हाथी की आत्मकथा Autobiography of elephant in hindi

Autobiography of elephant in hindi

दोस्तों नमस्कार, आज हम आपके लिए लाए हैं हाथी की आत्मकथा पर हमारे द्वारा लिखित यह काल्पनिक आर्टिकल आप इसे जरूर पढ़ें। यह आर्टिकल बच्चों के मनोरंजन एवं अपनी पढ़ाई की तैयारी करने के लिए लिखा गया है चलिए पढ़ते हैं आज के इस हाथी पर लिखे काल्पनिक आर्टिकल को

Autobiography of elephant in hindi
Autobiography of elephant in hindi

मैं एक हाथी हूं, लोगों ने मेरा नाम रखा है हरिया। हर कोई मुझे इसी नाम से पुकारता है, मैं एक विशालकाय जानवर हूं मेरी एक लंबी सी सूड़ है और एक लंबी सी पूछ भी है जिसके जरिए मैं अपने भोजन को पकड़ सकता हूं। मैं कई शहर और ग्रामीण इलाकों में घूम चुका हूं दरअसल मेरे साथ मेरी रखवाली करने वाले महावत होते हैं मैं उनके साथ गांव और शहरों में घूमने जाता हूं। कई लोग मुझे खाने की चीजें खिलाते हैं, मेरी पूजा भी करते हैं लोग मुझे काफी पसंद करते हैं क्योंकि मेरा शरीर विशालकाय होता है।

जब भी बच्चों को पता लगता है कि मैं उनके गांव या शहर में आने वाला हूं तो वह काफी खुश हो जाते हैं। बच्चे अपने परिवार के सदस्यों के साथ अपने-अपने द्वारों या छतों से मुझे देखते हैं वह काफी खुशी होते हैं, बच्चों को देखकर खुशी में झूमने लगता हूं। मैं किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता बस मैं वह करता हूं जो मुझे महावत करने को कहता है। मैं अक्सर अपने अन्य साथियों के साथ रहना पसंद करता हूं। आज से कुछ समय पहले जब मैं अन्य हाथी साथियों के साथ इधर-उधर टहल रहा था तभी कुछ साथियों को सर्कस वाले भी ले गए थे लेकिन मुझे इस महावत ने अपने साथ रख लिया है।

सर्कस में हाथी कई तरह के खेल दिखाते हैं उन्हें इस कार्य में प्रशिक्षण दिया जाता है। सुना है कि हाथी को मनुष्य सर्कस में इतनी अच्छी तरह से प्रशिक्षण देता है कि वह भी मनुष्य के इशारे पर नाचने लगता है। मुझे केला खाना बहुत ही पसंद है। मैं एक शाकाहारी प्राणी हूं मेरी कई तरह की प्रजातियां हैं जो देश विदेश में पाई जाती हैं। मैं बहुत ही अच्छे स्वभाव का जीव हूं लेकिन यदि कोई मुझे बार-बार परेशान करे तो मुझे अच्छा नहीं लगता है मैं थोड़ा गुस्सा हो जाता हूं। मेरे जैसे जानवरों की प्रजाति आज धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है क्योंकि मनुष्य ने अपने क्रियाकलापों की वजह से जंगलों को नुकसान पहुंचाया है।

जंगल मेरा घर है जब जंगल ही धीरे धीरे कताई की वजह से नष्ट होते जा रहे हैं तो मुझे रहने के लिए उचित स्थान नहीं मिल पाता इस वजह से मेरे जैसे कई हाथी लुप्त हो रहे हैं। आज मेरी लगभग 170 साल उम्र है लेकिन आज से डेढ़ सौ साल पहले जब मैं बच्चा था तो देखा करता था कि बहुत सारे हाथी हुआ करते थे लेकिन आजकल मुझे दुख होता है कि मेरे जैसे हाथी बहुत ही कम देखने को मिलते हैं और यदि कहीं पर मिलते हैं तो बहुत कम जगह पर मिलते हैं।

मैंने सुना है कि हम हाथियों को छोटी सी चींटी से काफी खतरा होता है चींटी यदि हमारे नाक या कान में घुस जाए तो वह हमें काफी नुकसान पहुंचा सकती है इस वजह से मैं जब भी कुछ भोजन खाता हूं उन्हें अच्छी तरह से देखता हूं कि उनमें चींटी तो नहीं है उसके बाद ही अपना भोजन करता हूं।

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