भगवान श्री कृष्ण पर निबंध Essay on lord krishna in hindi

Essay on lord krishna in hindi

lord krishna – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण पर लिखे निबंध के बारे में बताने जा रहे हैं । तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस जबरदस्त लेख को पढ़कर भगवान श्री कृष्ण के निबंध के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Essay on lord krishna in hindi
Essay on lord krishna in hindi

भगवान श्री कृष्ण के बारे में – भगवान श्रीकृष्ण अपने प्रारंभिक जीवन काल में बहुत ही नटखट थे । जिनकी लीलाओं को देखकर बड़ा आनंद आता है । भगवान श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी के दिन हुआ था इसलिए प्रतिवर्ष अष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण के जन्म के शुभ अवसर पर जन्माष्टमी का त्योहार पूरे भारत देश में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है । भगवान श्री कृष्ण बहुत सुंदर अद्भुत लीलाएं दिखाने के लिए जाने जाते हैं जिन्होंने कई बाल लीलाएं दिखाई हैं । भगवान श्री कृष्ण के तकरीबन 108 नाम है । उनके सबसे सुंदर नाम कान्हा , माधव और पीतांबर है । पितांबर भगवान श्री कृष्ण को इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह पीले वस्त्र धारण करते थे ।

भगवान श्री कृष्ण का जन्म देवकी की कोख से हुआ था । जब भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ तब उनके पिता उनको जेल कोठरी में से निकाल कर समुद्र मे एक डलिया में रखकर छोड़ आए थे क्योंकि कंस देवकी के सभी पुत्रों को मार रहा था ।  कंस यह जान चुका था कि उसका भांजा ही उसकी मौत का कारण बनेगा । इसलिए कंस देवकी जिस पुत्र को जन्म देती उसको वह मार देता था । परंतु भगवान ने जब श्री कृष्ण को जन्म लेने के लिए पृथ्वी पर भेजा तब कंस इस बात को समझ नहीं पाया और देवी की के पति श्री कृष्ण भगवान को समुद्र की लहरों में छोड़ आए थे ।

इसके बाद भगवान श्री कृष्ण घाट पर  बहतेे हुए पहुंचे । भगवान श्री कृष्ण माता यशोदा के यहां पहुंच गए थे । जहां पर भगवान श्री कृष्ण का भरण पोषण हुआ था ।  बचपन में भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं बहुत अद्भुत और चमत्कारी थी । वह माखन चुराने के लिए भी जाने जाते थे । अपने मित्रों के साथ मिलकर माखन चुराना उनका प्रतिदिन का काम था । भगवान श्री कृष्ण ने 108 कन्याओ से विवाह किया था और उनकी सबसे प्रिय प्रेमिका राधा थी । भगवान श्री कृष्ण और राधा जी आपस में बहुत प्रेम करते थे ।

भगवान श्री कृष्ण बहुत ही अद्भुत चमत्कारिक है । उन्होंने मथुरा वृंदावन के लोगों को राक्षसों के अत्याचार से बचाया था ।  भगवान श्री कृष्ण जी गरुड़ पर सवारी करते हैं । भगवान श्री कृष्ण माता यशोदा के सबसे लाडले पुत्र थे । भगवान श्री कृष्ण का सबसे सच्चा मित्र था सुदामा । जिसकी मित्रता के बारे में भारतीय ग्रंथों में बताया गया है । भगवान श्री कृष्ण के जीवन काल में 3 सबसे बड़े युद्ध हुए थे । जिसमें सबसे बड़ा और भयंकर युद्ध महाभारत था । जिस महाभारत युद्ध में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन का साथ दे रहे थे । भगवान श्री कृष्ण के द्वारा महाभारत के भयंकर युद्ध में गीता का उपदेश दिया गया था ।

गीता के उपदेश में मनुष्य के पूरे जीवन का सार है । जिस गीता को पढ़ने के बाद मनुष्य को जीने का मकसद मिलता है और वह सच्चाई के रास्ते पर चलता है । भगवान श्री कृष्ण के द्वारा कंस के अन्याय को खत्म किया गया था । कंस जिन लोगों पर अत्याचार करता था उन लोगों को बचाने का जिम्मा श्री कृष्ण जी ने लिया था । श्री कृष्ण ने कंस को मारकर सभी लोगों के साथ इंसाफ किया था । भगवान श्रीकृष्ण की उम्र जब 125 की हुई तब उन्होंने मनुष्य शरीर को त्यागने का फैसला किया था और वह मनुष्य देह को त्याग कर चले गए थे ।

आज भगवान श्री कृष्ण सभी के दिलों में निवास करते हैं । सभी भगवान श्री कृष्ण को पूजते हैं । जब जन्माष्टमी का दिन आता है तब भगवान श्री कृष्ण के भक्त गण उनका जन्म दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं । जन्म जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर भगवान की जन्मस्थली मथुरा में जन्माष्टमी के पावन पर्व को मथुरा के निवासी और भारत देश से कई उनके भक्तगण मथुरा जाकर बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं ।मथुरा के साथ-साथ पूरे भारत देश में जन्माष्टमी का यह पावन पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है ।

जो भक्त गण भगवान की भक्ति में लीन होता है वह भगवान के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर मथुरा वृंदावन जाता है और भगवान के जन्म के शुभ अवसर को बड़े धूमधाम से मनाता है । जब हम मथुरा वृंदावन जाते हैं तब वहां की गलियों में आज भी श्री कृष्ण के होने का एहसास होता है । इसीलिए भगवान श्री कृष्ण के दर्शनों के लिए सभी मथुरा वृंदावन जाते हैं और अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं । भगवान श्री कृष्ण  दयालु , दया निधि के स्वामी है । जिस भक्त के सिर पर भगवान श्री कृष्ण का आशीर्वाद होता है वह सुख समृद्धि और यश प्राप्त करता है ।

भगवान श्री कृष्ण के द्वारा गीता में उपदेश दिए गए हैंं यदि व्यक्ति उन उपदेशों को अपनाकर अपने जीवन में आगे बढ़े तो वह कभी भी असफलता प्राप्त नहीं करता है ।

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