डायनासोर पर निबंध Essay on Dinosaur in Hindi

Essay on Dinosaur in Hindi

दोस्तों आज हम आपको इस बेहतरीन लेख के माध्यम से 15 से 20 करोड़ साल पहले इस पृथ्वी पर रहने वाले प्राणी डायनासोर के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और डायनासोर के बारे में गहराई से जानते हैं ।

Essay on Dinosaur in Hindi
Essay on Dinosaur in Hindi

डायनासोर – वैज्ञानिकों के अनुसार डायनासोर का अस्तित्व लगभग 20 करोड साल पहले का रहा है । उस समय पृथ्वी पर हजारों प्रजाति के डायनासोर पाए जाते थे । कुछ डायनासोर बहुत बड़े आकार के होते थे तो कुछ डायनासोर छोटे होते थे । वैज्ञानिकों ने जब रिसर्च किया तब यह पता लगा कि कुछ डायनासोर मनुष्य की आकृति के बराबर भी थे । वैज्ञानिकों के रिसर्च के बाद यह भी पता चला कि कुछ डायनासोर मुर्गी के आकार के भी थे । इस तरह से डायनासोर की लगभग 1000 से भी ज्यादा प्रजातियां पाई जाती थी ।

जब हम यह कल्पना करते हैं कि यह डायनासोर देखने में कितने भयानक लगते होंगे तब हमें बड़ा डर सा महसूस होता है । वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि पशु पक्षियों के सबसे बड़े वंशज डायनासोर है जो हजारों करोड़ों साल पहले पृथ्वी के हर क्षेत्र में इनका अस्तित्व था । डायनासोर बहुत ही विशाल आकार के होने के कारण अपने आप को हर क्रियाओं में बेहतर बनाते थे । डायनासोर ने उड़ना भी सीख लिया था । कुछ डायनासोर उड़ने में सक्षम हो गए थे ।

डायनासोर का भारत के साथ-साथ अमेरिका एवं विश्व के हर देश के कोनों में इनका अस्तित्व पाया गया है । इनके अवशेषों के माध्यम से यह रिसर्च करना प्रारंभ किया गया था कि डायनासोर कैसे दिखते थे एवं क्या भोजन खाते थे ?  इनका आकार कितना था , यह किस तरह के अंडे देते थे जब यह रिसर्च किया गया था । डायनासोर के बारे में बहुत अधिक जानकारी वैज्ञानिकों के द्वारा जुटाई गई थी ।डायनासोर दुनिया के सबसे बड़े जानवर के रूप में जाना जाता है ।

डायनासोर को देखने एवं डायनासोर के बारे में जानकारी हासिल करने की रुचि दुनिया के हर कोने के व्यक्ति को है । कई फिल्मों में डायनासोर के जीवन काल को बताया गया है । जब डायनासोर की फिल्म को प्रकाशित किया गया तब उस फिल्म को काफी लोगों ने देखा था । कई पुस्तकें भी डायनासोर के बारे में लिखी गई हैं और यह इतिहास भी बन गया है कि दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक डायनासोर की है । इससे यह पता चलता है कि डायनासोर के बारे में जानकारी हासिल करने की रुचि हर व्यक्ति को है ।

कुछ लोगों की यह भी सोच होती होगी कि यह डायनासोर कितने खतरनाक होते होंगे । यदि 21वीं सदी में डायनासोर होते तो कितना उत्पाद धरती पर होता । डायनासोर अपने ऊंचे कद के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है । जब अमेरिका के ब्लूमिंग राज्य से डायनासोर का अवशेष मिला तब उस पर भी रिसर्च किया गया था । अब तक की जितनी भी खोज डायनासोर के अवशेषों की हुई है उससे यह पता चला है कि सबसे बड़ा डायनासोर का जीवाश्म 27 मीटर लंबा है और यह डायनासोर का जीवाश्म अमेरिका के व्योमिंग राज्य से मिला था ।

दक्षिण अमेरिका के बोलिविया में एक चूने के पत्थर की चट्टान में डायनासोर के 5000 से ज्यादा पैरों के निशान भी मिले थे । जब उन पैरों के निशानों पर रिसर्च किया गया तब यह पता चला था कि यह निशान 6 से 7 करोड़ साल पुराने निशान हैं । कई अवशेष मिलने के बाद डायनासोर के अंडों के अवशेष भी प्राप्त हुए थे ।डायनासोर का जो सबसे छोटा अंडा था वह 3 सेंटीमीटर का था और उस अंडे का वजन 75 ग्राम था । डायनासोर का जो सबसे बड़ा अंडा मिला है उस अंडे  का आकार 19 इंच का हैं ।

