दादासाहेब फालके की जीवनी dadasaheb phalke biography in hindi

dadasaheb phalke biography in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से दादासाहेब फालके के जीवन के बारे में बताने जा रहे हैं . चलिए अब हम इस लेख को पढ़ते हैं और दादा साहेब फालके के जीवन के बारे में जानकारी लेते हैं .

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जन्म स्थान व् परिवार – दादासाहेब फालके का पूरा नाम धुंडीराज गोविंद फालके था . उनका जन्म 30  अप्रैल 1870 को नासिक के त्रियंबकेश्वर से 30 किलोमीटर दूर हुआ था . उनके पिता का नाम गोविंद फालके था . इनके पिता बहुत बड़े विद्वान व्यक्ति थे . इनके पिता प्रसिद्ध जाने-माने विद्वान माने जाते थे . दादा साहेब फाल्के के पिताजी संस्कृत के महान विद्वान थे . वह कॉलेज के प्राध्यापक भी थे . दादासाहेब फालके की पत्नी का नाम सरस्वती बाई फाल्के था .

शिक्षा – दादासाहेब फालके को शिक्षा दिलाने के लिए उनके पिता ने 1885 को मुंबई के जे जे स्कूल में भर्ती करा दिया था . जहां से दादा फालके ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी . सन 1890 में जे जे स्कूल से दादासाहेब फालके ने अपनी पढ़ाई पूरी की थी . इसके बाद वह बड़ोदरा चले गए थे . बड़ोदरा के सयाजीराव विश्वविद्यालय बरोदा कॉलेज में उन्होंने एडमिशन लिया था और वहां से वह मूर्ति कला , ड्राइंग , इंजीनियरिंग , पेंटिंग और फोटोग्राफी का अभ्यास करने लगे थे .

दादासाहेब फालके का मन सबसे ज्यादा फोटोग्राफी करने और पेंटिंग करने में लगता था . पढ़ाई के बाद जब भी उनको समय मिलता था तब वह अपने हाथों से पेंटिंग बनाया करते थे . दादासाहेब फालके ने कॉलेज समय में काफी पेंटिंग बनाई थी . उनको अच्छी पेंटिंग बनाने के लिए कॉलेज के द्वारा पुरस्कृत भी किया गया था .

फोटोग्राफी एवं पेंटिंग केरियर – दादासाहेब फालके ने पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने कैरियर की शुरुआत फोटोग्राफर के रूप में की थी . वह गोधरा चले गए थे और वहां पर फोटोग्राफर का काम करने लगे थे . उस समय के वह सबसे बड़े फोटोग्राफर थे . जब उनकी पहली पत्नी का निधन हो गया था तब उन्होंने फोटोग्राफर का काम छोड़ दिया था . इसके बाद उनकी मुलाकात जर्मन की एक जादूगर से हुई थी जिसका नाम कार्ल हटर्ज था . दादासाहेब फालके ने उनके साथ भी काम किया था .

इसके बाद दादा साहब फाल्के ने अपनी ही एक प्रिंटिंग प्रेस प्रारंभ की थी . प्रिंटिंग प्रेस में उनको काफी नुकसान  हुआ था . नुकसान  होने के बाद उनके ऊपर काफी कर्जा  हो गया था . जो प्रिंटिंग प्रेस में उनके साथ थे वह भी फालके का साथ छोड़ कर चले गए थे .

फिल्मी कैरियर- दादासाहेब फालके ने अपने कैरियर की शुरुआत 1913 को की थी . उन्होंने फिल्म जगत में अपने कैरियर की शुरुआत अपनी पहली फिल्म राजा हरिशचंद्र से की थी . जब उनकी यह फिल्म सुपरहिट हुई  तब उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा . राजा हरिश्चंद्र फिल्म के बाद उन्होंने हर तरह की फिल्मे बनाई थी  और यह फिल्म  सुपरहिट रही थी . फिल्म जगत में उनको फिल्म इंडस्ट्रीज  का निर्माता माना जाता है . फिल्म जगत के जनक के रूप में उनको सभी जानते हैं .

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को  अच्छे मुकाम पर पहुंचाने में दादा साहेब फाल्के का बहुत ज्यादा योगदान था . 1983 लेकर 1937 तक उन्होंने 95 फिल्में बना ली थी . दादासाहेब फालके ने 26 लघु फिल्में भी बनाई थी . दादासाहेब फालके ने अपने फिल्मी कैरियर में 100 से भी ज्यादा फिल्मे  बनाई थी और वह फिल्में सुपरहिट रही थी .   1913 में दादा साहेब फाल्के की पहली फिल्म राजा हरिश्चंद्र सबसे अच्छी फिल्म मानी जाती है . 1913 में ही दादासाहेब फालके ने मोहिनी भस्मासुर फिल्म बनाई थी .

दादासाहेब फालके  ने 1914 में सत्यवान सावित्री फिल्म बनाई थी . दादासाहेब फालके ने  1917 में लंका दहन फिल्म बनाई थी . 1918 में श्री कृष्णजन्म फिल्म बनाई थी . यह फिल्में दादासाहेब फालके की सबसे अच्छी और सुपरहिट फिल्में थी .

पुरस्कार – दादासाहेब फालके को फिल्म जगत का निर्माता माना जाता है . दादासाहेब के सम्मान में 1969 में भारत सरकार ने दादासाहेब फालके अवॉर्ड देने की घोषणा की थी . फिल्म जगत का यह सबसे बड़ा अवॉर्ड माना जाता है . भारत सरकार के द्वारा उनके फोटो का पोस्टल स्टैंप भी डाकघर के द्वारा 1971 को शुरू किया गया था .

मृत्यु – दादासाहेब फालके का निधन 16 फरवरी 1944 को हुआ था .

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