दगड़ूशेठ हलवाई गणपति मंदिर का इतिहास Dagdusheth ganpati history in hindi

Dagdusheth ganpati history in hindi

Dagdusheth ganpati – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल  के माध्यम से दगड़ूशेठ हलवाई गणपती मंदिर के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं । तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़कर दगड़ूशेठ हलवाई गणपती मंदिर के इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Dagdusheth ganpati history in hindi
Dagdusheth ganpati history in hindi

दगड़ूशेठ हलवाई गणपति मंदिर के बारे में – दगड़ूशेठ हलवाई गणपती मंदिर महाराष्ट्र राज्य के पुणे में स्थित सबसे सुंदर , अद्भुत , चमत्कारी मंदिर है जिस मंदिर की सुंदरता के चर्चे चारों तरफ किए जाते हैं । यह महाराष्ट्र के पुणे का सबसे लोकप्रिय प्रसिद्ध मंदिर है जिस मंदिर के दर्शनों के लिए काफी भक्तों का जमावड़ा एकत्रित होता है । इस मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जो भी भक्त इस मंदिर के दर्शन करने के लिए जाता है उस भक्त की सभी मुरादें 30 दिन में ही पूरी हो जाती हैं । इस मंदिर के निर्माण के बारे में ऐसा कहा जाता है कि एक हलवाई था जिसका नाम दगड़ूशेठ था । वह मुख्य रूप से लिंगायत कर्नाटक का व्यापारी था ।

परंतु वह पुणे में आकर रहने लगा था और पुणे में उसको गाड़वे नाम से जानते थे । जब पुणे में प्लेग की बीमारी बहुत तेजी से फैली तब उस बीमारी के कारण दगड़ूशेठ हलवाई के पुत्र का देहांत हो गया था । जिसके कारण दगड़ूशेठ हलवाई और उसकी पत्नी काफी दुखी रहने लगे थे । दुख इतना बढ़ गया था कि उनके जीवन में खुशी आ ही नहीं रही थी । जिसके बाद दगड़ूशेठ हलवाई ने उनके गुरु से मिलने का फैसला किया और उन्होंने अपनी पत्नी के साथ गुरु के पास जाने का फैसला किया था । जब दगड़ूशेठ हलवाई गुरु के पास पहुंचे तब दगड़ूशेठ हलवाई ने गुरु को सारी बात बता दी थी ।

जिसके बाद गुरु ने दगड़ूशेठ हलवाई से यह कहा था कि तुम भगवान श्री की दो प्रतिमा बनवा कर उन प्रतिमाओं की स्थापना कराओ जिससे तुम्हारे जीवन में खुशी आएगी । अपने गुरु की बात को मानकर दगड़ूशेठ हलवाई ने दो श्री भगवान की प्रतिमाओं को बनवाया और उनकी स्थापना की थी । जिसमें दत्ता महाराज की एक प्रतिमा थी और दूसरी प्रतिमा श्री गणपति जी की थी और उन्होंने पूरे नियमों को अपनाकर प्रतिमाओं की स्थापना कराई थी । आज भी दगड़ूशेठ हलवाई के परिवार बालों की एक दुकान वहां पर है और उनके परिवार के लोग उस हलवाई की दुकान को चलाते हैं ।

इस मंदिर की सुंदरता के चर्चे चारों तरफ किए जाते हैं । इस मंदिर मे गणेश भगवान की जो प्रतिमा है वह प्रतिमा 7.5 फिट ऊंची एवं 4 फीट चौड़ी है । गणेश प्रतिमा पर तकरीबन 8 किलोग्राम सोने की परत चढ़ी हुई है जिससे इस प्रतिमा की सुंदरता अद्भुत सुंदर और चमत्कारी दिखाई देती है । भगवान पीठासीन की जो प्रतिमा है वह प्रतिमा मंदिर के बाहर से ही भक्तों को दिखाई देती है । इसके बाद मंदिर का प्रवेश द्वार भी बहुत सुंदर है । मंदिर के प्रवेश द्वार पर जय और विजय नाम की दो मूर्ति भी लगी हुई हैं जो मूर्ति संगमरमर की बनी हुई हैं ।

इस मंदिर के दर्शनों के लिए प्रतिदिन काफी भक्तों का जत्था दर्शन करने के लिए आता है । गणेश चतुर्थी के दिन इस मंदिर पर काफी भीड़ एकत्रित होती है और गणेश चतुर्थी के दिन इस मंदिर पर विशेष पूजा का आयोजन भी किया जाता है । जिस पूजा में दूर-दूर से लोग आते हैं और भगवान की पूजा में अपना योगदान देते हैं । गणेश चतुर्थी पर दगड़ूशेठ हलवाई गणपती मंदिर पर मेला भी लगता है जिस मेले को देखने के लिए दूर दूर से लोग आते है और आंनद प्राप्त करते हैं । मेला लगने से दगड़ूशेठ हलवाई गणपती मंदिर की सुंदरता और भी अद्भुत , सुंदर चमत्कारी हो जाती है । जब गणेश चतुर्थी का दिन आता है  तब उससे पहले इस मंदिर की सजावट को प्रारंभ किया जाता है ।

दगड़ूशेठ हलवाई गणपती मंदिर के दर्शनों के लिए आसपास के लोगों के साथ साथ कई प्रदेशों के लोग आते हैं और दगड़ूशेठ हलवाई गणपती मंदिर के दर्शन करके आनंद प्राप्त करते हैं । जो भी भक्त दगड़ूशेठ हलवाई गणपती मंदिर के दर्शन करने के लिए आता है वह यह आशा लेकर आता है कि दगड़ूशेठ हलवाई गणपती मंदिर के दर्शन करने के बाद उसकी सभी मुरादें पूरी हो जाएंगी ।

दगड़ूशेठ हलवाई गणपती मंदिर से काफी लोगों की आस्था जुड़ी हुई है इसीलिए दगड़ूशेठ हलवाई गणपती मंदिर महाराष्ट्र के पुणे का सबसे सुंदर अद्भुत और चमत्कारी मंदिर के रूप में पहचाना जाता है ।यदि आप लोग भी दगड़ूशेठ हलवाई गणपती मंदिर की सुंदरता को अपनी आंखों से देखना चाहते हो तो आपको महाराष्ट्र के पुणे जाकर इस मंदिर की सुंदरता को अपनी आंखों से अवश्य देखना चाहिए ।

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