डायनासोर का जीवनकाल dinosaurs lifetime- डायनासोर का जीवनकाल 15 से 20 करोड़ साल पहले का है और जिस समय काल में डायनासोर थे । उस काल को निसोजोनिक इरा कहते हैं और इस काल को तीन भागों में विभाजित किया गया है जुरासिक , क्रीटेशियस , ट्राईएसिक आदि । जो बड़े डायनासोर होते थे वह 200 साल तक जीते थे और कुछ छोटे प्रजाति के डायनासोर का जीवनकाल 100 साल से ऊपर का था ।

प्रथम बार डायनासोर की खोज dinosaur discovered for the first time period- डायनासोर का पहला जीवाश्म 19 वी सदी में मिला था । जब डायनासोर का पहला जीवाश्म मिला तब उसकी खोजबीन की गई थी और उसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी हासिल करने के प्रयास किए गए थे । जीवाश्म मिलने के बाद कई वैज्ञानिकों ने डायनासोर के रिसर्च पर काम किया था और डायनासोर को कई नामों से संबोधित किया गया था ।यूनानी भाषा में इसका नाम डायनासोर रखा गया था ।जिसका अर्थ होता है छिपकली ।

वैज्ञानिकों ने अपने इस रिसर्च के बाद यह बताया था कि डायनासोर जीवित पशु पक्षियों के वंशज हैं । जिनका अस्तित्व लगभग 15 से 20 करोड़ साल पहले का है । उस समय काफी मात्रा में डायनासोर पाए जाते थे । जिनका शरीर विशाल था । जब इस प्राणी  का नाम डायनासोर रखा गया था तब काफी लोगों ने इस नाम का समर्थन किया गया था । डायनासोर को हिंदी भाषा में भीमसरट कहते हैं । रिसर्च के बाद धीरे-धीरे इसका विस्तार बढ़ता गया और पृथ्वी के हर महाद्वीप एवं हर कोने में डायनासोर के अवशेष प्राप्त हुए थे ।

अवशेष प्राप्त होने के बाद डायनासोर के अवशेषों को लैब में ले जाया गया और वहां पर डायनासोर पर रिसर्च किया गया था । 1970 के अनुसार वैज्ञानिकों ने यह प्रमाण दिया था कि डायनासोर उपापचय दर वाले सक्रिय प्राणी थे । यह अपने आप को मजबूत एवं शक्तिशाली बना कर रखे थे । यह कभी भी अपने आप को कमजोर नहीं समझते थे । जब डायनासोर के अवशेष प्राप्त हुए तब लोगों ने डायनासोर के विषय में ज्यादा रुचि ली ।

इसीलिए दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबें डायनासोर की है ।बीसवीं सदी में वैज्ञानिकों के रिसर्च के बाद यह पता चला है कि  डायनासोर  नासमझ थे , उनको किसी तरह की कोई समझ नहीं थी । डायनासोर सबसे ज्यादा आलसी भी था । डायनासोर अधिकतर अपना समय सोने में बिता दिया करता था । अधिकतर जो डायनासोर हुआ करते थे वह ठंडे रक्त वाले होते थे ।

डायनासोर का नामकरण – डायनासोर प्राणी के नामकरण का श्रेय रिचर्ड ओवन को जाता है । रिचर्ड ओवन ने सन 1842 को डायनासोर को ग्रीक शब्द में डीनोस कहां था । जिसका अर्थ होता है भयानक , चमत्कार एवं शक्तिशाली । कई लोगों के समर्थन के बाद इस प्राणी का नाम डायनासोर रखा गया था और सभी उसके इस नाम से सहमत थे । डायनासोर का अर्थ होता है बड़ी छिपकली । जो बहुत बड़े आकार के पाए जाते थे । पूरे विश्व में डायनासोर की 500 से 1000 प्रजाति पाई जाती थी ।

