दुर्गा सप्तशती की व्रत कथा durga saptashati katha in hindi

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दोस्तों आज हम इस लेख के द्वारा दुर्गा सप्तशती की व्रत कथा को पढ़ेंगे । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और दुर्गा सप्तशती की व्रत कथा को जानते हैं । दुर्गा सप्तशती व्रत कथा , मां दुर्गा की पूजा एवं अर्चना नवरात्रि के सप्तमी के दिन की जाती है । भारत देश में नवरात्रि का त्योहार सभी बड़े धूमधाम से मनाते हैं । मां दुर्गा के नौ रूपों का 9 दिनों तक श्रृंगार किया जाता है और उनकी पूजा की जाती है ।सभी महिलाएं मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करती है ।

जो महिला एवं पुरुष मां दुर्गा का व्रत करता है वह सुबह प्रातः काल उठकर स्नान करके मां दुर्गा को जल चढ़ा कर उनकी पूजा-अर्चना करता है एवं व्रत करता है ।

durga saptashati katha in hindi
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मां दुर्गा सप्तशती व्रत कथा – एक बार मां पार्वती शंकर भगवान से किसी बात को लेकर नाराज हो गई थी । उनको बहुत ही क्रोध आ गया था और मां पार्वती काली का रूप धारण करके तांडव करने लगी थी । पूरी पृथ्वी कांपने लगी थी , देवी देवता भयभीत होने लगे थे । मां पार्वती के इस भयानक रूप से पूरी धरती कांपने लगी थी । जो भी मां पार्वती के इस रूप के सामने आता वह मारा जाता था ।

देवी देवताओं के साथ राक्षस कुल के दानव भी कांपने लगे थे । जब देवी देवताओं को ऐसा लगा कि यदि मां पार्वती को शांत नहीं कराया गया तो पूरी सृष्टि नष्ट हो जाएगी तब सभी देवी देवता मिलकर ब्रह्मा जी के पास गए । जाकर बोले की है पितामह आप सब कुछ जानने वाले हो । मां पार्वती ने अपना भयंकर  रूप धारण कर लिया है  और  तांडव  करने लगी हैं । यदि मां पार्वती को शांत नहीं किया गया तो पूरी पृथ्वी तबाह हो जाएगी ।

ब्रह्मा जी ने सभी देवी देवताओं से कहा कि इस समस्या का समाधान तो भोलेनाथ ही निकाल सकते हैं । हम सभी को भोलेनाथ के पास जाना चाहिए और उनसे प्रार्थना करके इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए । सभी एकत्रित होकर शंकर भगवान के पास चले गए । ब्रह्मा जी ने भोलेनाथ जी से प्रार्थना की है प्रभु मां पार्वती के द्वारा जो रूप धारण किया गया है उस रूप को शांत करें अन्यथा पूरी पृथ्वी  नष्ट हो जाएगी ।

जब ब्रह्मा  जी ने शिवजी से अनुरोध किया तब भोलेनाथ ने ब्रह्मा जी से कहा कि यदि मैं दुर्गा सप्तशती को शाप युक्त कर दूं तो उनका गुस्सा शांत हो जाएगा । ब्रह्मा जी ने भोलेनाथ से कहा कि यदि मां दुर्गा सप्तशती को शापित करने से पृथ्वी तबाह होने से बचती है तो ऐसा करना उचित होगा लेकिन मां सप्तशती शापित होने के कारण जो लोग मां दुर्गा की आराधना करेंगे , पूजा पाठ करेंगे उनको उसका फल प्राप्त नहीं होगा ।

नारद जी ने भी यह सवाल ब्रह्मा जी के सामने रखा था । जवाब देते हुए भोलेनाथ ने कहा कि जो विधि मैं बताने जा रहा हूं यदि कोई व्यक्ति नवरात्रि के सप्तमी के दिन पूरे विधि-विधान से दुर्गा सप्तशती की पूजा करेगा , विधि अनुसार मंत्रों का जाप करेगा । उसको पूरा फल प्राप्त होगा , उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होगी । इस तरह से दुर्गा सप्तशती को शाप मुक्त करने के लिए दुर्गा सप्तशती की पूरी विधि विधान से पूजा की जाती है और मंत्रों का उच्चारण किया जाता है ।

ऐसा कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति विधि-विधान से दुर्गा सप्तमी के दिन दुर्गा सप्तशती की पूजा नहीं करता है उसको कोई भी फल प्राप्त नहीं होता है ।

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