अघोरी पर निबंध Essay on aghori in hindi

Essay on aghori in hindi

दोस्तों नमस्कार कैसे हैं आप सभी, आज हम आपके लिए लाए हैं अघोरी पर हमारे द्वारा लिखित यह निबंध आप इसे जरूर पढ़ें, इस आर्टिकल में हम अघोरी के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे तो चलिए आगे बढ़ते हैं।

Essay on aghori in hindi
Essay on aghori in hindi

अघोरी तंत्र मंत्र करते हैं। कहते हैं कि अघोरियों की विद्या काफी डरावनी होती है, अघोरी अपने शरीर की वेशभूषा कुछ ऐसी बनाए रखते हैं जिससे एक आम आदमी भयभीत होता है, वह अपने शरीर पर राख भी लपेटते हैं। अघोरी किसी भी चीज में भेदभाव नहीं करते वह मुर्दे की लाश से भी बिल्कुल घृणा नहीं करते।

वह शमशान में अपनी कई तरह की क्रिया करते हैं ऐसा कहा जाता है कि कुछ अघोरी मानव का मांस भी खाते हैं। अघोरी कभी भी गाय का मांस नहीं खाते। अघोरी मानव समाज से अलग-थलग से लगते हैं क्योंकि वो ना ही ज्यादा बातचीत करते, वह चुपचाप अपनी धुन में मगन होते हैं। ऐसा माना जाता है की अघोरी चिताग्नि पर भी भोजन पकाते हैं क्योंकि इस तरह के कार्य उनके लिए कुछ अजीब नहीं है वह तो दुनिया को एक ही नजर से देखते हैं, उनके लिए सब कुछ सामान होता है।

जैसे कि हम इस अघोरी शब्द से भी समझ सकते हैं। अघोरी शब्द का शाब्दिक अर्थ जब हम इस शव्द को दो भागों में प्रथक करते हैं तो इसका अर्थ यह निकलता है अ+घोर यानी जो घोर ना हो, यहां पर घोर का मतलब डरावना है यानी जो व्यक्ति डरावना ना हो उसे अघोरी कहते हैं वास्तव में अघोरी दूर से देखने में डरावने से लगते हैं लेकिन ऐसा कहा जाता है कि अंदर से बहुत ही अच्छे स्वभाव के होते हैं।

यदि हम इनसे अच्छी तरह से वार्तालाप करें और इनसे अपना काम करवाने की कोशिश करें तो यह हम पर बड़ी ही कृपा कर सकते हैं। अघोरी कई तरह की विद्या जानते हैं, वह और कुछ ऐसा कर सकते हैं जो आम आदमी सोच भी नहीं सकता क्योंकि वह शमशान में रहकर कड़ी तपस्या करते हैं। अघोरी भगवान शिव शंकर को अपना सब कुछ मानते हैं उनकी पूजा आराधना करते हैं।

अघोरियों के लिए श्मशान घाट में साधना करने का विशेष रूप से महत्व होता है इसीलिए वोह ज्यादातर समय श्मशानबास में रहते हैं और श्मशान में रहना काफी पसंद करते हैं। कुछ अघोरी ऐसे भी देखने को मिलते हैं जो नर मुंडो की माला पहनते हैं। हमारे भारत देश में कई सारे ऐसे स्थान हैं जहां पर हमें ज्यादातर अघोरी देखने को मिलते हैं ऐसे स्थानों में एक स्थान वाराणसी भी है जहां पर अघोरी बहुत ज्यादा रहते हैं, काशी भी अघोरियों का स्थान है।

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