डायनासोर का शरीर – डायनासोर का शरीर काफी बढ़ा था । कुछ डायनासोर ऐसे भी थे जो छोटे आकार के थे ।डायनासोर के चार पैर थे । जिनमें पीछे के दो पैर बड़े होते थे एवं आगे के दो पैर छोटे होते थे । डायनासोर की दो आंखें होती थी । कुछ डायनासोर ऐसे भी  होते थे जिनके माथे पर सिंग लगे होते थे । कुछ डायनासोर बिगर सिंग के भी होते थे । कुछ ऐसे डायनासोर होते थे जिनके पंख होते थे । जो पंखों के माध्यम से उड़ते थे । कई डायनासोर रंग-बिरंगे भी हुआ करते थे ।

डायनासोर की तरह-तरह की प्रजातियों पर रिसर्च किया गया है और मिले डायनासोर के अवशेषों से उनके जीवनकाल एवं उनके शरीर के बारे में पता लगाया गया है । वैज्ञानिकों के रिसर्च के बाद में पता चला कि डायनासोर का शरीर एवं चेहरा काफी भयानक हुआ करता था । उनकी आंखें चमगादड़ के समान होती थी जो बहुत तेज होती थी । कई ऐसे डायनासोर होते थे जिनके पीठ पर कटीले कटीले सींग पाए जाते थे । डायनासोर की एक पूछ भी होती थी जिसकी लंबाई 45 मीटर की होती थी ।

डायनासोर की पूछ के बारे में ऐसा कहा जाता है कि डायनासोर अपनी पूछ के माध्यम से दो पैरों पर खड़ा रहने का बैलेंस बनाता था । जब डायनासोर भागता था तब वह पूछ के माध्यम से अपना बैलेंस बनाकर रखता था ।

भारत में डायनासोर का अस्तित्व – भारत में डायनासोर का अस्तित्व लगभग 19 से 20 करोड़ साल पहले का  है । जब पहली बार भारत के गुजरात राज्य में नर्मदा नदी के किनारे डायनासोर का अवशेष मिला तब अवशेष को वैज्ञानिकों के हवाले कर दिया था । वैज्ञानिकों ने जब उस डायनासोर पर रिसर्च किया तब यह पता चला की यह अवशेष तकरीबन सात से आठ करोड़ साल पुराना है और यह डायनासोर उड़ने में भी सक्षम था । जीवाश्म वैज्ञानिक ने यह भी बताया था कि डायनासोर दहाड़ नहीं सकता था ।

डायनासोर के डीएनए टेस्ट भी नहीं किया जा सकता है क्योंकि डीएनए सिर्फ 20,000,00 साल तक ही जीवित रह सकता है । 20,000,00 साल से अधिक समय के डीएनए पर रिसर्च नहीं किया जा सकता है । डायनासोर का अवशेष मिला था वह सात से आठ करोड़ साल पुराना था । इसीलिए उस डायनासोर के अवशेष का डीएनए टेस्ट नहीं किया गया था । वैज्ञानिक के द्वारा यह भी बताया गया था कि भारत में तकरीवन 18 से 19 करोड़ साल पहले 20 से 25 तरह के डायनासोर की प्रजाति पाई जाती थी ।

भारत में समुद्री इलाकों के किनारे डायनासोर अपना जीवन व्यतीत करते थे । अवशेष मिलने के बाद भारत में डायनासोर पर रिसर्च किया गया था । मध्य भारत में 900 से 1000 प्रकार के अलग-अलग प्रजाति के अंडे भी पाए गए थे । इन अंडों का आकार अलग अलग है । कुछ अंडे गेंद के आकार के थे तो कुछ अंडे फुटबॉल के आकार के थे ।

शाकाहारी डायनासोर – पूरी दुनिया में शाकाहारी डायनासोर सबसे अधिक मात्रा में पाए जाते थे  और शाकाहारी डायनासोर की प्रजाति के नाम इस प्रकार से थे ऐपेटोसोर्स एवं ब्रेकियोसोर्स आदि । वैज्ञानिकों के रिसर्च के बाद यह पता चला है कि डायनासोर का अस्तित्व 15 से 20 करोड़ साल पहले का था । इस पूरी दुनिया में शाकाहारी डायनासोर की उम्र सबसे अधिक थी । शाकाहारी डायनासोर सबसे अधिक पानी वाले स्थानों पर पाए जाते थे क्योंकि वह अधिकतर ठंडे इलाके को पसंद किया करते थे ।

