बुरा जो देखन मैं चला पर निबंध Bura jo dekhan main chala essay in hindi

Bura jo dekhan main chala essay in hindi

Bura jo dekhan main chala – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बुरा जो देखन में चला पर लिखे निबंध के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और बुरा जो देखन में चला पर लिखें निबंध के बारे में पढ़ते हैं ।

Bura jo dekhan main chala essay in hindi
Bura jo dekhan main chala essay in hindi

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बुरा जो देखन में चला बुरा ना मिलया कोय जो बुरा देखा आपना मुझसा बुरा ना कोई । यह दोहा संत कबीर के द्वारा लिखा गया था । जिस दोहे का अर्थ है जब कोई व्यक्ति बाहर बुरा देखने के लिए निकलता है तब वह दूसरों में बुराइयां खोजता रहता है । जब वह व्यक्ति दूसरों में बुराई खोजते हुए घर पर वापस आता है और अपने आप में बुराई खोजता है तब उसे यह मालूम लग जाता है कि मुझसे बुरा कोई नहीं है । इसीलिए दूसरों में बुराई खोजने से पहले हमें अपने अंदर की बुराई को देखना चाहिए ।

जब हम अपने आप में बुराई देखेंगे तब हमें यह मालूम चल जाएगा कि हमारी बुराई कितनी बुरी हैं और हमें अपनी बुराइयों को छोड़ देना चाहिए । इसी उद्देश्य के साथ संत कबीर जी ने यह दोहा लिखा है और लोगों को यह संदेश दिया है कि किसी दूसरे में बुराई खोजने से तो अच्छा है हम अपनी अंदर की बुराइयों को देखें और उन बुराइयों से छुटकारा पाने की कोशिश करें । बुरी आदत और मनुष्य की बुराइयां उसको सफल व्यक्ति बनने से रोकती हैं ।

संत कबीर दास जी ने यह दोहा सिर्फ व्यक्ति को अच्छाई के रास्ते पर ले जाने के उद्देश्य से लिखा था । कुछ लोग ऐसे होते हैं जो सिर्फ दूसरों में ही बुराई को खोजते हैं और अपनी बुराइयों पर वह ध्यान नहीं देते हैं । जब कोई व्यक्ति अपनी बुराइयों को छुपाता है तब वह व्यक्ति बहुत ही कमजोर और असहाय हो जाता है । वह अपनी बुराइयों को छुपाने के लिए झूठ बोलने लगते हैं और गलत काम करने लगते हैं । जब व्यक्ति अपनी बुराइयों को देखकर उन बुराइयों को छोड़ने का प्रण ले लेता है तब वह व्यक्ति सफलता की हर ऊंचाई को प्राप्त कर लेता है ।

जो व्यक्ति दूसरों में बुराई खोजता रहता है वह सिर्फ दूसरों में बुराई ही खोजता रहता है । वह अपने जीवन को सिर्फ बुराई खोजने में ही बिता देता है और उसके अंदर की बुराइयां उसको सफल होने से रोकती रहती हैं । संत कबीर जी ने बराई को नष्ट करने के उद्देश्य से यह दोहा लिखा था और सभी को सत्य के रास्ते पर चलाने के लिए यह कहा था कि यदि कोई व्यक्ति किसी बुराई में लुप्त है तो उस व्यक्ति की बुराइयों पर हंसने से पहले हमें अपनी बुराइयों को टटोलना चाहिए ।  यदि हम उस बिराई से दूर हैं तो उस व्यक्ति को सही रास्ते पर लाने का प्रयत्न करना चाहिए ।

यदि कोई व्यक्ति हमें गाली दे रहा है तो हमें उस व्यक्ति को गाली देकर बात नहीं करनी चाहिए क्योंकि यदि गाली देने की बुराई उस व्यक्ति में हैं तो वह बुराई हमारे अंदर नहीं होनी चाहिए । यदि हम भी उस व्यक्ति की तरह गाली देंगे तो उस व्यक्ति और हमारे चरित्र में क्या अंतर रह जाएगा और हम भी उस व्यक्ति की तरह एक बुरे व्यक्ति की श्रेणी में आ जाएंगे । इसलिए हमें दूसरों में बुराई ढूंढने से पहले हमारे अंदर बुराई ढूंढ लेना चाहिए और उस बुराई को नष्ट करने का प्रयास करना चाहिए ।हमारे भारत देश के कई कबीर संतो , महापुरुषों ने भी बताया है कि सत्य के रास्ते पर चलकर ही सफलता प्राप्त की जा सकती है ।

जो व्यक्ति गलत रास्ते पर चलकर सफलता प्राप्त करता है उस व्यक्ति की सफलता क्षणभंगुर होती है । वह किसी भी समय असफलता प्राप्त कर सकता है और जो व्यक्ति सफलता को प्राप्त करने के लिए सच्चाई का रास्ता अपनाता है वह व्यक्ति सफल होने के बाद उसकी खुशी दुगनी हो जाती है । इसलिए सफल व्यक्ति बनने के लिए सच्चाई का रास्ता अपनाना चाहिए । अपनी बुराइयों पर पर्दा नहीं डालना चाहिए बल्कि अपनी बुरी आदतों को छोड़ने की कोशिश करना चाहिए ।

बुरी आदतों से ही इंसान एक बुरा इंसान बनता है और उस व्यक्ति की बुरी आदतों को देखकर कोई भी व्यक्ति उस व्यक्ति से संबंध रखना नहीं चाहता है और वह अपनी बुरी आदतों के कारण सभी की नजरों में अपना सम्मान खो देता है ।

बुरा जो देखन मैं चला पर विचार bura jo dekhan main chala quotes in hindi

बुरा जो देखन में चला बुरा ना मिलिया कोई जो मन खोजा आप ना मुझसा बुरा ना कोई – कबीर दास

किसी दूसरे व्यक्ति में बुराई को ढूंढने वाला व्यक्ति की मिसाल उस मक्खी की तरह होती है जो खूबसूरत जिस्म को छोड़कर घाव बाले स्थान पर बैठती है ।

किसी व्यक्ति में बुराई वही इंसान खोजता है जो छोटी सोच का होता है । बड़ी सोच का व्यक्ति तो माफ करने में यकीन रखता है ।

जब किसी इंसान की अच्छाई पर चर्चा होती है तब सब खामोश रहते हैं और जब किसी इंसान की बुराई पर चर्चा होती है तब गूंगे भी बोल पड़ते हैं ।

यदि हम किसी व्यक्ति की बुराई को अच्छाई में बदलना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें अपनी बुराइयों को बदलना चाहिए ।

दूसरों में बुराई ढूंढने से पहले खुद में बुराई खोज लेनी चाहिए । यदि उसमें ही कुछ बुराई है तो वह दूसरों की बुराई को अच्छाई में कैसे बदलेगा ।

दूसरों में बुराई ढूंढने वाला व्यक्ति कमजोर होता है और जो व्यक्ति अपने आप में बुराई को ढूंढता है वह सफलता की ऊंचाई को प्राप्त करता है ।

दूसरों में बुराई ढूंढने वाला व्यक्ति अपने आपको महान समझता है परंतु वह महान होता नहीं है और जो व्यक्ति खुद में बुराई को ढूंढता है वह व्यक्ति सबसे पहले अपने अंदर की बुरी आदतों का विनाश करता है ।

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