एक रोमांचक यात्रा पर निबंध Essay on ek romanchak yatra in hindi

Essay on ek romanchak yatra in hindi

आज हर मनुष्य अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए और अपने परिवार की इच्छाओं को पूरा करने के लिए बहुत मेहनत कर रहा है और उसको इतना समय नहीं मिलता कि वह आराम कर सकें ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ । जब मैं काम करता था तो सोचता था कि मुझे भी कहीं पर घूमने का मौका मिले फिर मैंने योजना बनाई की मुझे भी घूमने जाना चाहिए फिर मैंने अपने मित्रों से वैष्णो देवी की यात्रा करने के लिए कहा और वह लोग तैयार हो गए और हम लोगों ने वैष्णो देवी जाने का फैसला लिया ।

Essay on ek romanchak yatra in hindi
Essay on ek romanchak yatra in hindi

हम 10 लोग वैष्णो देवी जाने के लिए तैयारी करने लगे जब हम यहां से वैष्णो देवी जाने लगे तो हम सभी ने बहुत मजे से इस सफर का आनंद उठाया । यहां से वैष्णो देवी तक पहुंचने के लिए 2 दिन का सफर करना पड़ा । हम सभी ने जो आनंद उठाया उसकी कल्पना भी हम लोगों ने नहीं की थी इतना मजा आया कि हम हर टेंशन को भूलकर आनंद उठाने लगे ।

जब हम जम्मू पहुंचे तो वहां का मौसम बढ़ा ही ठंडा था क्योंकि वहां का पूरा पहाड़ी इलाका था। जम्मू में पहुंचने के बाद जब हम जम्मू से कटरा की ओर एक बस में यात्रा कर रहे थे तो हमको बहुत डर लग रहा था क्योंकि वह बस जिस रोड पर चल रही थी उस रोड के दोनों तरफ दाएं और बाएं खाई थी और वह खाई इतनी बड़ी थी । जहां से अगर बस गिर गई तो किसी भी व्यक्ति की हड्डियां तक नहीं मिल पाएंगी क्योंकि वह रास्ता घुमावदार टेढ़ा मेढ़ा था लेकिन हम आनंद महसूस कर रहे थे और कैमरों के माध्यम से बस में से जो दृश्य हम देख रहे थे उस दृश्य की फोटो निकाल रहे थे क्योंकि वह दृश्य बहुत अच्छा लग रहा था ।

जब हम कटरा पहुंचे तो हमको और आनंद आने लगा हम सभी ने कटरा में एक होटल बुक किया क्योंकि हम सभी रात में करीब 8:00 बजे पहुंचे थे और हम सभी सफर के कारण थक भी गए थे । हम लोगों ने सोचा था कि 3:00 बजे रात से चढ़ाई प्रारंभ करेंगे और फिर हम होटल में खाना खा कर सो गए फिर सभी 2:00 बजे रात को उठकर नहा धोकर सभी तैयार हो गए उस समय बहुत अधिक ठंड पड़ रही थी ।

हम सभी ने सोचा की चढ़ाई के दौरान बहुत ठंड लगेगी इसलिए हम सभी ने स्वेटर और कपड़े पहनकर चढ़ाई करना चालू किया। जैसे ही हम थोड़ी दूर तक पहुंचे तो थोड़ी ठंड कम महसूस होने लगी फिर हम सभी माता के जयकारे लगाते लगाते पूरे आनंद के साथ चढ़ाई करने लगे । मेरी जिंदगी में इतनी अच्छी खुशी का आनंद पहली बार आया था।

चढ़ाई करते करते हमको वैष्णो देवी मंदिर तक पहुंचने में करीबन 4 से 5 घंटे लग गए थे हम सभी लगभग 8:00 बजे माता रानी के दरबार में पहुंच गए जिस समय आरती हो रही थी और हम सभी आरती में शामिल हुए । उसके बाद हमने माता रानी के दर्शन किए और दर्शन करने के बाद हम भैरवनाथ के दर्शन करने के लिए गए ये मंदिर सबसे ऊपर वाले पहाड़ पर था वहां पर हमको बहुत ही आनंद आया।

वहां से जब हम चारों तरफ देख रहे थे तो चारों तरफ बर्फ और कोहरा जैसा दिख रहा था । वहां से नीचे जो व्यक्ति थे वह छोटे-छोटे दिख रहे थे फिर हमने नीचे की ओर आना शुरू किया और रास्ते में एक गुफा पड़ी और उस गुफा में जाने के लिए हम करीबन 3 घंटे तक लाइन में लगे रहे उस गुफा में जाने के बाद हम वापस आ रहे थे तो रास्ते में गुलशन कुमार का लंगर चल रहा था ।

वहां पर हम सभी ने भोजन किया और भोजन में हमे कढ़ी चावल और रोटी मिली। भोजन करने के बाद हम वापस कटरा आ गए । कटरा से फिर हम सभी दिल्ली घूमने के लिए चले गए और हम सभी दिल्ली गेट घूमने के साथ साथ कई ओर जगह पर भी घूमे और फिर दिल्ली घूमने के बाद हम सभी मथुरा वृंदावन के लिए चले गए जहां पर जाकर हमको बहुत ही आनंद आया और हम सभी ने मथुरा वृंदावन मे 14 कोस की परिक्रमा की और हम सभी मस्ती करते हुए उस परिक्रमा का आनंद उठाने लगे । मेरी ये यात्रा मेरे लिए सबसे अच्छी यात्रा थी और मैंने इन यात्राओं में बहुत आनंद उठाया।

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