स्वदेशी आंदोलन पर निबंध Essay on swadeshi movement in hindi

Essay on swadeshi movement in hindi

दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं स्वदेशी आंदोलन पर लिखे इस निबंध को । चलिए अब हम पढ़ेंगे स्वदेशी आंदोलन पर लिखे इस निबंध को ।

essay on swadeshi movement in hindi
essay on swadeshi movement in hindi

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स्वदेशी आंदोलन भारत में ब्रिटिश शासन के समय चलाया गया था । 1905 को  बंग भंग विरोधी जागरण से स्वदेशी आंदोलन को बहुत ताकत मिली थी और पूरे देश में स्वदेशी आंदोलन फैल चुका था । सभी स्वदेशी आंदोलन के मतलब को समझ चुके थे और देश के सभी लोग स्वदेशी आंदोलन में भाग लेने लगे  थे ।  स्वदेशी आंदोलन का उद्देश्य था कि देश के सभी लोग देश में ही बने हुए प्रोडक्ट , देश में ही बने हुए कपड़ों का उपयोग करें, साथ में विदेशी सामान जो ब्रिटिश शासन द्वारा बनाए  गए  हैं उनका विरोध करना था ।

इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन की कमर तोड़ दी थी । विदेश से कई प्रकार के सामान हमारे भारत में लाकर बेचे जाते थे और उन चीजों के दुगने दाम हम सभी लोगों से वसूले जाते थे । यह आंदोलन जब प्रारंभ किया गया था तब लोगों ने यह निर्णय ले लिया था कि अब हम हमारे देश में ही बने हुए सामानों का उपयोग करेंगे जिससे हमारे देश की जनता मजबूत होगी , देश की गरीबी दूर होगी और हम इस ब्रिटिश सरकार को सबक शिखा पाएंगे ।

इस आंदोलन को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, लाला राजपत राय, रविंद्र नाथ ठाकुर, अरविंद घोष , वीर सावरकर ने प्रारंभ किया था  यह आंदोलन इन्ही के द्वारा प्रारंभ किया गया था और एक एक करके सभी जिलों एवं राज्यों में इस आंदोलन को फैलाया गया था और यह आंदोलन धीरे धीरे सफलता की ओर बढ़ रहा था । इस आंदोलन को देख कर अंग्रेज अधिकारी घबराने  लगे थे । इस आंदोलन से ब्रिटिश शासन को यह लगने लगा था कि अब भारत के लोग जागरूक हो चुके हैं ।

ब्रिटिस  अधिकारी भारत में फूट डाल के शासन करने की सोच रहे थे लेकिन इस आंदोलन से एकता को भी बढ़ावा मिल रहा था । यह आंदोलन आगे चलकर महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र बिंदु बन गया था । महात्मा गांधी जी ने भी इस आंदोलन की सराहना की थी और इस आंदोलन को और तेजी से लोगों तक पहुंचाने के लिए काम किया था । जब कांग्रेस के सभी गणमान्य नेताओं ने स्वदेशी आंदोलन का समर्थन किया तब देश के लाखों लोग इस आंदोलन से जुड़े थे ।

लोगों को इस आंदोलन के द्वारा यह बताया गया था कि जब तक हम अंग्रेजो के सामान का विरोध नहीं बताएंगे तब तक वह हमारे देश को आजाद करने की नहीं सोचेंगे । हम सभी को यह सोच बनानी चाहिए कि हमें विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना है और स्वदेशी वस्तु को अपनाना है । आंदोलन को सफलता की ओर ले जाने के लिए महात्मा गांधी ने चरखा चलाकर धागे से अपने पहनने के लिए कपड़े बनाए थे । जब लोगों ने , महात्मा गांधी ने  इस आंदोलन में भाग लिया है तब हजारो, लाखो लोग इस आंदोलन से जुड़ गए थे और यह आंदोलन सफल रहा था ।

इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए देश के नागरिकों ने विदेशी सामानों का बहिष्कार किया था । विदेश से जो कपड़े भारत में बिकने के लिए आए थे उन कपड़ों को जला कर विरोध जताया था । देश में चारों तरफ स्वदेशी अपनाओ के नारे लग रहे थे और यह आंदोलन अपनी सफलता की ओर बढ़ रहा था । उस समय का यह सबसे सफल आंदोलन रहा था । इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन की कमर तोड़ दी थी ।

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