बालिका दिवस पर निबंध Balika diwas essay in hindi

Balika diwas essay in hindi

Balika diwas – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बालिका दिवस पर लिखे निबंध व बालिका दिवस के महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़कर बालिका दिवस के बारे में जानते हैं ।

Balika diwas essay in hindi
Balika diwas essay in hindi

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बालिका दिवस के बारे में – बालिका दिवस पूरे विश्व में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है । बालिका दिवस प्रतिवर्ष 11 अक्टूबर को पूरे विश्व में मनाया जाता है । बालिका दिवस मनाने का एक ही उद्देश्य है की देश की बालिकाओं को विकास के अवसर प्रदान करना । बालिका दिवस पर पूरे विश्व में बालिकाओं के सम्मान में कार्यक्रम किए जाते हैं । सभी बालिकाओं को उनके अधिकारों के बारे में बताया जाता है । बालिका दिवस पर बालिकाओं को सम्मानित किया जाता है ।

बालिकाओं को बालिका दिवस के शुभ अवसर पर पोषण , शिक्षा , कानूनी अधिकार , चिकित्सा देखभाल , सम्मान संरक्षण एवं बाल विवाह से संबंधित जानकारियां दी जाती हैं और बालिका के महत्व के बारे में बताया जाता है । बालिका दिवस भारत देश के साथ साथ पूरे विश्व में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है । जिसका मुख्य उद्देश्य विश्व में बालिकाओं को विकास के रास्ते पर ले जाना है ।

राष्ट्रीय बालिका दिवस के बारे में – भारत देश में राष्ट्रीय बालिका दिवस बड़े धूमधाम से मनाया जाता है ।  बालिका दिवस के शुभ अवसर पर बालिकाओं को सम्मानित करने के लिए कार्यक्रम किए जाते हैं । भारत देश में राष्ट्रीय बालिका दिवस 24 जनवरी को मनाया जाता है । भारत देश में राष्ट्रीय बालिका दिवस 24 जनवरी को इसलिए बनाया जाता है क्योंकि 24 जनवरी के दिन हमारे देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री बनी थी । हमारे देश की पहली महिला इंदिरा गांधी जी ने 24 जनवरी को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी । इसीलिए महिला की शक्ति को पूरी दुनिया में बताने के लिए भारत देश में 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है ।

बालिका दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों को बुलाया जाता है और बालिकाओं का सम्मान किया जाता है । राष्ट्रीय बालिका दिवस पर भारत देश की सरकारों के द्वारा कई कार्यक्रम किए जाते हैं और उन सभी कार्यक्रमों में बालिकाओं को बुलाया जाता है और सभी बालिकाओं को यह बताया जाता है कि उनके क्या-क्या अधिकार हैं ।

बालिकाओं के अधिकार के बारे में – बालिका दिवस के शुभ अवसर पर बालिकाओं को यह बताया जाता है कि हमारे भारत देश में बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए कई नियम कानून बनाए गए हैं । जो व्यक्ति गर्भावस्था में बच्चे का लिंग जानने की कोशिश करता है उसे सजा दी जाती है क्योंकि  कुछ लोग  गलत सोच  के कारण महिला के गर्भ में लड़का है या लड़की यह जानने के लिए अल्ट्रासाउंड जांच कराते हैं  जब  अल्ट्रासाउंड जांच के माध्यम से यह पता कर लेते है की गर्भ में लड़की है तब उस लड़की को गर्भ में ही मरवा देते हैं इसीलिए भारत में अल्ट्रासाउंड जांच के माध्यम से गर्भ में लिंग का पता करना अवैध किया गया है ।

बालिका दिवस के शुभ अवसर पर बालिकाओं को यह बताया जाता है कि लड़की का विवाह कम आयु में नहीं होना चाहिए । प्राचीन समय में छोटी उम्र में ही विवाह कर दिया जाता था । जिस उम्र में बालिका को शिक्षा प्राप्त करनी  होती थी उस उम्र में उसकी शादी करा दी जाती थी । परंतु हमारे देश में बालिका विवाह पर रोक लगा दी गई और बालिकाओं को मुफ्त में शिक्षा भी हमारे भारत देश में दी जा रही है । बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी योजना भारत सरकार के द्वारा प्रारंभ की गई है । जिसका उद्देश्य बच्चियों को उनका अधिकार दिलाना है ।

