एक लड़की की आत्मकथा Autobiography of a girl in hindi

Autobiography of a girl in hindi

Autobiography of a girl – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से एक लड़की की आत्मकथा के बारे में बताने जा रहे हैं । तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस जबरदस्त आर्टिकल को पढ़कर एक लड़की की आत्मकथा के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Autobiography of a girl in hindi
Autobiography of a girl in hindi

मैं एक लड़की बोल रही हूं , जब मेरा जन्म मेरे  माता-पिता के द्वारा हुआ तब मेरे माता पिता ने मेरे जन्म दिवस के शुभ अवसर पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम किए थे क्योंकि मेरे माता पिता मेरे जन्म पर बहुत खुश थे । मैं धीरे-धीरे अपने माता-पिता के घर पर बड़ी होने लगी थी । जब मैं अपने घर के आंगन में खेलती थी तब मुझे बड़ा अच्छा लगता था । मैं यह सोचती थी कि यही मेरा घर है ।यहीं पर मुझे अपना जीवन जीना है लेकिन धीरे-धीरे में बड़ी होती गई तब मुझे बताया गया कि यह बाबुल का घर होता है बेटी तो पराई होती है । बेटी को शादी करके ससुराल जाना होता है । मैं शादी से पहले कई सपने सजा चुकी थी कि मुझे अच्छी पढ़ाई करना है , अपने जीवन को सफल बनाना है ।

पर जैसे ही मेरी उम्र शादी की हुई तब मुझे देखने के लिए आने लगे थे और मेरी शादी एक समृद्ध परिवार में तय हो गई थी । जैसे ही मेरी शादी तय हुई तब मुझे बड़ा अटपटा सा लग रहा था क्योंकि मैंने अपना बचपन जिस आंगन में गुजारा है आज मुझे वह आंगन छोड़ कर जाना होगा । मैं यह सोच रही थी कि मैं जब अपने माता पिता को छोड़कर ससुराल जाऊंगी तब मैं अपना जीवन कैसे जी पाऊंगी । परंतु यह तो लड़की के भाग्य में पहले से ही लिखा होता है कि उसे अपने पति के घर पर ही जाना होता है । पति का ही घर उसका घर होता है । जब मैं अपने माता-पिता के घर से शादी के बाद ससुराल गई तब वहां पर मेरी मुलाकात ऐसे अनजान लोगों से हुई जिनके साथ मुझे रिश्ता कायम करना था ।

जब मैं ससुराल पहुंची तो वहां पर मेरे माता-पिता के जैसे ही मेरे पति के माता-पिता मिले और मैं उनको अपने माता-पिता मानकर उनकी सेवा करने लगी थी । बस यहीं पर एक लड़की का जीवन समाप्त नहीं होता है । समय बीतने के साथ-साथ मेरे बच्चे हुए और मैं अपने ससुराल में खुशी से रहने लगी थी । कभी-कभी मैं यह सोचती हूं कि लड़की पराई क्यों हो जाती है जिस घर में लड़की अपना बचपन बिताती है उसी घर में रहकर पूरा जीवन क्यों व्यतीत नहीं कर सकती है । यह तो समाज के द्वारा बनाए गए नियम हैं जिन नियमों पर हम सभी को चलना पड़ता है ।

जब मेरी शादी हुई तब घर परिवार के साथ साथ मेरी सहेलियां भी मुझसे बिछड़ गई थी क्योंकि मेरी शादी के बाद मेरी सभी सहेलियों की भी शादी हो गई थी । जिसके कारण हम सभी अलग हो गए थे । लड़की को दो परिवार मैं अपना जीवन व्यतीत करना पड़ता है । जब मेरी शादी हुई तब मैं यह सोच रही थी कि जो मां-बाप एक लड़की को बचपन से पढ़ा लिखा कर भरण-पोषण करते इतना बड़ा करते हैं वह उस लड़की को शादी के बाद कैसे पराई कर देते हैं । पर यह तो दस्तूर है , जब मेरी बेटी का जन्म हुआ तब उसका भी मैंने खूब ख्याल रखा हैं ।

जब वह बच्ची बड़ी हुई तब उसका विवाह तय कर दिया गया था और जब उसकी शादी तय हुई तब एक अजीब सी हलचल दिल में चल रही थी क्योंकि जिस लड़की से मैं बहुत प्रेम करती हू , जब मैं उस लड़की को कुछ देर तक नहीं देखती थी तो मुझे बड़ा बुरा लगता था पर शादी के बाद वह लड़की घर छोड़ कर चली जाएगी और अपने पिया के घर को रोशन करेगी । बेटियां माता पिता की आंखों की तारा होती है । बेटियों से ही घर सुंदर बनता है । जब बेटियां घर के आंगन में खेलती हैं तो घर का आंगन खुशियों से भर जाता है । बेटी का जीवन माता पिता के घर से लेकर ससुराल तक होता है । बेटी के द्वारा कई कुर्बानियां दी जाती हैं ।

शादी के बाद बेटी को  अपने माता-पिता के घर का त्याग करना पड़ता है । इसलिए कहते हैं लड़की के बाबुल का घर पराया होता है । लड़की का घर उसका ससुराल होता है । लड़की शादी के बाद अपना पूरा जीवन जीवनसाथी पति के साथ व्यतीत करती है । मैं एक लड़की हूं , मैं सब समझ सकती हूं कि लड़की किस तरह से कुर्बानियों पर कुर्बानियां देती रहती है । मेरा जीवन  घर से लेकर ससुराल तक बीतता है ।

दोस्तों हमारे द्वारा लिखा गया यह जबरदस्त आर्टिकल एक लड़की की आत्मकथा Autobiography of a girl in hindi यदि आपको पसंद आए तो सबसे पहले आप सब्सक्राइब करें इसके बाद अपने दोस्तो एंंव रिश्तेदारों में शेयर करना ना भूले । दोस्तों यदि आपको इस लेख में कुछ गलती नजर आती है तो आप हमें उस गलती के बारे में अवश्य बताएं जिससे कि हम उस गलती को सुधार कर यह आर्टिकल आपके समक्ष पुनः अपडेट कर सकें  धन्यवाद ।

 

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *