अरुण गवली की जीवनी arun gawli biography in hindi

arun gawli biography in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से मुंबई के पूर्व डॉन एवं राजनीतिज्ञ अरुण गवली के जीवन परिचय के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ कर इस लेख को पढ़कर अरुण गवली के जीवन परिचय को जानते हैं ।

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image source – https://www.indiatoday.in/movies/bollywood

जन्म स्थान व् परिवार –  अरुण गवली का जन्म 17 जुलाई 1955 को भारत के महाराष्ट्र राज्य के अहमदनगर जिला के कोपर नामक गांव में हुआ था । अरुण गवली का पूरा नाम अरुण गुलाब अहीर  है । अरुण गवली को सभी डैडी के नाम से भी जानते हैं । अरुण गवली के पिताजी का नाम गुलाबराव है । अरुण गवली के पिता गुलाबराव मुंबई के एक सिंपलेक्स मिल में काम किया करते थे क्योंकि जब अरुण गवली के पिता मुंबई  आए थे तब उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी ।

अपने परिवार को खाना खिलाने एवं सुख सुविधाएं प्रदान करने के लिए गुलाबराव सिंपलेक्स मिल में काम किया करते थे । अरुण गवली की माता का नाम लक्ष्मी बाई है । अरुण गवली के भाई का नाम बप्पा गवली था लेकिन इनका देहांत हो चुका है । अरुण गवली के चाचा का नाम हुकुमचंद है जो मध्य प्रदेश के खंडवा के विधायक हैं । अरुण गवली को मोहम्मद शेख लाल मुजावर  नान्हू भाई की बेटी से प्रेम हो गया था और अरुण गवली ने उनसे शादी कर ली थी ।

शादी करने के बाद अरुण गवली ने लड़की का धर्म परिवर्तन किया और उनका नाम आशा गवली  रख दिया गया था । आशा गवली एवं अरुण गवली के दो बच्चे भी हैं जिनके नाम महेश गवली एवं गीता गवली है । अरुण गवली के बेटे महेश गवली का विवाह हो चुका है । महेश गवली की पत्नी का नाम क्रुतिका है । अरुण गवली का एक भतीजा भी है जिसका नाम सचिन अहिर है ।

शिक्षा –  अरुण गवली ने मैट्रिक तक ही पढ़ाई की है । इसके बाद वह  अपने परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वह पढ़ाई छोड़ कर मुंबई के एक मील में काम करने के लिए चला गया था । अरुण  गवली के बारे में ऐसा कहा जाता है की जब वह पांचवी क्लास में पढ़ाई कर रहे थे तब वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण घर-घर दूध देने के लिए जाया करते थे । अरुण गवली ने मैट्रिक पास करने के बाद कभी भी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया था ।

अरुण गवली का शुरुआती जीवन –  अरुण गवली का शुरुआती जीवन गरीबी के हालात में गुजरा था । अपनी परिवार के गरीबी हालात को देखते हुए अरुण गवली ने मुंबई कि 1 मील में काम करने का फैसला किया था । जिस मील में अरुण गवली काम किया करता था उस मिल का नाम टैक्सटाइल मिल्स था जो कि मुंबई में स्थित थी ।कुछ समय बीतने के बाद मुंबई की टैक्सटाइल मिल्स में हड़ताल हो गई थी जिसके चलते मिल मालिक ने टैक्सटाइल मिल्स को बंद कर दिया था ।

जब टैक्सटाइल मिल्स को बंद किया गया था तब अरुण गवली के साथ-साथ कई और लोग बेरोजगार हो गए थे । यह सभी काम की तलाश में इधर उधर भटकने लगे थे । अरुण गवली ने उन सभी को अपने साथ रखा और पैसा कमाने का शॉर्टकट ढूंढने लगे थे । अरुण गवली ने टेक्सटाइल मिल्स के बंद हो जाने के बाद मुंबई के अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से कांटेक्ट करने का भी प्रयास किया था ।

अरुण गवली जल्द से जल्द पैसा कमाने की सोच बना चुका था ।अरुण गवली यह जान चुका था कि यदि जल्दी पैसे कमाना है तो गलत काम करना ही पड़ेगा । इसलिए अरुण गवली  गलत लोगों से रिश्ते कायम करने लगा था और अरुण गवली एक गैंगस्टर बन चुका था । अरुण गवली एक ऐसा गैंगस्टर  था जिसने दाऊद इब्राहिम की कंपनी को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया था और अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था ।

दाऊद इब्राहिम की गैंग के कई लोग दुबई भाग गए थे जिसके बाद अरुण गवली की कंपनी का विस्तार हो गया था क्योंकि अरुण गवली की गैंग के खिलाफ कोई भी खड़ा होने की हिम्मत नहीं कर पाता था ।

अरुण गवली कि गैंगस्टर बनने की कहानी –  अरुण गवली पहले से ही अपने परिवार के आर्थिक हालातों से दुखी था । वह अब सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाने के रास्ते खोज रहा था और अरुण गवली  पैसा कमाने के लिए कोई भी रास्ता अपनाने के लिए तैयार था । अरुण गवली की मुलाकात रामा नाईक एवं बाबू रेशीम से हुई जो एक बहुत बड़े क्रिमिनल गैंग के लीडर थे । अरुण गवली और उनके भाई किशोर जिनको सभी पप्पा के नाम से जानते थे दोनों भाई रामा नाईक और बाबू रेशीम की  गैंग बायकुल्ला कंपनी में शामिल हो गए थे ।

यहीं से अरुण गवली ने अपनी क्रिमिनल जिंदगी प्रारंभ की थी । समय बीतता गया और इनकी गैंग और भी मजबूत होती गई । रामा नाईक एवं बाबू रेशीम  की कंपनी मुंबई के अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की मदद किया करती थी । जिससे इनकी  गैंग को कई तरह का फायदा हुआ करता था । कई बार बायकुल्ला कंपनी ने दाऊद इब्राहिम को बचाने में मदद की थी । धीरे-धीरे समय बीतता गया और 1984 को रामा नाईक ने दाऊद इब्राहिम की मदद की थी क्योंकि दाऊद इब्राहिम का सबसे प्रतिद्वंदी व्यक्ति पठान गैंग का लीडर समाद खान था ।

दाऊद इब्राहिम की  पूरी मदद  रामा नायक ने की और दाऊद इब्राहिम ने  समाद खान को  मात दे दी थी । 1988 को पुलिस के द्वारा एक एनकाउंटर किया गया और उस एनकाउंटर में रामा नाईक मारा गया था । इस एनकाउंटर के बारे मेंं अरुण  गली का  यह मानना था कि यह एनकाउंटर दाऊद इब्राहिम ने ही करवाया  था । रामा नाईक के मरने के बाद दाऊद इब्राहिम की कंपनी डी  कंपनी एवं  अरुण  गवली की गैंग के बीच में बहुत जोर से लड़ाई छिड़ गई थी ।

1988 से लेकर 1990 तक दाऊद इब्राहिम की कंपनी डी कंपनी गैंग एवं अरुण गवली की  गैंग के बीच गैंगवार हुआ । दाऊद इब्राहिम की कंपनी डी कंपनी के कई गैंगस्टर को अरुण गवली की गैंगस्टर कंपनी से डर कर दुबई भागना पड़ा था । डी कंपनी के कई गैंगस्टर जिनके नाम शरद शेट्टी , छोटा शकील , छोटा राजन , सुनील सावंत को भी मुंबई छोड़कर दुबई भागना पड़ा था । इसके बाद अरुण गवली ने पूरे  गैंग की भागदौड़ अपने हाथों में ली थी ।

अरुण गवली अपने पूरे क्रिमिनल काम अपने ही घर दगड़ी चोल  से किया करता था । अरुण  गवली  के द्वारा दगड़ी चोल से ही सभी गलत काम किए जाते थे । ऐसा कोई सा भी क्रिमिनल धंधा नहीं था जो  अरुण गवली के द्वारा नहीं किया जाता था । हर गलत काम अरुण गवली के द्वारा किए जाते थे । यदि किसी की भी हत्या की सुपारी अरुण गवली के पास आती थी तब वह उसे मार दिया करता था । किसी भी धनी व्यक्ति को लूटना और उसकी हत्या कर देना अरुण गवली के बाए हाथ का काम था क्योंकि उसकी गैंग बहुत बड़ी हो चुकी थी ।

उसकी गैंग में किसी भी तरह कि कोई भी घबराहट नहीं थी । अरुण गवली कभी भी अपनी गैंग के खिलाफ कुछ भी गलत नहीं सुन सकता था । यदि कोई भी व्यक्ति उसकी गैंग के खिलाफ खड़ा होता था वह उसे बंदूक से मार दिया करता था । कई बार पुलिस ने अरुण गवली को हिरासत में लिया  था । परंतु हर बार उसके  खिलाफ पुख्ता सबूत पुलिस को नहीं मिल पाते थे और अदालत में अरुण गवली को छोड़ दिया जाता था । इस तरह से एक टेक्सटाइल मिल से निकलकर एक व्यक्ति गैंगस्टर बन गया और उसने कई मासूम लोगों की जान ले ली थी ।

अरुण गवली की गैंग के लीडर –  अरुण गवली जब फैक्ट्री में काम किया करता था तब उसके कई मित्र बन चुके थे ।जब अचानक से हड़ताल के कारण टैक्सटाइल मिल्स को बंद कर दिया गया था तब अरुण गवली के साथ-साथ उसके कई और साथी भी बेरोजगार हो गए थे । उन सभी के नाम इस प्रकार से हैं राम भाई नायक , गुरु साटम उर्फ मामा , बाबू भाई रेशीम , अशोक चौधरी उर्फ छोटा बाबू , अनि भाई परब  आदि । अरुण गवली ने एक गैंगस्टर बनने के लिए और पैसा कमाने के लिए दाऊद इब्राहिम एवं छोटा राजन के साथ संबंध बनाए थे ।

अरुण गवली ने 1986 के समय सुपारी किंग करीम लाला के भतीजे खूंखार समद खान को बंदूक से मार दिया था । अरुण गवली  की गैंग के जितने भी लीडर थे वह बेखौफ होकर काम किया करते थे । ना तो उनको पुलिस का भय था और ना ही अपनी मौत का । वह जो भी गलत काम करते थे उस काम को करने में उनके हाथ तक नहीं  कांपते  थे  । अरुण गवली की गैंग के कई लीडर पुलिस एनकाउंटर में मारे गए थे ।

अरुण गवली का राजनीतिक कैरियर – अरुण गवली एक ऐसा व्यक्ति है जो पूर्व का गैंगस्टर होने के साथ-साथ एक राजनीतिज्ञ के रूप में भी जाना जाता है । अरुण गवली जब एक गैंगस्टर था तब शिवसेना पार्टी से जुड़ा था और अरुण गवली को बचाने में शिवसेना पार्टी मदद किया करती थी । एक बार जब शिवसेना पार्टी के अध्यक्ष एक भाषण दे रहे थे तब उन्होंने उस भाषण में कहा था कि यदि पाकिस्तान के पास दाऊद इब्राहिम है तो भारत के पास अरुण गवली है ।

अरुण गवली के अच्छे रिश्ते शिवसेना पार्टी के साथ थे लेकिन अचानक ही अरुण गवली के रिश्ते शिवसेना से खराब होने लगे थे ।  शिवसेना के साथ रिश्ते बिगड़ने के बाद अरुण गवली के गैंग के कई लड़कों ने शिवसेना के कार्यकर्ताओं को मार दिया था । अरुण गवली के साथ बिगड़े इस रिश्ते को कई बार सुधारने की कोशिश की गई थी । परंतु अरुण गवली के साथ शिवसेना के रिश्ते कभी नहीं सुधर सकते थे ।

अंत में शिवसेना के अध्यक्ष ने अरुण गवली से दूरी बनाए रखने का फैसला किया क्योंकि उनकी पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को मार दिया गया था ।अरुण गवली ने शिवसेना से नाता तोड़ लिया था । अरुण गवली ने कई राजनेताओं एवं अपने गैंग के लीडरों के साथ मिलकर खुद की एक राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला किया था । अरुण गवली ने कई राजनेता एवं अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर अपनी खुद की पार्टी बनाई और उस पार्टी का नाम अखिल भारतीय सेना रखा था ।