डायनासोर के बारे में जितनी खोज की गई उसके हिसाब से लगभग डायनासोरों की 2468 प्रजातियां मिल चुकी हैं । पृथ्वी पर डायनासोर के जीवन की शुरुआत का समय 11:00 से 12 pm  का बताया गया है ।  जीवाश्म वैज्ञानिकों के द्वारा कई तरह के डायनासोर जीवाश्म की खोज की गई और उन पर रिसर्च किया गया था । शाकाहारी डायनासोर जीवाश्म का रिसर्च करने के बाद यह पता चला था कि  शाकाहारी डायनासोर सबसे अच्छे एवं शांत स्वभाव के थे ।

शाकाहारी डायनासोर का जो खून होता था वह बहुत ठंडा होता था जिससे वह अपने स्वभाव को शांत रखते थे । ज्यादातर शाकाहारी डायनासोर अपने भोजन में हरे पत्ते एवं शाकाहारी चीजों का सेवन किया करता था । इसलिए उनको शाकाहारी डायनासोर की श्रेणी में रखा गया था ।शाकाहारी डायनासोर के भोजन करने में अधिक समय लग जाता था क्योंकि वह चबा चबा कर भोजन को खाता था । वह तकरीबन 1000 किलो वजन का भोजन करता था ।

शाकाहारी डायनासोर का शरीर काफी भारी होता था क्योंकि वह शाकाहारी भोजन करता था । शाकाहारी डायनासोर हमेशा पानी के आस-पास ही रहते थे । इस बात का अनुमान तब लगाया गया जब डायनासोर के अधिकतर अवशेष पानी के किनारे पर प्राप्त हुए थे । शाकाहारी डायनासोर जब अंडे देता था तब वह घोसले को एकत्रित करके रखता था और उस घोसले में अपना अंडा देता था । परंतु कुछ ऐसे डायनासोर भी थे जो घोसले में अंडा ना देकर जिस तरह से और जीव अंडे देते हैं उस तरह से देता था ।

जो उड़ने वाला डायनासोर था वह अधिकतर उड़ता ही रहता था । डायनासोर की शाकाहारी प्रजाति बहुत ही शांतप्रिय थी । वह अपने जीवन काल में कभी भी उत्पाद नहीं मचाते थे । शाकाहारी डायनासोर अपने जीवन को सही ढंग से जीते थे । जब उनको घूमना होता था तब वह पानी के ठंडे इलाकों में जाकर वहां पर गीली रेत में लेट जाते थे और पानी में रहकर अपने रक्त को ठंडा करते थे । इसीलिए डायनासोर का रक्त ठंडा होता था क्योंकि वह ज्यादातर पानी के किनारे पड़े रहते थे ।

मांसाहारी डायनासोर –  मांसाहारी डायनासोर की कई प्रजातियां पाई जाती थी और वह कीड़े , मकोड़े एवं कई जीवित प्राणियों को मार कर भोजन करते थे । इसलिए उनको मांसाहारी कहा जाता था । मांसाहारी प्रजातियों में डायनासोर की एक प्रजाति का नाम ट्राई रेनो सोर्स था । इस प्रजाति के डायनासोर अपनी चतुराई से शिकार किया करते थे । जब उनको भूख लगती थी तब वह शिकार की तलाश में निकल जाते थे और अपनी निगाहें सिर्फ शिकार पर रखते थे ।

जैसे ही उनको शिकार मिल जाता था वह उस पर हमला कर देते थे और उसको अपना भोजन बना लेते थे । ऐसा ही एक और प्रजाति थी जिसका नाम ओर्निथोमिमस था । इस प्रजाति के डायनासोर भी अपने भोजन की तलाश में इधर-उधर भटकते रहते थे और जीव-जंतुओं का शिकार करके खा लेते थे । कुछ मांसाहारी डायनासोर मुर्गी के आकार के होते थे जो कीड़े मकोड़ों को अपना भोजन बनाते थे । मांसाहारी भोजन करने वाले डायनासोर पत्थर की चट्टानों के टुकड़ों को भी खा जाते थे ।

वह उन टुकड़ों को इसलिए खाते थे जिससे कि कम समय में अपने पेट के भोजन को पचा सकें । इसके बाद वह पत्थर को भी अपने पेट के माध्यम से पचा लेते थे । डायनासोर की बहुत बड़ी प्रजाति थी । इस प्रजाति के हजारों डायनासोर पाए जाते थे । मांसाहारी डायनासोर का पेट खोकला होता था । जिसके कारण उसके शरीर का भार बहुत कम होता था और वह अपने शरीर के कम भार के कारण शिकार करने एवं भागने में सक्षम थे ।

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