डाकू रत्नाकर की कथा Daku ratnakar story in hindi

Daku ratnakar story in hindi

काफी समय पहले की बात है एक जंगल में रत्नाकर नाम का डाकू रहा करता था, वह अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए जंगल में आते जाते लोगों को लूट लिया करता था इस कार्य में उसके साथी भी उसका सहयोग करते थे। एक दिन की बात है कि रत्नाकर डाकू ने नारद मुनि जी को विचरण करते हुए देखा तभी रत्नाकर ने नारद मुनि को बंदी बनाने के मकसद से कहा- रुको मुनि तुम यहां से नहीं जा सकते मैं रत्नाकर डाकू हू।

तब नारद मुनि ने कहा- मैं किसी से भयभी नहीं होता, मुझे अपने प्राणों का भी भय नहीं है लेकिन मुझे लगता है कि तुम जरूर डरे हुए हो।

यह सुनकर रत्नाकर डाकू काफी क्रोधित हुआ उसने नारद मुनि से कहा मैं डरा हुआ नहीं हु, मैं किसी से भी बिल्कुल नहीं डरता आखिर मुझे किसका भय है?

Daku ratnakar story in hindi
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तभी नारद मुनि ने मुस्कुराते हुए कहा- तुम अपने किए हुए पाप से ही डरते हो, यदि तुम अपने पाप से नहीं डरते तो जंगलों में इस तरह से छुपके हुए नहीं फिरते।

तभी रत्नाकर डाकू ने कहा कि नहीं मैं किसी से नहीं डरता मैं तुम्हें अभी बंदी बना लेता हूं, मैं जो सब कर रहा हूं यह सब अपने परिवार के लिए कर रहा हूं
तभी नारद मुनि ने रत्नाकर डाकू से कहा कि तुम अपने परिवार के लिए यह पाप करते हो क्या तुम्हारा परिवार इस पाप में भागीदारी होगा?

तभी नारद मुनि की बात सुनकर रत्नाकर डाकू एक पल के लिए सोचने लगा, नारद मुनि ने रत्नाकर से आगे कहा जाओ मैं यहां पर तुम्हारा इंतजार करता हूं तुम अपने परिवार से पूछ कर आओ कि क्या तुम्हारे पाप में तुम्हारा परिवार भागीदारी होगा?

नारद मुनि की यह बातें रत्नाकर को उचित लगी वह नारद मुनि को बंदी बनाकर अपने घर चला गया। उसने अपनी बीवी बच्चों सभी से पूछा कि मैं तुम्हारे भरण पोषण के लिए यह चोरी लूटपाट का पाप करता हूं क्या तुम इस बात में मेरा भागीदारी बनोगे? तभी रत्नाकर के बीवी बच्चों ने कहा कि नहीं, हम तुम्हारे पाप में भागीदारी नहीं बनेंगे, यह बात सुनकर रत्नाकर को काफी दुख हुआ कि मैं जिनके लिए यह पाप करता है वो मेरे इस पाप में भागीदारी नहीं बनेंगे तब वह नारद मुनि के पास गया।

रत्नाकर ने नारद मुनि को सारी बातें बताई तब नारद मुनि ने कहा वास्तव में यही सत्य है तुम जो भी पाप करते हो उसका भागीदार तुम ही हो ना कि कोई ओर। नारद मुनि ने रत्नाकर डाकू को कई और उपदेश भी दिए वास्तव में नारद मुनि के इस तरह के उपदेशों से रत्नाकर डाकू का ह्रदय पूरी तरह से परिवर्तित हो गया।

नारद मुनि ने जाने से पहले रत्नाकर को राम-राम नाम का जाप करने को कहा लेकिन रत्नाकर राम राम नहीं कह पाता था तब नारद मुनि ने रत्नाकर से कहा कि तुम मरा मरा का जाप किया करो इस तरह से रत्नाकर हमेशा मरा मरा नाम का जप करने लगा जिससे उसके मुंह से राम राम स्वता ही निकलने लगा। भगवान श्री राम के नाम के जप से डाकू रत्नाकर पूरी तरह से बदल गया। जो रत्नाकर जंगल में आते जाते लोगों को मारकर लूट लिया करता था वह रत्नाकर डाकू आगे चलकर महर्षि वाल्मीकि जी के नाम से विख्यात हुआ जिन्होंने संस्कृत में रामायण लिखी।

वास्तव में रत्नाकर डाकू यानी महर्षि बाल्मीकि जी की यह जीवन की कहानी काफी प्रेरणादायक है। यह कहानी हमको बताती है कि किस तरह से भगवान श्री राम जी के नाम के जाप से एवं नारद मुनि के दिए हुए उपदेशों से रत्नाकर डाकू महर्षि वाल्मीकि जी के नाम से विख्यात हुए। हम सभी भी जब भी चाहे अपनी बुराई को दूर करके अच्छाई को अपना सकते हैं और जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।

हमें बताएं कि रत्नाकर डाकू पर हमारे द्वारा लिखी यह कहानी Daku ratnakar story in hindi आपको कैसी लगी।

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