भगवान परशुराम का जीवन परिचय Bhagwan parshuram story in hindi

History of parshuram in hindi

Biography of parshuram in hindi-परशुराम जी का जन्म वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था ये भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं इनके पिता का नाम जमादग्नि ऋषि और माता का नाम रेणुका था.परशुराम इन दोनों की पांचवी संतान थे.

परशुराम जब थोड़े बड़े हुए तो जमादग्नि ऋषि बहुत ही बुरी आर्थिक स्थिति से जूझ रहे थे उनके पास अपने परिवार वालो का भरण पोषण करने के लिए भी कुछ नहीं था जिस वजह से उन्होंने ब्रह्मा जी की आराधना की और ब्रह्मा जी की आराधना करने पर ब्रह्मा जी ने जमादग्नि ऋषि को एक कामधेनु गाय दे दी उस गाय से जो मांगते वह मिल जाता था.इस तरह से जमादग्नि ऋषि का पूरा परिवार खुशी-खुशी जीवन यापन कर रहा था उनकी हर जरूरत पूरी हो रही थी.

Bhagwan parshuram story in hindi
Bhagwan parshuram story in hindi

एक समय की बात है की परशुराम जी से उनके पिता जमादग्नि ने भगवान शिव शंकर की आराधना करने को कहा अपने पिता की आज्ञा अनुसार भगवान परशुराम भगवान शिव की आराधना करने लगे. भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना से खुश होकर उन्हें अपना परशु दे दिया और तभी से इनका नाम राम से परशुराम हुआ और इसी नाम से उन्हें आज दुनिया वाले जानते हैं.

एक समय की बात है की जमादग्नि ऋषि की पत्नी रेणुका नदी तट पर गई हुई थी उन्होंने एक बहुत ही सुंदर राजा चित्ररथ को देखा.रेणुका ने जब चित्ररथ को देखा तो उनका मन कुछ गलत बातों में जाने लगा जब वह अपने पति के पास पहुंची तो जमादग्नि ऋषि ने अपनी मन की दृष्टि से सब कुछ समझ लिया वह अत्यंत क्रोधित हुए उन्होंने अपने पुत्रो से अपनी माता का सिर काटने को कहा लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं मानी और जब परशुराम से कहां गया तो परशुराम ने बिल्कुल देर किए बगैर अपनी माता का सिर काट दिया और इसी के साथ महा ऋषि ने उनके भाइयों का भी सर धड़ से अलग करने को कहा.

परशुराम जी ने जब अपने पिता की इस तरह की बात मान ली तो महर्षि जमादग्नि बहुत ही खुश हुए उन्होंने परशुराम से कोई वर मांगने को कहा तभी परशुराम जी ने वर मांगा कि पिताश्री आप मेरी माता और भाइयों को जीवित कर दीजिए और यह भी कीजिए कि वह यह सब भूल जाए जिससे वह पहले की तरह मुझसे प्रेम रखें.महा ऋषि जमादग्नि बहुत ही खुश थे उन्होंने अपने पुत्र परशुराम की इच्छा पूरी की और उनकी माता और भाई पुनर्जीवित हो गए.

एक समय की बात है कि परशुराम अपने भाइयों समेत जंगल में गए हुए थे तभी क्षत्रिय राजा कार्तवीर्य अर्जुन जो कि रावण को पराजित करके वहां से गुजर रहे थे वह जमादग्नि ऋषि के आश्रम आए और उनसे कुछ समय अपने आश्रम में रुकने की अनुमति मांगी और जब महर्षि जमादग्नि ने उनका विशेष स्वागत किया और जब उस राजा को पता लगा कि ऋषि के पास कामधेनु गाय है जो उसकी हर इच्छा पूरी कर देती है तो अर्जुन ने उस गाय को अपने साथ ले जाने का विचार किया और वह जबर्दस्ती कामधेनु गाय को अपने साथ ले गए

जब यह बात परशुराम को पता लगी तो परशुराम क्रोधित होकर राजा कार्तवीर्य अर्जुन के दरबार जा पहुंचे और उनकी सेना से युद्ध किया उन्होंने उनकी सारी सेना का विनाश कर दिया और अंत में उन्होंने राजा को भी मार डाला वह अपनी कामधेनु गाय वापस लेकर चले गए कुछ समय बाद राजा कार्तवीर्य अर्जुन के पुत्र भी परशुराम से युद्ध करने के लिए चले आए परशुराम ने उनका भी विनाश कर दिया इस तरह से कहा जाता है कि परशुराम ने कई बार इस पृथ्वी को क्षत्रियों से विहीन कर दिया और महेंद्र पर्वत पर तपस्या करने के लिए चले गये

जब भगवान श्रीराम ने जनकपुरी में भगवान शिव शंकर के धनुष पर प्रत्यंचा चलाई तो भगवान परशुराम जी धनुष टूटने की आवाज सुनकर बहुत ही क्रोधित हुए और वहां पर आ गए लक्ष्मण जी और परशुराम जी का वाद विवाद भी हुआ लेकिन अंत में परशुराम जी भगवान श्रीराम के रूप को समझ चुके थे और वहां से चले गए.

महाभारत में भी परशुराम जी के बारे में बताया गया है.करन ने परशुराम जी से धनुष विद्या सीखने के लिए झूठ कहा था कि वह एक सूत पुत्र हैं एक समय की बात है कि परशुराम अपने शिष्य कर्ण की गोद में सिर रखकर सो रहे थे तभी करण को एक कीड़े ने काट लिया वह अपने गुरु परशुराम को नींद में भंग नहीं डाल सकते थे जिस वजह से उन्होंने दर्द सहा और परशुराम को नींद से नहीं जगाया जब परशुराम जी को पता चला की कर्ण ने कितनी पीड़ा सही है तभी वह समझ गए कि ये जरूर ही क्षत्रिय है और क्रोधित होकर परशुराम जी ने कर्ण को श्राप दिया कि इस मेरी विद्या की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ेगी तभी तुम इसको ध्यान भूल जाओगे.

दोस्तों अगर आपको हमारे दवारा लिखी गई Bhagwan parshuram story in hindi पसंद आई हो तो इसे शेयर जरूर करें और हमारा Facebook पेज लाइक करना ना भूलें और हमें कमेंट्स के जरिए बताएं कि आपको हमारे द्वारा लिखा गया आरतीकल Biography of parshuram in hindi कैसा लगा अगर आप चाहें हमारे अगले आर्टिकल को सीधे अपने ईमेल पर पाना तो हमें सब्सक्राइब जरूर करें.

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *