दुर्गा अष्टमी व्रत कथा durga ashtami vrat katha in hindi

durga ashtami vrat katha in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से दुर्गा अष्टमी व्रत कथा के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और दुर्गा अष्टमी व्रत कथा को बड़े ध्यान से पढ़ते हैं । दुर्गा अष्टमी व्रत पूजा करने से सभी भक्तों की मनोकामना पूरी होती है । मां दुर्गा को अष्टमी के दिन महागौरी के रूप में पूजा जाता है,  उनकी पूजा-अर्चना की जाती है ।

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अष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने से घर में सुख शांति और समृद्धि आती है । नवरात्रि के शुभ अवसर पर अष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा बड़े धूमधाम से की जाती है । मां दुर्गा को महागौरी के रूप में सजाया जाता है और मां दुर्गा की पूजा बड़े धूमधाम से की जाती है । मां दुर्गा का नाम महागौरी शंकर भगवान के द्वारा रखा गया था । मां दुर्गा अष्टमी पर एक कथा भी कही जाती है अब हम उस कथा को विस्तारपूर्वक जानेंगे ।

कथा – एक बार माता सती भगवान शिव शंकर को पति रूप में पाना चाहती थी । माता सती भगवान शंकर से इस विषय में बातचीत कर रही थी लेकिन भगवान शंकर ने कुछ ऐसा कह दिया जिसका मां सती को बुरा लग गया था ।  मां सती देवी शक्ति के रूप में घोर तपस्या करने के लिए चली गई थी और कई सालों तक अपनी तपस्या में लीन हो गई थी । जब मां देवी नहीं आई तब भोलेनाथ उनको ढूंढने के लिए चले गए थे । भोलेनाथ उस जगह पर पहुंचे जहां पर मां सती दुर्गा के रूप में पूजा कर रही थी ।

वो बहुत घोर तपस्या कर रही थी । कई वर्षों तक तपस्या करने के कारण मां देवी का शरीर पूरी तरह से काला हो गया था ।जब भोलेनाथ में देवी शक्ति का यह रूप देखा तो बहुत प्रसन्न हुए । भोलेनाथ दुर्गा शक्ति की इस घोर तपस्या से बहुत प्रसन्न हुए और देवी शक्ति को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया । भोलेनाथ ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी शक्ति को महागौरी नाम दिया । तभी से अष्टमी के दिन महादेवी को महागौरी के रूप में  पूजा जाता है । तभी से सभी मां पार्वती को महागौरी के नाम से जानने लगे थे ।

महागौरी का जो रूप था ऐसा कहा जाता है कि वह आदि शक्ति थी । आदिशक्ति का जन्म ब्रह्मा जी , विष्णु जी एवं शंकर जी के द्वारा हुआ था । आदिशक्ति का जन्म राक्षस कुल को नाश करने के लिए किया गया था ।यह वही आदि शक्ति हैं । इस तरह से नवरात्रि के अष्टमी के दिन महागौरी की पूजा की जाती है , उनको सुंदर वस्त्र व आभूषण से सजाया जाता है । क्योंकि जब भोलेनाथ देवी शक्ति को ढूंढते हुए देवी शक्ति के पास पहुंचे तब उनके रूप और आभूषण को देखकर आश्चर्यचकित हो गए थे ।

मां देवी के इस रूप को देख कर भोलेनाथ प्रसन्न हुए थे और देवी शक्ति को महागौरी के रूप में स्वीकार किया था , अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था । भोलेनाथ में देवी शक्ति को काला देख कर  देवी शक्ति को  शुद्ध जल से स्नान कराया था । जब भोलेनाथ ने  महागौरी को शुद्ध जल से स्नान कराया तब उनका रूप और भी निखर आया था । वह गोरी लगने लगी थी । इसीलिए भोलेनाथ ने देवी शक्ति का नाम महागौरी रखा था ।

उसी तरह नवरात्रि के अष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा महागौरी के रूप में की जाती है । उनको सुंदर वस्तु एवं आभूषणों से सजाया जाता है । महागौरी की पूजा पूरे विधि-विधान से की  जाति है । जो भी व्यक्ति अष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा , महागौरी की पूजा सच्चे हृदय से करता है , व्रत करता है , कन्याओं को भोजन कराता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है ।

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