अधर्म ही मनुष्य के पतन का कारण है पर निबंध Essay on adharm hi manushye ke patan ka karan hai in hindi

essay on adharm hi manushye ke patan ka karan hai in hindi

दोस्तों कैसे हैं आप सभी, आज हम आपके लिए लाए हैं अधर्म ही मनुष्य के पतन का कारण है तो चलिए पढ़ते हैं आज के हमारे इस निबंध को, विद्यार्थी इस तरह के लेख पढ़कर अपनी परीक्षाओं की अच्छी तैयारी कर सकते हैं।

हम सभी मनुष्य पृथ्वी पर अपना जीवन यापन कर रहे हैं सभी मनुष्य सिर्फ दो ही रास्तों पर चलते हैं यहां या तो लोग धर्म के रास्ते पर चलतेे है या फिर वह अधर्म के रास्ते पर चलते है। जो व्यक्ति धर्म में बताए हुए रास्तों पर चलता है वह जीवन में अपने कार्यों में सफलता प्राप्त करता है, धर्म के बताए हुए रास्ते सत्य, ईमानदारी, प्रेमभाव, दूसरों की मदद करना, बड़ों का आदर करना, दूसरों की चीज पर बुरी नजर ना रखना यह सब है।

हमें इन सभी का पालन करना चाहिए लेकिन आजकल के युग में कई सारे ऐसे लोग भी हैं जो अधर्म के मार्ग पर चलते हैं उनका पतन अवश्य होता है। अधर्म असत्य, बेईमानी, दूसरों की चीज पर बुरी नजर रखना, चोरी करना आदि है, जो व्यक्ति इस तरह के कार्य करता है यानी अधर्म के मार्ग पर चलता है उसका पतन जरूर ही होता है। हमारे सभी धर्मों के धर्म ग्रंथों में ज्यादातर यही बातें बताई गई हैं।

कई ऐसे हमें उदाहरण देखने को भी मिलते हैं जिसके जरिए यह सिद्ध होता है कि जो अधर्म के रास्ते पर चलता है उसकी हार निश्चित है। भगवान श्री रामचंद्र जी जब वन में 14 वर्ष बिता रहे थे तभी लंकापति रावण ने अधर्म के मार्ग पर चलकर देवी सीता का हरण किया था उसके बाद श्री रामचंद्र जी अपने भाई लक्ष्मण जी के साथ  युद्ध के लिए लंका की ओर गए थे और फिर युद्ध हुआ था। लंकापति रावण शक्तिमान था उसने कैलाश पर्वत को भी अपनी भुजाओं पर उठाया था लेकिन उसने जो भी किया था वह अधर्म था इसीलिए उसका पतन हुआ।

लंकापति रावण के भाई विभीषण ने बहुत समझाया कि आप अधर्म के मार्ग पर ना चले, धर्म के मार्ग पर चलें लेकिन रावण ने अपने घमंड में चूर होकर किसी की भी नहीं सुनी और आखिर में रावण का पतन हुआ। रावण का पतन सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि उसने अधर्मीयो जैसे कार्य किए थे।

अधर्म ही मनुष्य का पतन है इसका एक उदाहरण हमें महाभारत में भी देखने को मिलता है। महाभारत में दुर्योधन ने अधर्म के मार्ग पर चलकर पांडवों के साथ गलत किया था जिस वजह से महाभारत युद्ध शुरू हुआ था। अर्जुन युद्ध में अपने परिवार वालों और भाइयों के खिलाफ नहीं लड़ना चाहते थे लेकिन श्री कृष्ण ने अपने धर्म के मार्ग पर चलने को कहा तभी श्री कृष्ण जी के कहने पर अर्जुन ने अपने धर्म का पालन किया लेकिन दुर्योधन ने केवल अधर्म का सहारा लिया और आखिर में अधर्म के मार्ग पर चलने की वजह से दुर्योधन का पतन हुआ।

श्री कृष्ण के बचपन में भी मामा कंस ने अधर्म के मार्ग पर चलकर श्री कृष्ण के माता-पिता पर कई तरह का अत्याचार किया था एवं प्रजा पर भी कई तरह का अत्याचार किया था इसी अधर्म के मार्ग पर चलने की वजह से मामा कंस का पतन हुआ था। इतिहास में हम कभी भी झांक कर देखें तो हमें यह पता चलता है कि जो भी अधर्म के रास्ते पर चलता है उसका पतन जरूर होता है इसलिए हमें धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए और जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।

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