भाग्य और पुरुषार्थ पर निबंध Essay on Bhagya aur Purusharth

Essay on Bhagya aur Purusharth

हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी,दोस्तों आज का हमारा आर्टिकल भाग्य और पुरुषार्थ पर निबंध आप सभी के लिए बहुत ही हेल्पफुल है हमारे आज के इस निबंध में आप जानेंगे भाग्य और पुरुषार्थ के बारे में

Essay on Bhagya aur Purusharth
Essay on Bhagya aur Purusharth

प्रस्तावना

इस आधुनिक जमाने में सब कुछ बदल रहा है लोग अपने-अपने क्षेत्रों में मेहनत करते हैं लेकिन कुछ लोग भाग्यवादी होते हैं तो कुछ लोग पुरुषार्थ करना अपना धर्म और कर्तव्य समझते हैं वह भाग्य पर विश्वास नहीं करते. वास्तव में पुरुषार्थ और भाग्य एक दूसरे पर निर्भर है. जब हम पुरुषार्थ करेंगे तभी हमारा भाग्य बनेगा यानी हमारा भविष्य बनेगा. हमें जीवन में सुखी रहने के लिए कर्म करना चाहिए तो जीवन में सफलता हमें जरूर मिलती है.

भाग्य

बहुत सारे लोग भाग्य पर निर्भर रहते हैं वह सोचते हैं कि भाग्य ही सब कुछ है वह कर्म पर विश्वास नहीं करते.जो व्यक्ति कर्म करता है वह जीवन में सफल जरूर होता है आप ही सोचो की अगर हम भाग्य के भरोसे घर पर बैठे रहें और कुछ ना करें तो जीवन में हम कुछ कैसे पा सकते हैं. भाग्य के संबंध में कुछ कहना तो मुश्किल है लेकिन इतना जरूर कह सकते हैं कि हमें कभी भी भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए हमें निरंतर कर्म करते रहना चाहिए. भाग्य के भरोसे सिर्फ आलसी लोग रहते हैं जो सोचते हैं की हो सकता है हमारा भाग्य उदय हो जाए और हमारी जिंदगी बदल जाए ऐसे लोग वास्तव में जिंदगी में कुछ भी खास नहीं कर पाते वो जिंदगी में वही जिंदगी जीते रहते हैं.

पुरुषार्थ

हमें वास्तव में भाग्य के बारे में ज्यादा कुछ ना सोचते हुए अपने पुरुषार्थ पर ध्यान देना चाहिए.श्रीमद्भागवत गीता में श्री कृष्ण ने कहा है की कर्म कर फल की चिंता मत कर यानी हमें जीवन में कर्म यानी पुरुषार्थ करना चाहिए फल तो हमें हमारे कर्म के अनुरूप मिल ही जाएगा.आप जरा सोचिए की अगर आप पानी से भरे गिलास में एक चुटकी नमक डाल दें तो पानी मीठा तो होगा नहीं पानी खारा ही होगा.

अगर आप उसमें शक्कर डालें तो पानी मीठा हो जाएगा वास्तव में हम जैसा कर्म करके हमारे जीवन में बोते है हम बैसा ही फल के रूप में मिलेगा इसलिए हमें हमारे जीवन में ज्यादा कुछ विचार ना करते हुए पुरुषार्थ करना चाहिए यही हमारा कर्तव्य है और जो अपने कर्तव्य से विमुख होता है जीवन में वह कुछ भी नहीं कर पाता है. पुरुषार्थ करना तो बेहद जरूरी है.

कुछ वृतांत

हम अगर महाभारत के समय की बात करें तो उस समय श्री कृष्ण अर्जुन के साथ थे अगर वास्तव में भाग्य से ही सब कुछ होता है तो श्री कृष्ण भगवान अर्जुन से कह देते कि तुम्हें यह युद्ध लड़ने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि तुम्हारे भाग्य में तो विजयश्री है. श्री कृष्ण ने बताया है कि हमें जीवन में पुरुषार्थ करने की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए और अपने कर्तव्य को निभाना चाहिए.

अगर सिर्फ भाग्य से ही सब कुछ होता तो श्री रामचंद्र जी सीता मैया के लिए युद्ध ना करते क्योंकि वह तो भगवान थे उन्होंने पहले से ही सब कुछ तय कर रखा था लेकिन उन्होंने भी हमें पुरुषार्थ का महत्व बताया है उन्होंने भी कहा है कि सबसे बढ़कर पुरुषार्थ है प्रयत्न है. हम अगर लगातार प्रयत्न करते हैं तो हमारा भाग्य जरूर बनता है.

हम बात करें हमारे वैज्ञानिक थॉमस एडिसन की जिसने बल्ब का आविष्कार किया है जिसने 9999 बार हार कर भी कोशिश की और बल्ब का आविष्कार कर दिया और पूरी दुनिया में एक बहुत बड़ी पहचान बनाई.उन्होंने यह सब कर्म करके किया.अगर कोई भी इतनी बार मेहनत कर सकता है तो वह जीवन में कुछ भी बड़ा जरूर करता है उन्होंने मेहनत को सब कुछ समझा और जीवन में वह सफल हुए. हमें वास्तव में पुरुषार्थ पर विशेष रुप से ध्यान देना चाहिए भाग्य के भरोसे कभी भी नहीं बैठना चाहिए क्योंकि जो भाग्य के भरोसे बैठे रहते हैं वह कुछ भी नही कर पाते है.

उपसंहार

वास्तव में हर एक मनुष्य को अपने पुरुषार्थ पर विशेष रुप से ध्यान देना चाहिए भाग्य पर नहीं.कभी भी भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए आप अगर पुरुषार्थ करोगे तो आपको फल जरूर मिलेगा.आपको आपके कर्म के अनुसार जल्दी या देर से फल मिल सकता है लेकिन फल जरुर मिलता है.जब भी लोग किसी कठिन कार्य को करते हैं और उसमें सफलता नहीं मिलती तो वह अपने भाग्य को कोसते हैं लेकिन ऐसा नहीं है हमें अगर जीवन में कोई बड़ी सफलता पाना है तो लगातार कोशिश करनी होगी,पुरुषार्थ करना होगा तभी हम जीवन में आगे बढ़ सकते हैं

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