फलक की आत्मकथा falak ki atmakatha in hindi

falak ki atmakatha in hindi

आज हम आपके लिए लाए हैं फलक की आत्मकथा तो चलिए पढ़ते हैं हमारे आज के आरतीकल को

फलक की आत्मकथा
फलक की आत्मकथा

मैं फलक हूं। मेरी आत्मकथा वास्तव में सभी को जरूर पढ़नी चाहिए। मेरे कई पर्यायवाची नाम भी है जिन नामों से अक्सर लोग मुझे पहचानते हैं। लोग मुझे आकाश, आसमान, अंबर, नभ, गगन कहकर भी पुकारते हैं लेकिन बहुत सारे लोग मुझे फलक कहकर भी पुकारते हैं।

मैं पृथ्वी से काफी दूर स्थित हूं। श्याम के समय अक्सर बच्चे मेरी और देखते हैं क्योंकि शाम के समय मुझमें कई तरह के तारे, चंद्रमा दिखाई देते हैं जो उन्हें काफी पसंद आते हैं। अक्सर रोते हुए बच्चों को मनाने के लिए भी मेरे बारे में बताया जाता है जिससे बच्चे काफी खुश हो जाते हैं।

मेरा रंग अपना नहीं होता है दरहसल सूर्य से आने वाले प्रकाश, कई तरह की धूल के कण आदि की वजह से नीला रंग दिखाई देता है, कई बार मैं लाल या पीले रंग का भी दिखाई देता हूं। मैं अपने जीवन में काफी प्रसन्न हूं क्योंकि लोग मेरी पूजा भी करते हैं। बरसात के दिनों में जब मुझसे होते हुए पानी गिरता है तो लोग काफी खुश हो जाते हैं क्योंकि पानी पृथ्वी पर हर एक जीव जंतु, मनुष्य, पक्षी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

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