अलाई दरवाजा का इतिहास alai darwaza history in hindi

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दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं अलाई दरवाजा का इतिहास । चलिए अब हम पढ़ेंगे अलाई दरवाजा के इतिहास को । यदि आपको अलाई दरवाजा का इतिहास पसंद आए तो हमारे द्वारा लिखे इस आर्टिकल को अन्य लोगों तक शेयर करें ।

अलाई दरवाजा दिल्ली का सबसे सुंदर दरवाजा है । इस दरवाजे को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं । देश विदेश के लोग इस दरवाजे की सुंदरता देखने के लिए आते हैं । अलाई दरवाजा संगमरमर एवं लाल पत्थर से बनाया गया था । अलाई दरवाजा का निर्माण 1311 में हुआ था । अलाई दरवाजे को इस्लामिक वस्तु कला का रत्न माना जाता है ।

अलाई दरवाजा का निर्माण कराने की योजना अलाउद्दीन खिलजी की थी । उन्होंने मस्जिद में प्रवेश के लिए अलाई दरवाजा बनवाने की योजना बनाई थी । उन्हीं के राज में यह दरवाजा 1311 ई. में बनवाया गया था ।

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जिस समय यह दरवाजा बनवाया गया था उस समय अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली के राजा था । उस समय अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली के शासनकाल को संभाल रहे थे । इस प्रवेश द्वार का केंद्रीय कक्ष भी बनाया गया है । केंद्रीय कक्ष की लंबाई 16.75 मीटर रखी गई थी। इसकी दिशा के मध्य में एक प्रवेश द्वार भी बनाया गया था । जिसके दोनों तरफ़ जालीदार खिड़की बनाई गई थी ।

इस्लाम मस्जिद के दक्षिण दिशा की ओर यह सबसे सुंदर प्रवेश द्वार है । यह अलाई दरवाजा कुतुब मीनार परिसर के अंदर स्थित है । इस अलाई दरवाजा को बनाते समय तुर्की कला का उपयोग किया गया था । जब पर्यटक इस दरवाजे को देखते हैं तब उनको तुर्की कला की झलक देखने को मिलती है । यह कहा जाता है कि भारत का एक ऐसा दरवाजा है जिस दरवाजे में इस्लामिक वस्तु कला का उपयोग किया गया है ।

अलाई दरवाजे की अंदर से लंबाई एवं चौड़ाई 35 फीट है । अलाई दरवाजे कि बाहर से लंबाई ,चौड़ाई 55 फिट है । जमीन से छत तक की ऊंचाई 47 फीट है एवं मोटाई 11 फुट की है । इस दरवाजे को बनाने के लिए संगमरमर और लाल पत्थर का उपयोग किया गया है ।

यह दिल्ली का सबसे सुंदर दिखने वाला अलाई दरवाजा है । इस दरवाजे को देखने के लिए देश ,विदेश के लोग घूमने के लिए आते हैं । यह दरवाजा कुतुब मीनार परिसर के अंदर स्थित है । जो लोग दिल्ली घूमने के लिए आते हैं वह लोग इस दरवाजे को देखने के लिए अवश्य जाते हैं । जब पर्यटक इस दरवाजे को देखते हैं तब वह अपने कैमरे में इस दरवाजे की सुंदरता को उतार लेते हैं ।

इस दरवाजे को देखने के लिए हमें सबसे पहले दिल्ली पहुंचना होता है । दिल्ली से हम सिटी बस के द्वारा या ऑटो रिक्शा से हमें कुतुब मीनार परिसर में जाना पड़ता है । हम मेट्रो ट्रेन के माध्यम से भी कुतुब मीनार परिसर में पहुंच सकते । जब हम कुतुब मीनार परिसर में पहुंच जाते हैं तब हमें यह अलाई दरवाजा देखने को मिलता है । जो लोग इस्लामिक दरगाह के दर्शन के लिए जाते हैं वह इस दरवाजे से होकर ही अंदर जाते हैं ।

जब दरवाजे को बनाने की योजना अलाउद्दीन खिलजी ने बनाई थी तब 3 दरवाजे भी बनाने की योजना बनाई थी लेकिन अलाउद्दीन खिलजी सिर्फ अलाई दरवाजा ही बनवा पाए थे । इस दरवाजे के निर्माण के बाद अलाउद्दीन खिलजी की मौत हो गई थी । हमारे भारत का कुतुब मीनार सबसे प्रसिद्ध मीनार माना जाता है । यहां की सुंदरता को देखने के लिए देश ,विदेश के लोग आते हैं ।

जब पर्यटक कुतुब मीनार को देखने के लिए आते हैं तब वह अलाई दरवाजा देखने के लिए अवश्य जाते हैं । दिल्ली का सबसे सुंदर दरवाजा अलाई दरवाजा माना जाता है । इस दरवाजे पर तुर्की कलाकृति दिखती है ।

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