होली का त्योहार पर निबंध Essay on Holi Festival in Hindi

Essay on Holi Festival in Hindi

दोस्तों कैसे हैं आप सभी, आज हम आपके लिए लाए हैं होली पर हमारे द्वारा लिखा यह आर्टिकल। होली एक बहुत ही बेहतरीन त्यौहार है इसे हम सभी हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं इसे प्रत्येक धर्म के लोग बड़ी ही खुशी के साथ मनाते हैं चलिए होली के बारे में हम और भी जानते हैं और इस आर्टिकल को आगे पढ़ते हैं।

Essay on Holi Festival in Hindi
Essay on Holi Festival in Hindi

हमारे भारत देश में कई त्योहार मनाए जाते हैं यह त्योहार हम बड़े ही हर्षोल्लास के साथ सभी धर्म, जाति के लोग मिलजुलकर मनाते हैं। बहुत से त्योहारों में होली का त्यौहार भी हम सभी के लिए काफी महत्वपूर्ण त्योहार होता है। होली के इस त्योहार की तैयारी लोग कुछ दिन पहले से शुरू कर देते हैं, लोग एक दो दिन पहले से अपना घर का सामान एवं होली पर उपयोग किए जाने वाले तरह-तरह के रंग, पिचकारी आदि को लेते हैं और होली के पहले से ही खुशियां मनाना शुरू कर देते हैं। कई बच्चे होली के कुछ दिनों पहले से ही होली की आने की खुशी में उत्साहित हो जाते हैं रंगो की होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है इस दिन लोग रात के समय होलिका दहन करते हैं और अपने अंदर छुपी बुराई को दूर करके अच्छाई अपनाने का संकल्प लेते हैं। होलिका दहन के विषय में एक कथा भी है जो हम पढ़ेंगे।

होलिका दहन की कथा

हिरनाकश्यप अपने आप को भगवान समझता था उसे अपने पर काफी घमंड था। वह विष्णु भगवान को अपना शत्रु समझता था हिरनाकश्यप का एक पुत्र था जिसका नाम प्रहलाद था। प्रहलाद भगवान विष्णु का भक्त था वह हमेशा भगवान विष्णु की आराधना किया करता था जब हिरना कश्यप को ये बात पता लगी तो वह प्रहलाद पर काफी क्रोधित हुआ। हिरना कश्यप ने प्रहलाद से कहा कि वह हिरनाकश्यप को ही अपना भगवान माने और विष्णु को शत्रु समझे लेकिन प्रहलाद ने हिरना कश्यप की बात नहीं मानी, वह हमेशा भगवान विष्णु की आराधना किया करता था। इस वजह से हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को कई तरह से मारने की कोशिश की लेकिन हर बार प्रहलाद बच जाता था। एक दिन हिरना कश्यप ने अपनी बहन के साथ मिलकर प्रहलाद को खत्म करने की एक योजना बनाई दरअसल हिरना कश्यप की बहन होलिका को यह वर था कि वह आग में नहीं जलेगी। एक दिन वह प्रह्लाद को पकड़कर आग में जाकर बैठ गई तभी भगवान विष्णु की कृपा से होलिका आग में जल गई और प्रहलाद आग से बच गये इस तरह से अच्छाई की जीत हुई और बुराई रूपी होलिका का दहन हो गया तभी से हम होलिका दहन करते हैं।

होलिका दहन करने के अगले दिन रंगो की होली खेली जाती है यह रंगों की होली काफी हर्ष उल्लास के साथ खेली जाती है इस रंगो की होली में बच्चे, बूढ़े, नौजवान एवं औरतें सभी एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं एवं एक दूसरे पर रंग डालते हैं, हर कोई होली के रंगों में रंग जाता है और काफी हर्षोल्लास के साथ होली मनाई जाती है। कहते हैं की होली के दिनों में दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं और गले लग जाते हैं। होली का यह त्यौहार हर किसी के लिए काफी खुशी लाता है हर कोई खुशियों में झूम ने लगता है यह त्योंहार एक दूसरे के लिए प्रेम लाता है इस त्योहार को हर एक धर्म, जाति के लोग मिलजुलकर खुशी खुशी मनाते हैं इसके अलावा इस त्योहार पर तरह-तरह के मिष्ठान बनाए जाते हैं और इस त्यौहार पर अपने रिश्तेदारों को खाना खाने के लिए निमंत्रण दिया जाता है और सभी मिलजुलकर एक दूसरे के साथ भोजन करते हैं और खुशी-खुशी इस त्योहार को मनाते हैं।

पहले की अपेक्षा आजकल होली के त्यौहार में काफी बदलाव भी देखने को मिलता है आजकल के इस आधुनिक जमाने में कई लोग होली की शुभकामनाएं कई सोशल नेटवर्किंग साइट आदि के माध्यम से देते हैं वास्तव में यह त्योहार एक दूसरे को काफी करीब ला देता है। यह त्योहार जीवन में काफी खुशियां लाता है बच्चे, बूढ़े, नौजवान और सभी के चेहरों पर मुस्कान आ जाती है। होली का यह त्योहार हम सभी के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

दोस्तों हमें बताएं कि होली के त्योहार पर हमारे द्वारा लिखा ये आर्टिकल Essay on Holi Festival in Hindi आपको कैसा लगा, पसंद आए तो अपने दोस्तों में शेयर जरूर करें धन्यवाद।

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