जिससे कि बालिका भी शिक्षा की ओर अपने कदम बढ़ाए । हमारे भारत देश में पिछड़े वर्ग की जो लड़कियां होती हैं उन लड़कियों को शिक्षा की ओर बढ़ाने के लिए ओपन लर्निंग सिस्टम का भी बंदोबस्त भारत सरकार के द्वारा किया गया है । जिसका उद्देश्य है कि पिछड़े वर्ग की लड़कियां भी पढ़ लिखकर विकास के रास्ते पर चलें । सबसे बड़ी बात यह कि भारत देश में 24 जनवरी को बालिका दिवस मनाने का फैसला किया गया हैं क्योंकि 24 जनवरी के दिन ही हमारे भारत देश की प्रथम महिला इंदिरा गांधी जी ने प्रधानमंत्री बनकर शपथ ली थी ।

यदि बालिकाओं को उचित शिक्षा , पोषण और कानूनी अधिकार दिए जाएं तो बालिका अपने भविष्य को विकास की ओर ले जा सकती हैं । भारत देश की सरकार के द्वारा बालिकाओं के भविष्य के लिए चिकित्सा देखभाल सम्मान और संरक्षण के लिए ही बालिका दिवस मनाने का फैसला किया गया है । भारत देश में राष्ट्रीय बालिका दिवस राष्ट्रीय बालिका विकास मिशन के रूप में शुरू किया गया था । भारत देश में बालिकाओं को न्याय दिलाने के लिए , घरेलू हिंसा अधिनियम 2009 कानून बनाया गया हैं । जिस कानून में महिलाओं को न्याय दिलाने का काम किया  गया हैं ।

बालिकाओं के सम्मान के लिए , उनको न्याय दिलाने के लिए बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 भी भारत सरकार के द्वारा कानून बनाया गया हैं । इसके बाद दहेज निषेध अधिनियम 2006 भारत सरकार के द्वारा कानून बनाया गया है । इन सभी कानून को बनाने का एक ही उद्देश्य था की बालिकाओं पर हो रहे अत्याचार को रोकना । दहेज प्रथा जैसी कुप्रथा को भारत देश में बंद की गई  है । जब भारत देश में बालिकाओं का सर्वे कराया गया तब बालिकाओं का  साक्षरता दर  बहुत ही कम थी । जिसको देखते हुए बालिकाओं के विकास के लिए कई कार्य किए गए थे ।

भारत में महिला साक्षरता दर तकरीबन 53.87 प्रतिशत है । जब सर्वे कराया गया तब यह पता चला कि भारत देश में एक तिहाई युवा लड़किया कुपोषण की शिकार है । जिसके कारण उनके शारीरिक विकास मे बांधा उत्पन्न हो रही है ।

बालिकाओं के सम्मान में प्रारंभ की गई योजनाओं के बारे में – भारत सरकार के द्वारा बालिकाओं को विकास के रास्ते पर ले जाने के लिए भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा कई योजनाएं प्रारंभ की गई है । जिन योजनाओं के माध्यम से बालिकाओं की स्थिति में कई सुधार किए गए हैं और कई कठोर कदम महिला बाल विकास मंत्रालय के द्वारा उठाए गए हैं । जब महिला बाल विकास मंत्रालय ने एक सर्वे कराया तब उस सर्वे में यह पता चला कि बालिका को यदि विकास के रास्ते पर ले जाना है तो बालिकाओं को शिक्षित करना बहुत ही आवश्यक है ।

महिला बाल विकास मंत्रालय के द्वारा आठवीं तक टीकाकरण , स्कूल नामांकन , जन्म पंजीकरण बालिकाओं के रखरखाव एवं बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए बालिका के परिवार को नकद हस्तांतरण करने के लिए एक योजना भी प्रारंभ की गई है जिस योजना का नाम धनलक्ष्मी योजना है । जिस योजना से बालिका के परिवार को काफी लाभ प्राप्त हुआ है । हमारे देश में यदि बालिकाओं का उज्जवल भविष्य बनाना है तो बालिकाओं की शिक्षा को मजबूत करना होगा ।

इसलिए भारत देश में बालिकाओं की शिक्षा के अधिकार अधिनियम को प्रारंभ किया गया है । जिसमें बालिकाओं को मुक्त शिक्षा एवं आवश्यक शिक्षा भारत सरकार के द्वारा उपलब्ध कराई जाती है । भारत देश में 2008 से बालिका दिवस मनाना प्रारंभ किया गया था । जिसके बाद प्रतिवर्ष 24 जनवरी को भारत देश के हर राज्यों के हर जिलों में बालिका दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है । भारत में स्थित सभी स्कूलों में बालिकाओं को बालिका दिवस के शुभ अवसर पर सम्मानित किया जाता है , उनके सम्मान में कई कार्यक्रम किए जाते हैं ।

