चूड़धार मंदिर का इतिहास Churdhar temple history in hindi

Churdhar temple history in hindi

Churdhar temple – दोस्तों आज हम आपको एक आर्टिकल के माध्यम से चूड़धार मंदिर के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं । तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस जबरदस्त आर्टिकल को पढ़कर चूड़धार मंदिर के इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Churdhar temple history in hindi
Churdhar temple history in hindi

Image source – https://commons.m.wikimedia.org/wiki/File:Churdhar,_Sirmour_(Him

चूड़धार मंदिर के बारे में – चूड़धार मंदिर भारत देश का सबसे प्रसिद्ध सुंदर और चमत्कारी मंदिर है जिस मंदिर की सुंदरता के चर्चे भारत देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी किए जाते हैं । चूड़धार मंदिर पहाड़ी पर स्थित होने के कारण और भी अद्भुत और सुंदर दिखाई देता है । चूड़धार मंदिर भारत देश के हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित है । यह मंदिर चूड़धार पर्वत पर स्थित है । इस मंदिर की दूरी  समुद्र तल से 11965 फिट की ऊंचाई पर है जिसकी सुंदरता वाकई में देखने के लायक है । जो भी व्यक्ति चूड़धार मंदिर  के दर्शन करने के लिए जाता है वह अपने जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त करता है ।

भारत देश के चूड़धार  मंदिर को शिरगुल महाराज का स्थान भी माना जाता है । जहां पर कई पर्यटक जाकर मंदिर के दर्शन करके आनंद प्राप्त करते हैं । शिरगुल महाराज के विशाल मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है । शिरगुल महाराज के बारे में लोगों के द्वारा ऐसा कहा जाता है की शिरगुल महाराज सिरमौर चौपाल के देवता है । आज इस मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है । भारत देश के कोने कोने से इस मंदिर के दर्शन के लिए लोग आते हैं और मंदिर के दर्शन करके अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं । भारत देश के हिमाचल प्रदेश का यह चूड़धार मंदिर वाकई में अपनी सुंदरता के लिए पहचाना जाता है ।

भारत देश का हिमाचल प्रदेश सबसे सुंदर राज्य के रूप में पहचाना जाता है । हिमाचल प्रदेश की सुंदर-सुंदर पहाड़ियां , ऊंचे ऊंचे पहाड़ , चोटी दर्शनीय हैं  उसी तरह से हिमाचल प्रदेश का चूड़धार मंदिर बहुत सुंदर और अद्भुत चमत्कारी मंदिर है ।चूड़धार मंदिर के निर्माण को लेकर एक कथा भी कही जाती है । कथा के अनुसार चूड़धार मंदिर के बारे में यह कहा जाता है कि एक बार एक व्यक्ति जो भगवान शिव का परम भक्त था वह अपने बेटे के साथ हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों से होकर गुजर रहा था । अचानक से एक बड़े पहाड़ में से एक सांप निकल कर उस शिव भक्त के सामने खड़ा हो गया था ।

भगवान भोलेनाथ का जो परम भक्त था उस परम भक्त का नाम चुरू था । जब चुरू ने सांप को देखा तो वह अपने पुत्र को अपनी गोद में उठाकर भागने लगा था । परंतु वह सांप चुरू और उसके बेटे के पीछे भागने लगा था । यह देख चुरु पूरी तरह से परेशान हो गया था । उसको कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें । जब चुरू ने यह देखा कि यह सांप उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है तब चुरू ने भगवान  भोलेनाथ की उपासना की थी । जब चूरू के द्वारा भगवान भोलेनाथ की उपासना की गई तब भोलेनाथ चुरू जी उपासना से खुश हो गए थे ।

भोलेनाथ ने चुरू की जान बचाने के लिए एक विशाल पर्वत को उस सांप के ऊपर फेंक दिया था जिससे उस सांप की मौत हो गई थी । यह चमत्कार देखकर चुरू भोलेनाथ के द्वारा की गई मदद की प्रशंसा करने लगा और भोलेनाथ की उपासना करने लगा था । जिसके बाद भोलेनाथ के प्रिय भक्त चुरू ने उस पर्वत पर मंदिर का निर्माण कराया और उस मंदिर में रहकर भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना करने लगा था । जब वहां पर मंदिर की स्थापना की गई तब लोगों की आस्था उस मंदिर से जुड़ गई थी । इसके बाद उस मंदिर का नाम चूड़धार मंदिर रखा गया था ।

जब लोगों की आस्था इस मंदिर से जुड़ने लगी थी तब यह भारत देश का प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो गया था । चूड़धार  मंदिर के दर्शन के लिए प्रति वर्ष कई पर्यटक आते हैं और चूड़धार मंदिर के दर्शन करके अपने जीवन में सुख समृद्धि और आनंद प्राप्त करते हैं । चूड़धार मंदिर की सुंदरता को देखते हुए विदेश के महान लेखक जॉन केय द्वारा चूड़धार मंदिर पर एक पुस्तक लिखी गई थी जिस पुस्तक को जॉन केय ने द ग्रेट आर्क नाम दिया था । इस पुस्तक में जॉन केय  ने चूड़धार मंदिर को द चूर कहकर संबोधित किया था ।

जब जॉर्ज एवरेस्ट के द्वारा हिमालय पर्वत के आस-पास के क्षेत्र पर रिसर्च किया गया तब 1834 के आसपास हिमाचल प्रदेश के चूड़धार मंदिर  पर भी जॉर्ज एवरेस्ट के द्वारा  रिसर्च किया गया था ।

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