बेलोन मंदिर का इतिहास Belon temple history in hindi

Belon temple history in hindi

Belon temple history – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बेलोन मंदिर के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं । तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़कर बेलोन मंदिर के इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Belon temple history in hindi
Belon temple history in hindi

बेलोन मंदिर के बारे में – बेलोन मंदिर भारत देश का सबसे सुंदर अद्भुत चमत्कारी मंदिर है । इस मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है । इस मंदिर को सर्वमंगला देवी का मंदिर भी कहा जाता है जिस मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है । यह अद्भुत और चमत्कारी सुंदर मंदिर भारत देश के बुलंदशहर में स्थित है । यह मंदिर बुलंदशहर जिले में स्थित बेलोन गांव में स्थित है । यह  मंदिर सर्वमंगला देवी को समर्पित है जो सुख की देवी के रूप में पूजी जाती हैं । इस मंदिर के निर्माण के बारे में कई कथाएं कही जाती हैं ।

एक कथा के अनुसार इस मंदिर के निर्माण के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जब भोलेनाथ अपनी पत्नी अर्धांगिनी माता पार्वती के साथ पृथ्वी के भ्रमण पर निकले हुए थे । जब माता पार्वती भगवान भोलेनाथ के साथ बेलोन  क्षेत्र से गुजर रही थी तब माता पार्वती की नजर एक शीला पर पड़ी और माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ से इस शिला पर बैठने  की इच्छा जाहिर की थी । भगवान भोलेनाथ ने माता पार्वती को इस शिला पर बैठने की अनुमति दे दी थी और माता पार्वती इस शिला पर बैठ गई थी और भगवान भोलेनाथ पास ही मैं स्थित वट वृक्ष के नीचे आसन लगाकर बैठ गए थे ।

जैसे ही माता पार्वती शिला पर बैठी एक बालक वहां पर आया और माता पार्वती के पेर दबाने लगा था । माता पार्वती उस समय आनंद महसूस कर रही थी । माता पार्वती ने उस लड़के के बारे में भगवान भोलेनाथ से पूछा था ।  पार्वती माता ने भगवान भोलेनाथ से उस शिला  पर बैठने पर आनंद प्राप्त करने और बालक के बारे में पूछा तब भोलेनाथ ने राजा दक्ष के यज्ञ प्रसंग का वृतांत सुनाया था । भगवान भोलेनाथ ने प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब आप पिता के अपमानजनक व्यवहार से दुखी हो गई थी तब पूर्व जन्म में तुम देह को लेकर आकाश से गुजर रही थी ।

जब तुम उस देह को लेकर आसमान से गुजर रही थी तब उस देह से कुछ बूंदें इस शिला पर गिर गई थी जिसके बाद यह सिला पवित्र हो गई थी । यह जो बालक है उसी का अंश है । इसके बाद जब भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती उस स्थान से प्रस्थान कर रहे थे  तब भगवान भोलेनाथ ने माता पार्वती को सर्वमंगला देवी के रूप में उस स्थान पर विख्यात होने का आशीर्वाद दिया था ।  जब माता पार्वती उस स्थान को छोड़ रही थी तब माता पार्वती के शरीर से माता पार्वती  की छाया  उस शिला में समा गई थी और वह शिला एक सुंदर अद्भुत चमत्कारी मूर्ति बन गई थी ।

भोलेनाथ ने माता पार्वती के इस स्वरूप को सर्वमंगला देवी कहकर संबोधित किया था और उस बालक को यह आशीर्वाद दिया था कि वह बालक लांगुरिया नाम से जाना जाएगा । भगवान भोलेनाथ ने यह भी कहा था कि जो भी भक्तगण सर्वमंगला देवी के दर्शन करेगा , शुल्क पक्ष की 12 अष्टमी को माता सर्वमंगला देवी के दर्शन करेगा वह अपने जीवन में सुख समृद्धि आनंद प्राप्त करेगा । सर्वमंगला देवी के दर्शन करने का लाभ तभी मिलेगा जब माता सर्वमंगला देवी के दर्शन करने के बाद लांगुरिया मंदिर के दर्शन करेगा ।

बालक लांगुरिया के दर्शन से ही मां सर्वमंगला देवी की यात्रा पूरी होगी जिस स्थान पर भगवान भोलेनाथ ने विश्राम किया था वह स्थान बटेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध है जिस स्थान पर भी दर्शन करने के लिए पर्यटक आते हैं और भगवान भोलेनाथ के दर्शन करके अपने जीवन में सुख समृद्धि और आनंद प्राप्त करते हैं । इस तरह से सर्वमंगला देवी के  मंदिर की दास्तान है । यह मंदिर वाकई में एक सुंदर अद्भुत चमत्कारी मंदिर है । बेलोन मंदिर की सुंदरता को यदि हम देखना चाहते हैं , सुंदरता को महसूस करना चाहते हैं तो हमें बुलंदशहर जिले में स्थित बेलोन मंदिर  के दर्शन करने के लिए अवश्य जाना चाहिए ।

जब हम इस मंदिर की सुंदरता को अपनी आंखों से देख लेंगे तब हमें इस मंदिर की सुंदरता का एहसास महसूस होगा और हम अपने जीवन में आनंद प्राप्त करेंगे । बुलंदशहर में स्थित बेलोन मंदिर के दर्शन के लिए हमें शुल्क पक्ष की 12 अष्टमी को दर्शन करने के लिए अवश्य जाना चाहिए जिससे कि हमें  अभीष्ट फल की प्राप्ति होगी । मंदिर के आसपास गंगा मैया के राजघाट बहुत ही दर्शनीय हैं ।

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