न्याय पर निबंध Essay on justice in hindi

Essay on justice in hindi

Justice – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से न्याय पर लिखें निबंध के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़कर न्याय  के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Essay on justice in hindi
Essay on justice in hindi

न्याय के बारे में – न्याय का संबंध सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखना हैं । जहां पर सभी व्यक्तियों को समान न्याय प्राप्त हो और सभी न्याय प्राप्त करके अपना जीवन व्यक्तिगत तरीके से जीए । कहने का तात्पर्य यह है कि व्यक्तिगत अधिकार हर व्यक्ति को प्राप्त होना चाहिए । जैसे कि किसी देश मे रह रहे व्यक्ति पर यदि किसी तरह का कोई अन्याय किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा किया जा रहा है तब उस व्यक्ति को न्याय मिलना चाहिए । न्याय बुद्धि की तर्क पर दिया जाना चाहिए । जो व्यक्ति जिस व्यवस्था को पानेे का हकदार है उस व्यक्ति को वह व्यवस्था मिलना ही न्याय है ।

मैं आपको न्याय की एक छोटी सी परिभाषा बताने जा रहा हूं । जैसे कि किसी देश की युवा पीढ़ी पढ़ लिख कर डिग्री प्राप्त करके नौकरी करने के लिए सरकार से उम्मीद करते है की सरकार उन सभी युवा पीढ़ी को नौकरी या फिर रोजगार देकर उन  पर न्याय करेगी । हमारे देश में कई समाज मौजूद हैं और समाज में कई तरह के व्यक्ति रहते हैं । कहने का तात्पर्य है कि सभी व्यक्तियों को मिला करके एक समाज बना है । समाज के कुछ नियम कानून होते हैं । जिन नियम कानून को हमें अपनाना पड़ता है । समाज के अंदर कुछ ऐसे व्यक्ति भी होते हैं जो बुरे होते हैं और अच्छे लोगों पर वह अन्याय करते हैं ।

जब वह व्यक्ति सभी की नजरों के सामने आ जाता है तब समाज के कुछ प्रतिष्ठित व्यक्तियों के माध्यम से उस व्यक्ति को न्याय दिलाया जाता है । जिस व्यक्ति पर अन्याय किया जा रहा है उस व्यक्ति को न्याय अवश्य मिलना चाहिए ।न्याय वैधिक भी होता है और नैतिक भी होता है । यदि हम न्याय का अर्थ जानने  की कोशिश करें तब हमें यह मालूम पड़ेगा न्याय मानवता बनाए रखने के लिए कितना आवश्यक है । न्याय का अर्थ जानने का प्रयत्न सर्वप्रथम रोमनो और यूनानीयों के द्वारा किया गया था । सबसे पहले हम यूनानीयों के बारे में बात करेंगे की यूनानीयों ने न्याय का अर्थ जानने का प्रयत्न किस तरह से किया था ।

यूनानी दार्शनिक अफलातून ने जब न्याय पर रिसर्च कीया तब यूनानी दार्शनिक अफलातून ने न्याय की परिभाषा दी और न्याय की परिभाषा में उसने कहा था कि न्याय सद्गुण है ।जिसके साथ बुद्धिमानी , संयम और साहस तीनों का सहयोग होना बहुत ही आवश्यक है । यदि न्याय के साथ संयम , बुद्धिमानी और साहस नहीं है तो न्याय का कोई भी मतलब नहीं होता है । समाज में न्याय बहुत ही आवश्यक है । कहने का तात्पर्य यह है कि समाज में जिस व्यक्ति का जो स्थान होता है वह स्थान उस व्यक्ति को मिलना ही न्याय है ।

इसके बाद रोमनों एवं स्टोइको ने न्याय एक  कल्पना विकसित की और न्याय पर कई परिभाषाएं व्यक्त की । इसके बाद रूसो , कांट और लॉक जैसे महान विचारको ने भी न्याय की परिभाषा को समझाने की कोशिश की थी । इन तीनों विचार वादियों ने न्याय का मतलब यह बताया था कि जब तक किसी व्यक्ति को स्वतंत्रता और समानता का अधिकार नहीं मिलता तब तक वह न्याय प्राप्त नहीं कर सकता हैंं । न्याय के अंदर समानता , स्वतंत्रता और कानून का मिश्रण होना बहुत ही आवश्यक है । जब तीनों का मिश्रण करके व्यक्ति को न्याय दिया जाता है तब सभी न्याय पाकर अपनी जीवन में खुशी के दो पल जीते हैं ।

स्वतंत्रता और समानता दो ऐसे शब्द हैं जिनके बिना न्याय का कुछ भी मतलब नहीं होता है । मनुष्य धरती पर जन्म लेकर कर्म करना प्रारंभ करता है । यदि व्यक्ति को स्वतंत्रता यानी कपड़े पहनने का अधिकार , कहीं पर घूमने फिरने का अधिकार एवं बोलने का अधिकार नहीं मिलेगा तो वह व्यक्ति अपना जीवन जेल में बंद हुए कैदी के जैसा व्यतीत करेगा । न्याय शब्द एक सम्मानित शब्द भी है । जिस शब्द से व्यक्ति के अंदर उम्मीद का जन्म होता है । कहने का तात्पर्य यह है कि जब कोई दुकानदार किसी ग्राहक पर अन्याय करता है ।

उस ग्राहक को झूठ बोलकर उस ग्राहक को ठगता है  तब वह ग्राहक कानून के माध्यम से न्याय प्राप्त करने की उम्मीद करता है । इसके बाद बेंथम और मिल ने मिलकर एक उपयोगितावादी सिद्धांत दिया था । उस उपयोगितावादी सिद्धांत के अनुसार जो मानव या जाति के सुख एवं उपयोगिता मे अधिकतम वृद्धि करने में सहायक हो वही तो न्याय हैं । इसके बाद माकर्सवादि और समाजवादी दोनों मिलकर एक यह दलील कर आए की पूंजीवादी सांपत्तिक संबंधों से उत्पन्न असमानता और गरीबी अन्याय पूर्ण होती है और उनका समर्थन भी नहीं किया जा सकता है ।

जब केंस की  कल्पना की कल्याणकारी राज्यों के उदय के साथ ही उदारवादी परंपरा मे न्याय व्यवस्था , न्याय देने की सोच एक नई अवधारणा का विकास करना बहुत ही आवश्यक हो गया था और उस अवधारणा की सबसे अच्छी व्याख्या रोल्स कृत ए  थ्योरी ऑफ जस्टिस के द्वारा 1971 में दी गई थी । रोल्स कृत ए  थ्योरी ऑफ जस्टिस उन्होंने कहा था कि न्याय एक सम्मानित शब्द की तरह है । जिस शब्द के माध्यम से सभी व्यक्ति को न्याय की एक उम्मीद पैदा होती है ।

दोस्तों हमारे द्वारा लिखा गया यह जबरदस्त आर्टिकल न्याय पर निबंध Essay on justice in hindi यदि आपको पसंद आए तो सबसे पहले आप सब्सक्राइब करें इसके बाद अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों में शेयर करना ना भूलें धन्यवाद ।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *