अरेराज मंदिर का इतिहास Areraj temple history in hindi

Areraj temple history in hindi

Areraj temple – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से अरेराज मंदिर के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं । तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़कर अरेराज मंदिर के इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Areraj temple history in hindi
Areraj temple history in hindi

अरेराज मंदिर के बारे में – भारत देश के बिहार राज्य का सबसे सुंदर अद्भुत चमत्कारी मंदिर अरेराज मंदिर है जिसकी सुंदरता देखने के लायक है । जब कोई भक्तगण बिहार में स्थित अरेराज मंदिर के दर्शन करने के लिए जाता है तब वह अपने जीवन में आनंद प्राप्त करता है ।भारत देश के बिहार राज्य में स्थित अरेराज मंदिर की सुंदरता की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है । बिहार राज्य में स्थित अरेराज मंदिर को सोमेश्वर नाथ महादेव मंदिर भी कहा जाता है ।

बिहार राज्य में अरेराज मंदिर उत्तर बिहार के मोतिहारी से 28 किलोमीटर दक्षिण में गंडक नदी के किनारे स्थित है जिस मंदिर में पंचमुखी शिवलिंग स्थित है । यह मंदिर गंडक नदी के किनारे होने के कारण और भी सुंदर और अद्भुत दिखाई देता है ।जिसकी सुंदरता का आनंद लेने के लिए दूर-दूर से पर्यटक वहां पर जाते हैं और अरेराज मंदिर के दर्शन करके अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं । बिहार राज्य में स्थित अरेराज मंदिर के निर्माण के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर के निर्माण की नींव चंद्रमा के द्वारा रखी गई थी जिसके बारे मे स्कंद पुराण में बताया गया है ।

स्कंद पुराण के अनुसार यह कहा गया है कि अहिल्या प्रकरण में चंद्रमा को जब श्राफ दिया गया तब चंद्रमा अपने श्राफ से मुक्त होने के लिए अगस्त मुनि के पास गए हुए थे और अगस्त मुनि ने श्राफ से  मुक्ति दिलाने के लिए चंद्रमा से कहा था कि वह गंडक नदी के समीप में भोलेनाथ के मंदिर की स्थापना कर उसकी पूजा करें जिससे तुम श्राफ मुक्त हो जाओगे । इसके बाद चंद्रमा ने अरण्यराज में शिवलिंग की स्थापना की और उस शिवलिंग की पूजा की थी जिसके बाद चंद्रमा को अहिल्या प्रकरण में मिले श्राफ से मुक्ति प्राप्त हुई थी । यह बिहार राज्य का सबसे प्राचीन सुंदर अद्भुत मंदिर है ।

इस मंदिर के बारे में कथाओं , पुराणों में यह भी बताया जाता है कि जब राम भगवान माता सीता से विवाह करके जनकपुर से अयोध्या आ रहे थे तब भगवान राम जी ने इस मंदिर पर आकर भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना की थी । इसके साथ-साथ इस मंदिर के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि जब द्वापर युग में युधिस्टर की सारी संपत्ति नष्ट हो गई थी तब युधिस्टर अपने भाइयों और पत्नी द्रोपदी के साथ इस मंदिर पर आया था और अपने भाइयों पत्नी  के साथ मिलकर इस मंदिर में स्थित पंचमुखी महादेव के शिवलिंग की पूजा अर्चना की थी ।

इस मंदिर का नाम अरेराज मंदिर सोमेश्वर नाथ मंदिर इसलिए रखा गया है क्योंकि इस मंदिर के निर्माण में चंद्रमा की अहम भूमिका थी और चंद्रमा का पर्यायवाची शब्द सोम होता है । इसलिए इस मंदिर को सभी सोमेश्वर नाथ मंदिर के नाम से भी जानते हैं । प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में पर्यटक इस मंदिर पर जाते हैं और पंचमुखी शिव के दर्शन करके अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं । भारत में बिहार राज्य के अरेराज मंदिर में ही एक ऐसी शिवलिंग स्थित है जो पंचमुखी शिवलिंग है जिस पंचमुखी शिवलिंग से  भक्तों की आस्था जुड़ी हुई है ।

इस मंदिर का नाम सोमेश्वर नाथ मनोकामना मंदिर इसलिए रखा गया है क्योंकि जो भी भक्तगण अरेराज सोमेश्वर नाथ मंदिर के दर्शनों के लिए आता है उसकी सभी मनोकामनाएं भोलेनाथ पूरी करते हैं और वह अपने जीवन में खुशी सुख समृद्धि प्राप्त करता है  । बिहार राज्य के अरेराज मंदिर में स्थित पंचमुखी शिवलिंग के बारे में भारतीय पुराणों में भी बताया गया है । भारतीय पुराणों में अरेराज मंदिर में स्थित पंचमुखी शिवलिंग के बारे में यह बताया गया है कि यह सबसे पुरानी अद्भुत चमत्कारी शिवलिंग है जिस  शिवलिंग की पूजा राम भगवान और युधिष्ठिर के द्वारा की गई थी ।

जब युधिष्ठिर के द्वारा शिवलिंग की पूजा की गई तब युधिष्ठिर को खोया हुआ राजपाट वापस मिला था इसीलिए सभी अपनी मनोकामनाएं लेकर इस मंदिर के दर्शनों के लिए जाते हैं । सोमवार को अरेराज मंदिर में शिव भक्तों का तांता लगा रहता है । प्रति सोमवार को यहां पर मेला भी लगता है । जो भक्त सोमवार के दिन अरेराज सोमेश्वर नाथ मंदिर के दर्शनों के लिए जाता है उसे बड़ा आनंद प्राप्त होता है । उस दिन पंचमुखी शिवलिंग को सजाया जाता है ।

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