अप्पिको आंदोलन इन हिंदी appiko movement in hindi

appiko movement in hindi

आज हम आपके लिए लाए हैं अप्पिको आंदोलन को । इस लेख के माध्यम से इस आंदोलन के बारे में जान सकते हो । जब आप इस आंदोलन के बारे में जानोगे तब आपको पता चलेगा कि हमारे लिए यह आंदोलन कितना आवश्यक था । यह आंदोलन उत्तर भारत से प्रारंभ किया गया था । इस आंदोलन का नाम चिपको आंदोलन रखा गया था । जब यह देखा गया कि हमारे आस पास के जंगल समाप्त होते जा रहे हैं ,जंगलों में जो पेड़ थे उनको काटा जा रहा है तब आसपास के लोगों ने मिलकर एक आंदोलन चलाया जिसको नाम दिया चिपको आंदोलन ।

इस आंदोलन में आसपास के सभी लोग पेड़ों से चिपक गए थे और कई लोगो के द्वारा जो पेड़ काटे जा रहे थे उनको रोकने के लिए सभी पेड़ों से चिपक गए थे । यह आंदोलन पर्यावरण को बचाने के लिए किया गया था । यह आंदोलन पेड़ों को बचाने के लिए किया गया था । इस आंदोलन में कई सारे युवाओं ने भाग लिया था और इस आंदोलन को 38 दिनों तक जारी रखा था । इस आंदोलन के बाद सरकार ने यह फैसला लिया कि अब जंगल के पेड़ों को नहीं काटा जाएगा और एक कानून बनाया की जंगल के पेड़ों को काटने पर सजा दी जाएगी ।

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image source – http://www.sahisamay.com/

यह देखकर दक्षिण भारत के लोगों ने भी इस तरह का आंदोलन करने का विचार बनाया था और इस आंदोलन का नाम रखा अप्पिको आंदोलन । अप्पिको का शब्द कन्नड़ भाषा से है । जब दक्षिण के लोगों ने गड़वाल हिमालय के रहने वाले लोगों का चिपको आंदोलन को देखा तब उन्होंने भी इस तरह का आंदोलन करने का फैसला किया और सभी लोग इस आंदोलन में भाग लेने के लिए उपस्थित हुए । यह आंदोलन पूरे दक्षिण भारत के लोगों ने एक साथ मिलकर किया था । इस आंदोलन में सभी पेड़ों से चिपक गए थे और लोगों से यह प्रार्थना कर रहे थे कि यह पेड़ हमे जीवन देते हैं । इन पेड़ों को हमें नहीं काटना चाहिए । वन विभाग के आदेश पर जो पेड़ काटे जा रहे थे उनको रोकने के लिए सभी ने विरोध जताया था । यह आंदोलन धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा था। जब यह आंदोलन आगे बढ़ा तब 300 से अधिक लोग इस आंदोलन में शामिल हो गए थे । इस आंदोलन के बाद ही जंगलों के पेड़ों को काटने से रोका गया था । इस आंदोलन के बाद सभी लोग जागरूक हुए थे और लोगों ने खाली जगह पर पेड़ पौधे लगाने का निश्चय किया था ।

इस आंदोलन से वन विभाग भी घबरा गया था और वन विभाग के अधिकारियों ने यह आदेश दिया था कि अब जंगलों के पेड़ नहीं काटे जाएंगे । वनों की सुरक्षा के लिए सरकार भी आगे आई है और वनों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा बलों को भी लगाया गया था । इस आंदोलन से कई सारे लोगों को फायदा हुआ है । दक्षिण भारत में जो लोग रहते थे वह अपना जीवन यापन वहां पर लगे हुए बांस के पेड़ों से करते थे । जब उन्हें लगा कि वन विभाग के आदेश पर यहां के सारे पेड़ काटे जा रहे हैं तब उन्होंने विचार किया कि अब हमें इन पेड़ों को काटने से रोकना होगा और सभी एकत्रित होकर पेड़ों से चिपक गए थे । उन्होंने कहा कि यदि आपने पेड़ काटना बंद नहीं किया तो हम हमारी जान दे देंगे । आपको पेड़ काटने से पहले यह कुल्हाड़ी हमारे शरीर पर चलानी होगी । जो मजदूर पेड़ काट रहे थे वह भी उनके साथ मिल गए थे । यह आंदोलन पर्यावरण को बचाने के लिए किया गया था और यह आंदोलन सफल आंदोलन भी रहा था ।

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