अढ़ाई दिन का झोपड़ा का इतिहास Adhai din ka jhonpra history in hindi

Adhai din ka jhonpra history in hindi

Adhai din ka jhonpra – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से अढा़ई दिन के झोपड़ा के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं । तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़कर अढ़ाई दिन के झ़ोपड़े के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Adhai din ka jhonpra history in hindi
Adhai din ka jhonpra history in hindi

अढ़ाई दिन के झोपडे़ के बारे मे – भारत देश के राजस्थान राज्य के अजमेर नगर में स्थित है अढ़ाई दिन का झोपड़ा एक सुंदर , अद्भुत चमत्कारी है । प्राचीन समय में यह अढ़ाई दिन का झोपड़ा एक संस्कृत विद्यालय था परंतु जब भारत पर मुुगल शासकों का शासन प्रारंभ हुआ तब इस संस्कृत विद्यालय को  मुगल शासन के दौरान मोहम्मद गोरी ने तकरीर 1198 में संस्कृत विद्यालय को मस्जिद में बदल दिया था । जिसके बाद वहां पर नमाज अदा की जाने लगी थी । यह अढ़ाई दिन का झोपड़ा जो एक दीवार से चारों तरफ से घिरी हुई है वह दीवार बहुत ही मजबूत है ।

इसमें जो 7  मेहराबेें है उन 7 मेहराबो पर कुरान की आयतें लिखी गई हैं । जब मुगल साम्राज्य के मोहम्मद गोरी ने अढ़ाई दिन का झोपड़ा को मस्जिद में बदल दिया था तब हैरत के अबू बकर को इस अढ़ाई दिन के झोपड़े की मरम्मत और डिजाइन करने का काम सौंपा गया था ।जिसके बाद उनके द्वारा इस मस्जिद की डिजाइन तैयार की गई थी जिसे बनाने में तकरीबन अढ़ाई दिन लगे थे ।इसीलिए इसे अढ़ाई दिन का झोपड़ा कहा जाता है । इसके बाद सन 1230 ईस्वी में मुगल साम्राज्य के सुल्तान अल्तमस के द्वारा एक मेहराब के नीचे जाली लगा दी गई थी ।

इसके उत्तर दिशा की ओर एक सुंदर और बड़ा दरवाजा है वह दरवाजा मस्जिद का प्रवेश द्वार बनाया गया था । अढ़ाई दिन का जो झोपड़ा हैै उसके सामने बालेे भाग को पीले बलुआ पत्थर से  बनाए गए अत्यंत सुंदर मेहराबो से सजाया गया है जिसकी सुंदरता बहुत सुंदर दिखाई देती है । इसके मुख्य मेहराबो के किनारे पर कई छोटी-छोटी मेहराबे हैं । अढ़ाई दिन का जो झोपड़ा है उस झोपड़ेे मे मेहराबों के साथ-साथ कई छोटे-छोटे आयताकार फलक भी हैं जो वाकई में बहुत अधिक सुंदर दिखाई देते है और प्रकाश तंत्र बनाते हैं ।

जब हम अढ़ाई दिन के झोपड़े के अंदर प्रवेश करते हैं तब इस भवन के अंदर की ओर एक  कमरा दिखाई देता है जिस कमरे की सुंदरता देखने के लायक है । राजस्थान राज्य के अजमेर नगर का यह अढ़ाई दिन का झोपड़ा एक सुंदर झोपड़ा के रूप में अपनी पहचान बना चुका है । आज जहां पर मस्जिद है जिसे अड़ाई दिन का झोपड़ा कहा जाता है वहां पर एक संस्कृत विद्यालय हुआ करता था जिस संस्कृत विद्यालय को मुगल साम्राज्य के दौरान , मुगल शासन के दौरान संस्कृत विद्यालय को मस्जिद में बदल दिया गया था ।

जब इस संस्कृत विद्यालय को मस्जिद में बदला गया था तब इस संस्कृत विद्यालय को मस्जिद का आकार , संरचना तैयार की गई थी । जब यह संरचना तैयार की गई तब इस स्थान को पूरी तरह से मस्जिद में बदल दिया गया था । संस्कृत विद्यालय की जो दीवारें थी उन दीवारों पर कुरान की आयतें लिख दी गई थी । जब मस्जिद का कार्य पूरा कर लिया गया था तब यहां पर मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करने लगे थे । दोस्तों अब मैं आपको बता देना चाहता हूं कि जिस स्थान पर आज मस्जिद बनी हुई है उस स्थान पर संस्कृत विद्यालय बनाने का श्रेय विग्रहराज चौहान को जाता है जिन्होंने इस स्थान पर संस्कृत विद्यालय और कई मंदिर बनवाए थे जिन मंदिरों में विष्णु मंदिर सबसे सुंदर मंदिर है ।

जो भी पर्यटक आज के समय में अढ़ाई दिन का झोपड़ा देखने के लिए जाता है वह इस अढ़ाई दिन के झोपड़े की सुंदरता को देखकर अपने जीवन में आनंद ही आनंद प्राप्त करता है । यदि आप अढ़ाई दिन के झोपड़े की सुंदरता को अपनी आंखों से देखना चाहते हो तो आपको राजस्थान के अजमेर नगर में जाकर अढ़ाई दिन के झोपड़े की सुंदरता देखना होगा । जब आप अपनी आंखों से अढ़ाई दिन के झोपड़े की सुंदरता को देखोगे तब आपको पता चलेगा कि वाकई में अढ़ाई दिन के झोपड़े की सुंदरता कितनी सुंदर और अद्भुत है । जो भी व्यक्ति अढ़ाई दिन के झोपड़े की सुंदरता को देखने के लिए जाता है वह बार-बार अढ़ाई दिन के झोपड़े की सुंदरता को देखने के लिए अवश्य जाता है ।

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