भारत देश में बालिका दिवस मनाने का सबसे बड़ा कारण – भारत देश में बालिका दिवस मनाने का सबसे बड़ा कारण था वृद्धि दर क्योंकि बालिकाओं की वृद्धि दर में काफी गिरावट देखी गई थी । जब बालिकाओं की वृद्धि दर में बराबर गिरावट देखी गई तब बालिका दिवस मनाने का निर्णय भारत देश में किया गया था । 1991 की जनगणना एवं 2001 की जनगणना में मुस्लिम एवं हिंदू दोनों समुदाय में सर्वे कराने के बाद यह पता चला था कि 0 से 6 साल के बच्चों के लिंग अनुपात में काफी गिरावट हुई है । जिसके बाद महिला बाल विकास मंत्रालय के द्वारा यह निर्णय लिया गया था कि बच्चों के लिंग अनुपात में हो रहे गिरावट को रोकना होगा ।

भारत देश में जब नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रंस राइट्स की टीम ने जब सर्वे किया और उस सर्वे के माध्यम से जो रिपोर्ट तैयार की गई तब उस रिपोर्ट से यह पता चला कि 6 से 14 साल तक की जो लड़कियां होती हैं वह लड़कियां अपना अधिकतर समय अपने घर के छोटे बच्चों को संभालने में निकाल देती हैं । जिसके कारण वह शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाती हैं । यही नहीं बल्कि भारत सरकार के द्वारा भी एक सर्वे बालिकाओं पर करवाया गया था जिस सर्वे के बाद यह पता चला था कि 6 साल से लेकर 10 साल की बालिकाएं जो होती हैं उन सभी बालिकाओं में से 25% बालिकाएं शिक्षा प्राप्त करने की जगह स्कूल छोड़कर घर पर घरेलू कार्य करने लगती हैं ।

भारत सरकार के द्वारा जब सर्वे कराया गया तब दूसरी बात यह भी पता चली कि 10 साल से लेकर 13 साल तक की सभी बालिकाओं में से 50% बालिकाएं स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर हो जाती हैं । कुछ लड़कियां पैसों की तंगी के कारण स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर होती है तो कुछ लड़कियां परिवार के कहने पर स्कूल छोड़ने पर मजबूर होती हैं ।

बालिका दिवस के महत्व के बारे में balika diwas ka mahatva in hindi – बालिका दिवस मनाने का सबसे बड़ा महत्व सभी बालिकाओं को निरंतर सफलता की ओर बढ़ाना है । इसी उद्देश्य भारत देश में बालिका दिवस मनाया जाता है ।बालिका दिवस के शुभ अवसर पर बालिका को उनके अधिकार के बारे में बताया जाता है और बालिका दिवस के शुभ अवसर पर उन सभी सफल महिलाओं के बारे में बताया जाता है जिन महिलाओं ने अपनी मेहनत से सफलता प्राप्त करके सभी महिलाओं को सफल होने का हौसला दिया है ।

बालिका दिवस के शुभ अवसर पर बालिकाओं के पोषण आहार के बारे में बताया जाता है और सभी बालिकाओं को शिक्षा के महत्व को बताया जाता है । बालिका दिवस पर सभी बालिकाओं के माता-पिता को जागरूक किया जाता है कि बालिकाओं को किस तरह से सफलता की ओर बढ़ाया जा सकता है ।बालिका दिवस पर बालिकाओं को माता पिता के साथ साथ और भी कई समुदायों के माध्यम से योगदान देकर निरंतर आगे बढ़ने का संकल्प दिया जाता है ।

बालिका दिवस के माध्यम से कई बालिकाओं ने शिक्षा के महत्व को पहचान कर अपने जीवन को सफल बनाया है । बालिका दिवस के शुभ अवसर पर सभी बालिकाओं को आत्म सुरक्षा के बारे में भी अवगत कराया जाता है । सभी बालिकाओं को पुरस्कार देकर उनकी महत्वता के बारे में अवगत कराया जाता है । बालिकाओं को निरंतर आगे बढ़ाने के  उद्देश्य से भारत देश में 24 जनवरी को बालिका  दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है जिसका मुख्य उद्देश्य  बालिकाओं के महत्व को पूरी दुनिया को बताया जाता है ।

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