दिलवाड़ा जैन मंदिर का इतिहास Dilwara jain temple history in hindi

Dilwara jain temple history in hindi

Dilwara jain – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से दिलवाड़ा जैन मंदिर के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़कर दिलवाड़ा जैन मंदिर के इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Dilwara jain temple history in hindi
Dilwara jain temple history in hindi

दिलवाड़ा जैन मंदिर के बारे में – दिलवाड़ा जैन मंदिर जैन धर्म के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है जिस दिलवाड़ा जैन मंदिर के दर्शनों के लिए जैन धर्म के लोग जाते हैं और दिलवाड़ा जैन मंदिर के दर्शन करके अपने जीवन में आनंद ही आनंद प्राप्त करते हैं । दिलवाड़ा जैन मंदिर भारत देश के राजस्थान राज्य के सिरोही जिले के माउंट आबू नगर में स्थित अद्भुत चमत्कारी मंदिर है जिस मंदिर की सुंदरता के चर्चे दूर-दूर तक किए जाते हैं । दिलवाड़ा जैन मंदिर में जैन धर्म के 5 अद्भुत सुंदर चमत्कारी मंदिर हैं जो मंदिर जैन धर्म के तीर्थको के लिए समर्पित हैं ।

दिलवाड़ा जैन मंदिर का सबसे प्राचीन अद्भुत चमत्कारी मंदिर विमल वासाही मंदिर है जिस मंदिर की सुंदरता के चर्चे दूर-दूर तक किए जाते हैं । यह विमल वासाही मंदिर जैन धर्म के प्रथम  तीर्थकर को समर्पित है और यह मंदिर तकरीबन 1031 ईस्वी में बनवाया गया था जिस मंदिर की सुंदरता आज भी सुंदर दिखाई देती है । इसके बाद दिलवाड़ा जैन मंदिर में दूसरा अद्भुत चमत्कारी जैन मंदिर लुन वासाही मंदिर है जिस मंदिर को 1231 में बनवाया गया था ।

यह मंदिर  जैन धर्म के  22वें तीर्थंकर  नेमिनाथ को समर्पित है । इस मंदिर के निर्माण में तेजपाल और वास्तु पाल जो दोनों भाई थे इन दोनों का इस मंदिर के निर्माण में महत्वपूर्णण योगदान रहा है । दिलवाड़ा जैन मंदिर का सबसे अद्भुत चमत्कारी तीसरा मंदिर पित्तल हार मंदिर है जिस मंदिर की सुंदरता के चर्चे चारों तरफ किए जातेे हैं ।इस मंदिर के निर्माण केेे बारे में ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर के निर्माण में अहमदाबाद के रहने वाले सुल्तान दादा के मंत्री भीम शाह का महत्वपूर्ण योगदान रहा है । यह मंदिर आदिनाथ को समर्पित है जिस मंदिर को 1468 ईसवी में बनवाया गया था ।

इसके बाद दिलवाड़ा जैन मंदिर का सबसे अद्भुत चमत्कारी मंदिर श्री पार्श्वनाथ मंदिर है जो जैन धर्म के महान तीर्थ कर पार्श्वनाथ को समर्पित है । इस मंदिर का निर्माण 1458 ईस्वी के दौरान मांडलिक और उनके परिवार के द्वारा कराया गया था जिस मंदिर की सुंदरता को देखने के बाद बहुत ही आनंद प्राप्त होता है । दिलवाड़ा जैन मंदिर का सबसे छोटा सुंदर मंदिर महावीर स्वामी मंदिर है जो मंदिर जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर महावीर स्वामी को समर्पित है । यह मंदिर 1582 के दौरान बनाया गया था ।

यह  दिलवाड़ा जैन मंदिर  की सबसे छोटी संरचना है  जिसको  देखने के बाद  बहुत ही आनंद प्राप्त होता है । दिलवाड़ा जैन मंदिर का निर्माण ग्यारहवीं एवं बारहवीं शताब्दी केेेे दौरान कराया गया था ।प्रतिवर्ष दिलवाड़ा जैन मंदिर के दर्शन करने के लिए जैन धर्म के लोग जाते हैं । जैन धर्म के साथ-साथ और भी कई धर्म के लोग इस मंदिर की सुंदरता को देखने के लिए  राजस्थान राज्य के  सिरोही जिले के  माउंट आबू नगर में जाते हैं  और  दिलवाड़ा जैन मंदिर  की सुंदरता को देखकर  अपने जीवन में सुख समृद्धि और आनंद प्राप्त करते हैं । दिलवाड़ा जैन मंदिर के पांच मंदिर संगमरमर के बने हुए हैं ।

दिलवाड़ा जैन मंदिर के जो 48 स्तंभ हैं उन सभी 48 स्तंभों पर नृत्यांगनाओ की मूर्तियां बनी हुई है जिसकी सुंदरता बहुुत ही सुंदर दिखाई देती है । विदेश से आए हुए पर्यटक राजस्थान में स्थित दिलवाड़ा जैन मंदिर की सुंदरता को देखने के लिए जाते हैं और दिलवाड़ा़ जैन मंदिर की सुंदरता को देखकर अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं । दिलवाड़ा जैन मंदिर के आसपास के स्थानों की सुंदरता भी दर्शनीय हैं । प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में लोग दिलवाड़ा जैन मंदिर की सुंदरता को देखने आतेे हैं और दिलवाड़ा जैन मंदिर की सुंदरता को देखकर आनंद प्राप्त करते हैं ।

जब कोई पर्यटक दिलवाड़ा जैन मंदिर में स्थित विमल वासाही मंदिर की सुंदरता को देखता है तब उसे बड़ा आनंद आता है । मंदिर के अंदर जैन धर्म के तीर्थ कर की प्रतिमा भी स्थित है जिस प्रतिमा के दर्शन करने केे बाद जैन धर्म के लोगों को सुख समृद्धि और आनंद प्राप्त होता है । दिलवाड़ा जैन मंदिर के आसपास रहने वाले लोगों की आस्था भी इस मंदिर से जुड़ी हुई है । जब दूर-दूर से जैन धर्म के लोग दिलवाड़ा जैन मंदिर के दर्शनों केेे लिए आते हैं तब दिलवाड़ा जैन मंदिर के आसपास के लोगों का व्यापार चलता है ।

दोस्तों हमारे द्वारा लिखा गया यह बेहतरीन आर्टिकल दिलवाड़ा जैन मंदिर का इतिहास Dilwara jain temple history in hindi यदि आपको पसंद आए तो सबसे पहले आप सब्सक्राइब करें इसके बाद अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों में शेयर करना ना भूलें । दोस्तों यदि आपको इस लेख में कुछ गलती नजर आए तो आप हमें कृपया पर उस गलती के बारे में हमारी ईमेल आईडी पर हमें अवश्य बताएं जिससे कि हम उस गलती को सुधार कर यह आर्टिकल आपके समक्ष पुनः प्रस्तुत कर सके धन्यवाद ।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *