा मालिक आज भी मेरी कद्र करता है। मुझ फटी हुई छतरी को वह सालों साल चला रहा है। मुझे एक खुशी भी है कि आज भी मेरे प्रति मालिक का प्रेम भाव वेसा ही है जैसा शुरुआत में था।

मेरी जीवन की आत्मकथा बस यही है आपको कैसी लगी मुझे बताएं धन्यवाद।

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