भोरमदेव मंदिर का इतिहास Bhoramdeo temple history in hindi

Bhoramdeo temple history in hindi

Bhoramdeo temple – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से भारत देश के छत्तीसगढ़ राज्य के भोरमदेव मंदिर के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं । तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़कर भोरमदेव मंदिर के इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Bhoramdeo temple history in hindi
Bhoramdeo temple history in hindi

Image source – https://commons.m.wikimedia.org/wiki/File:Bhoramdeo_Temple.JPG

भोरमदेव मंदिर के बारे में – भोरमदेव मंदिर भारत देश के छत्तीसगढ़ राज्य का सबसे सुंदर अद्भुत चमत्कारी मंदिर है । इस मंदिर को देखने के बाद एक आनंद प्राप्त होता है ।भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित कबीरधाम जिले से तकरीबन 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जिस मंदिर के दर्शनों के लिए लाखों की संख्या में लोग जाते हैं और मंदिर के दर्शन करके अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं । जो भक्तगण रायपुर से होकर भोरमदेव मंदिर के दर्शनों के लिए जाता है वह रायपुर से तकरीबन  125 किलोमीटर की यात्रा करते हुए चौरागांव में पहुंचता है जिस गांव में भोरमदेव का सबसे अद्भुत चमत्कारी मंदिर स्थित है ।

इस मंदिर की सुंदरता की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है । यह मंदिर तकरीबन 1000 वर्ष पुराना मंदिर है जिस मंदिर की सुंदरता आज भी सुंदर दिखाई देती है । इस मंदिर के निर्माण के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण राजा गोपाल देव के द्वारा कराया गया है । भारत देश के छत्तीसगढ़ राज्य का एक सुंदर और अद्भुत चमत्कारी मंदिर मैकल पर्वत समूहों से घिरा हुआ है । यह मंदिर पहाड़ों के बीच  होने के कारण और भी अधिक सुंदर दिखाई देता है । भारत देश के छत्तीसगढ़ राज्य के भोरमदेव मंदिर के निर्माण की नींव 11वीं शताब्दी में गोपाल देव के द्वारा रखी गई थी ।

जब गोपाल देव के द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया जा रहा था तब गोपाल देव के द्वारा बहुत अधिक मेहनत की गई थी । गोपाल देव के द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराने के लिए दूर-दूर से नक्काशी कलाकारों को बुलाया गया था जिन नक्काशी कलाकारों के द्वारा इस मंदिर को सुंदरता प्रदान की गई थी । इस मंदिर की बनावट खजुराहो की तरह बनाई गई है । इसी कारण से इस मंदिर को छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी कहा जाता है । जब दूर-दूर से पर्यटक इस मंदिर की सुंदरता को देखते हैं तब उनको इस मंदिर में खजुराहो की झलक दिखाई देती है । इसी कारण से इस मंदिर को छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाता है ।

मंदिर के अंदर प्रवेश करने के मुख्य तीन प्रवेश द्वार है जहां से भक्तगण आकर मंदिर के अंदर जाकर भगवान महादेव की पूजा अर्चना करके अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं । इस मंदिर का नाम भोरमदेव मंदिर इसलिए रखा गया है क्योंकि भोरमदेव भगवान भोलेनाथ का बहुत प्रिय भक्त था । ऐसा भी कहा जाता है कि भोरमदेव भगवान भोलेनाथ का ही अंश था जिसके द्वारा भोरमदेव के द्वारा भगवान भोलेनाथ की कठोर तपस्या की गई थी । उन्हीं के नाम पर इस मंदिर का नाम भोरमदेव मंदिर रखा गया था ।

जब नौवीं शताब्दी से लेकर 11 वीं शताब्दी तक  इस मंदिर का निर्माण कार्य कराया जा रहा था तब आसपास के क्षेत्र के लोगों ने भी इस मंदिर के निर्माण के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था । यह मंदिर भोलेनाथ को समर्पित है । भारत देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी भोलेनाथ के भक्त गण छत्तीसगढ़ में आकर छत्तीसगढ़ में स्थित भोरमदेव मंदिर के दर्शन करके अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं । जब हम इस मंदिर को देखते हैं तब ऐसा प्रतीत होता है कि इस मंदिर को चंदेल शैली में बनाया गया हो । आज हम इस मंदिर की सुंदरता की जितनी प्रशंसा करें उतनी कम है ।

यह शंकर भगवान का सबसे प्रसिद्ध चमत्कारी मंदिरों में से एक है जिस मंदिर को देखने के लिए भक्तगण भोरमदेव मंदिर के दर्शनों के लिए जाते हैं । जब हम इस मंदिर को देखते हैं तब ऐसा नहीं लगता है कि यह मंदिर  1000 साल पुराना हो यह मंदिर ऐसा लगता है जैसा कि अभी बनाया गया हो । कहने का तात्पर्य यह है  1000 साल पुराना मंदिर होने के बाद भी आज भी इसकी सुंदरता बरकरार है । इस मंदिर को देखने के बाद बहुत अच्छा लगता है । यदि हम छत्तीसगढ़ के भोरमदेव मंदिर की सुंदरता को देखना चाहते हैं तो हमें इस मंदिर के दर्शनों के लिए छत्तीसगढ़ अवश्य जाना चाहिए और भोरमदेव के मंदिर के दर्शन करके आनंद प्राप्त करना चाहिए ।

जब हम अपनी आंखों से भोरमदेव मंदिर को देखेंगे तब हमें पता चलेगा कि इस मंदिर की कितनी अच्छी सुंदरता है जिस मंदिर के दर्शन  से हमें आनंद प्राप्त होता है । भारत देश में भगवान भोलेनाथ के कई भक्त हैं और उन सभी भक्तों की आस्था भोरमदेव मंदिर से जुड़ी हुई है ।

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