उद्देश्य के प्रति समर्पण पर निबंध Essay on dedication in hindi

Essay on dedication in hindi

दोस्तों नमस्कार कैसे हैं आप सभी, आज हम आपके लिए लाए हैं उद्देश्य के प्रति समर्पण पर निबंध तो चलिए पढ़ते हैं आज के हमारे इस निबंध को
जीवन में एक उद्देश्य होना बहुत जरूरी है।

Essay on dedication in hindi
Essay on dedication in hindi

जिस व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य होता है वह अपने जीवन में तरक्की करता है। उद्देश्य अपने कामकाज एवं अपने परिवार के प्रति हो सकता है जिससे अपने कामकाज एवं परिवार पर काफी अच्छा प्रभाव पड़े। केवल जीवन में उद्देश्य होना ही महत्वपूर्ण नहीं है उद्देश्य होने के साथ में उस उद्देश्य के प्रति समर्पण होना भी बहुत जरूरी है। यदि हम जीवन में अपने उद्देश्य के प्रति पूरी तरह से समर्पित नहीं है तो फिर उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो सकती।

कई लोग जिनका उद्देश्य तो होता है लेकिन अपने उद्देश्य के प्रति समर्पण भाव की कमी होती है वह जीवन में समर्पण भाव की कमी की वजह से अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाते हैं लेकिन जीवन में हमें कई ऐसे लोग मिलते हैं जो अपने उद्देश्यों के प्रति समर्पण भाव रखते हैं उनके जीवन में उद्देश्य ही सब कुछ होता है, ऐसे लोग जीवन में अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बहानो को सहारा नहीं लेते, हर हालत में अपने उद्देश्य को पाना चाहते हैं ऐसे उद्देश्यों के प्रति समर्पण भाव रखने वाले लोग जीवन में सफलता की बुलंदियों को छूते हैं और अपने परिवार का, अपने समाज का नाम रोशन करते हैं।

उद्देश्यों के प्रति समर्पण लोगों का हम सभी उदाहरण भी देखते हैं- थॉमस एडिसन जिन्होंने बल्ब का आविष्कार किया। बल्ब का आविष्कार करने से पहले इन्होंने 9999 बार असफलता प्राप्त हुई फिर जाकर बल्ब का आविष्कार हुआ, वह अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पूरी तरह से समर्पण थे। दशरथ मांझी जिनका उद्देश्य था कि वो विशालकाय पर्वत को झुका दें तब उन्होंने लगातार इसके प्रति प्रयत्न किया और कई सालों बाद वह दिन भी आया जिस दिन सिर्फ दशरथ मांझी ने अपने छेनी और हथौड़ी के जरिए एक विशालकाय पर्वत को भी झुकने पर मजबूर कर दिया और रास्ता बना दिया।

धीरूभाई अंबानी जो कि कभी ₹500 की नौकरी करते थे उन्होंने एक सपना देखा था, उनका एक उद्देश्य था वह उस उद्देश्य को पूरा करना चाहते थे उन्होंने अपने उद्देश्य के प्रति उन्होंने समर्पण भाव रखा और आगे चलकर वह समय भी आया कि जिस दिन धीरूभाई अंबानी जी के जीवन का उद्देश्य पूरा हुआ। आज उनके उद्देश्य के प्रति समर्पण भाव होने की वजह से उन्हें देश दुनिया में जाना जाता है, पहचाना जाता है। विल्मा रूडोल्फ जिन्होंने अपने उद्देश्य के प्रति समर्पण भाव रखकर सबसे तेज दौड़कर यह साबित कर दिया कि उद्देश्य के प्रति यदि समर्पण भाव हो तो एक अपाहिज लड़की भी सबसे तेज दौड़कर बड़ी से बड़ी प्रतियोगिता जीत सकती है।

वास्तव में उद्देश्य के प्रति समर्पण भाव मनुष्य को काफी आगे पहुंचा सकता है, मनुष्य जीवन की बड़ी से बड़ी समस्याओं का सामना आसानी से कर सकता है। जीवन में एक उद्देश्य होना और उद्देश्य के प्रति समर्पित आना बहुत ही जरूरी होता है।

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