दरियाव जी महाराज का जीवन परिचय Dariyav ji maharaj biography in hindi

Dariyav ji maharaj biography in hindi

दोस्तों कैसे हैं आप सभी, आज हम आपके लिए लाए हैं दरियाव जी महाराज के जीवन के बारे में तो चलिए पढ़ते हैं इनके जीवन के बारे में।

 

दरियाव जी महाराज एक ऐसे महाराज हैं जिन्होंने हम सभी को कई अनमोल बातें बताई हैं। दरियाव जी महाराज का जीवन वास्तव में प्रेरणादायक है इससे हमें काफी कुछ सीखने को मिलता है। वो भगवान श्रीराम को अपना सर्वस्व मानते थे इन्होंने अपने जीवन में कई तकलीफ भी झेली।
दरियाव जी महाराज उनके माता-पिता को एक दरिया में मिले थे दरअसल दरियाव जी महाराज के माता पिता के कोई संतान नहीं थी जिस वजह से उनके माता-पिता संतान प्राप्ति के लिए एक सागर तट के निकट यानी दरिया के पास तपस्या कर रहे थे।

काफी लंबे समय तक तपस्या करने के बाद में आखिर में उनके माता-पिता को उनकी तपस्या का परिणाम मिला और एक फूल पर तैरता हुआ छोटा सा बालक उन्हें मिल गया। यह बालक सागर में मिला था जिसे हम दरिया भी कहते हैं इसीलिए ही इनका नाम दरियाव जी महाराज हो गया। इसी नाम से आगे चलकर देश विदेशो, दुनिया में विख्यात हैं।

दरियाव जी महाराज धीरे-धीरे बड़े होने लगे। एक समय की घटना है की दरियाव जी महाराज की माताजी पानी भरने के लिए गई हुई थी लेकिन दरियाव जी महाराज जिस स्थान पर अपने बचपन में सो रहे थे वहां पर धूप आ रही थी धूप से उनको बचाने के लिए वहां पर एक शेषनाग था जो दरियाव जी महाराज पर धूप को आने से रोक रहा था। जब दरियाव जी महाराज के माता पिता आए और उन्होंने यह दृश्य देखा तो वह काफी घबरा गए लेकिन जब उन्होंने ध्यान दिया कि यह शेषनाग हमारे पुत्र पर आ रही धूप को रोकने की कोशिश कर रहा है तो वह इस चमत्कार को समझने लगे।

इस तरह से दरियाव जी महाराज ने अपने बचपन में कई चमत्कार भी किए थे। दरियाव जी महाराज जब थोड़े बड़े हुए तब केवल 7 साल की उम्र में ही उनके पिता का देहांत हो गया था जिस वजह से इन्हें और इनकी माताजी को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा था। इनकी माता इन्हें साथ में लेकर अपने मायके आ गई और वहीं पर दरियाव जी महाराज का पालन-पोषण हुआ।

जब दरियाव जी महाराज बड़े हुए तो वह शिक्षा प्राप्त करने के लिए काशी चले गए। काशी में उन्होंने गीता, वेद आदि का अध्ययन किया। दरियाव जी महाराज आगे चलकर ज्ञान प्राप्त करके एक आचार्य बन गए जिनकी प्रसिद्धि काफी तेजी से लोगों के बीच में होने लगी। लोग उन्हें सुनने के लिए दूर-दूर से आते हैं। एक बार उनकी इसी शख्स ने उनसे पूछा जी महाराज आपकी बांह गीली क्यों है दरियाव जी महाराज ने कहा कि मेरा एक भक्त पानी में डूबने वाला था मैंने उसे बचा इसीलिए मेरी यह बांह गीली है।

आगे चलकर उसी शख्स ने दरियाव जी महाराज के नाम पर एक विशेष स्थान बनवाया जो काफी प्रसिद्ध है। दरियाव जी महाराज शुरू से ही श्री राम चंद्र जी को अपना सर्वस्व समझते थे उन्होंने जीवन में समाज सुधार की भी उद्देश्य दिए। कई कुरुतिया का उन्होंने विरोध किया।छुआछूत को भी इन्होंने दूर करने का प्रयास किया। दरियाव जी महाराज रामस्नेही संप्रदाय के संस्थापक थे।

राम धाम रेण में हर साल एक उत्सव मनाया जाता है जिस उत्सव में देश ही नहीं बल्कि विदेशों के लोग भी आते हैं और अपने नेत्रों का लाभ उठाते हैं। यहां पर गुरु शिष्य की परंपरा के दर्शन पाकर अपने आप को क्रतग्य समझते हैं।

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