अरुण गवली  अपनी ही पार्टी को निरंतर आगे बढ़ाता रहा क्योंकि अरुण गवली यह जानता था कि यदि वह राजनीति से दूर रहेगा तो पुलिस उसका कभी भी इनकाउंटर कर सकती है । इसीलिए अरुण गवली ने एक राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला किया था । अरुण गवली को राजनीति में सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उन्हीं की पार्टी के एक विधायक एवं उनके भतीजे ने उनका विद्रोह कर दिया था । उनके पार्टी के विधायक कांग्रेस पार्टी में चले गए थे ।

जब विधानसभा के चुनाव हुए  तब अरुण गवली की पार्टी  की ओर से अरुण गवली ने चुनाव में  खड़ा होने का फैसला किया था । उस समय के विधानसभा चुनाव में अरुण गवली के खिलाफ  में  शिव सेना पार्टी की ओर से  एक कार्यकर्ता को खड़ा किया गया था ।  इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की ओर से  अरुण गवली के पूर्व विधायक एवं भतीजे ने चुनाव लड़ा था । इस विधानसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था । जब  चुनाव के बाद  नतीजे की घोषणा की गई  तब  अरुण गवली  एवं  उनके भतीजे  को हार का सामना  करना पड़ा था । इस विधानसभा  के चुनाव में शिवसेना के एक विधायक ने भारी मतों से जीत हासिल की थी ।

अरुण गवली के अपराधिक मामले –  अरुण गवली को कई बार अपराधिक मामलों में एक अपराधी के रूप में जेल जाना पड़ा था । अरुण गवली  को अपने अपराधिक मामलों के कारण तकरीबन 10 साल से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा था । अरुण गवली के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जब अरुण गवली जेल में बंद था तब वह जेल से ही अपने सभी अपराधिक धंधे चलाया करता था । वह बहुत ही निर्दई व्यक्ति था । अरुण गवली जेल में रहकर अपहरण , जबरन वसूली , किसी की भी हत्या कर देना जैसे अपराधिक कार्य को बड़ी कुशलता पूर्वक चला रहा था ।

कई  केस अरुण गवली पर चलाए जा रहे थे । कई बार अरुण गवली को सबूत ना मिलने के कारण छोड़ दिया गया था । कई केस अरुण गवली के विरुद्ध प्रारंभ हुए परंतु सबूत न मिलने के कारण  अरुण गवली को अदालत से रिहा कर दिया गया था । 1990 में अरुण गवली को जेल से रिहा कर दिया गया था । परंतु बाद में अरुण गवली पर एक आतंकवादी एवं विघटनकारी गतिविधि अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया गया था और उसको सजा सुनाई गई थी ।

जब अरुण गवली को सजा सुनाई गई तब उसे मुंबई के केंद्रीय जेल में रखा गया था । इसके बाद 1997 को अरुण गवली को जेल से रिहा कर दिया गया था । अरुण गवली की गैंग के गैंगस्टर को कई बार पुलिस एनकाउंटर में मार दिया गया था लेकिन वह अपनी गैंग में नए लीडरों को शामिल कर लेता था और अपनी गैंग को चलाता था । अरुण गवली की गैंग बहुत ही निर्दई हो चुकी थी । किसी की भी हत्या करने से उनको डर नहीं लगता था ।

वह खुलेआम गुंडागर्दी करने लगे थे ।कई बार अरुण गवली को कोर्ट ने रिहा कर दिया था । परंतु जब अरुण गवली ने शिवसेना के लीडर कमलाकर जमसंदेकर  की हत्या कर दी थी तब पुलिस ने पूरी तरह से उस केस की जांच की थी । शिवसेना पार्टी का पूरा प्रेशर पुलिस के ऊपर था जिससे कि पुलिस को  छानबीन जल्द से जल्द करना पड़ी थी । पूरी छानबीन के बाद अरुण गवली के खिलाफ सबूत इकट्ठे हुए और अरुण गवली को कोर्ट में पेश किया गया था । अरुण गवली को अगस्त 2012 को मुंबई की विशेष अदालत ने सजा सुनाई थी  और अरुण गवली को जेल में डाल दिया गया था ।

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