अनाथ बच्चे की आत्मकथा Autobiography of an orphan child in hindi

Autobiography of an orphan child in hindi

दोस्तों आज मैं आपके लिए लाया हूं एक अनाथ बच्चे की आत्मकथा पर मेरे द्वारा लिखित एक काल्पनिक आर्टिकल, आप इसे जरूर पढ़ें तो चलिए पढ़ते हैं आज के हमारे इस लेख को

Autobiography of an orphan child in hindi
Autobiography of an orphan child in hindi

मैं एक अनाथ बच्चा हूं। मैं आजकल एक अनाथ आश्रम में रहता हूं, वहां पर देखभाल करने के लिए मेरे जैसे कई सहयोगी हैं। अनाथ आश्रम में मेरे जैसे कई बच्चे भी हैं, जो मेरे साथ रहते हैं। जब भी कोई बाहर के लोग मुझसे मेरे बारे में पूछते हैं तो मैं यही जवाब देता हूं कि मुझे अपने बचपन के बारे में कुछ पता नहीं।

अनाथ आश्रम वाले मेरे पूछने पर यही कहते हैं कि तुम्हें तुम्हारे माता-पिता पास के ही शहर के चौराहे पर एक जगह छोड़ गए थे तभी कुछ सामाजिक संस्था वाले लोगों ने पुलिस को सूचना दी और तुझे अनाथ आश्रम में छोड़ दिया गया तभी से मैं यहीं पर रहता हूं। मैं अनाथ आश्रम के बच्चों के साथ खेलता रहता हूं जब किसी बाहर के बच्चे को देखता हूं तो सोचता हूं कि काश मैं अनाथ ना होता। मेरे भी माता-पिता होते जो मुझे इन बच्चों की तरह अपने साथ घूमने के लिए ले जाते, मेरे साथ खेलते कूदते, मैं भी किसी को मम्मी पापा कहता।

मैं हमेशा सोचता हूं कि बाहर के बच्चे कितने खुश रहते होंगे, वह कहीं पर भी अपने माता-पिता, भाई बहनों के साथ घूमने के लिए जाते होंगे। जब मैं बड़ा हो जाऊंगा तो मैं एक डॉक्टर बनना चाहूंगा क्योंकि मुझे दूसरों की सेवा करना, दूसरों के दुख दूर करना काफी पसंद है। मैं यही चाहूंगा कि दुनिया में मेरे जैसे अनाथ बच्चे ना हो सबको अपने माता-पिता का साथ मिले, खुशियां मिले, भाई-बहन, परिवार के अन्य सदस्य जैसे कि दादा-दादी का साथ मिले तो बहुत ही अच्छा होगा।

हर माता-पिता को भी यही सोचने की जरूरत है कि वह अपने बच्चे को ऐसे ही अकेले ना छोड़ें। अनाथ होना अपने आप में काफी दुख देने वाला है इसलिए मैं तो यही चाहता हूं कि कोई भी मेरी तरह अनाथ ना हो।

दोस्तों मेरे द्वारा लिखा यह आर्टिकल Autobiography of an orphan child in hindi आप अपने दोस्तों में शेयर जरूर करें और हमें सब्सक्राइब भी करें।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *