अभिमन्यु चक्रव्यूह कथा abhimanyu chakravyuh story in hindi

abhimanyu chakravyuh story in hindi

दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं वीर अभिमन्यु के जीवन की कथा, आप इसे जरूर पढ़ें। अभिमन्यु अर्जुन का पुत्र था, वह बुद्धिशाली एवं पराक्रमी था। बचपन में अभिमन्यु जब अपनी माता की कोख में था तभी उन्होंने चक्रव्यूह के अंदर जाने का तरीका अपने पिता से सीख लिया था दरअसल एक रात अर्जुन अपनी पत्नी को चक्रव्यूह के अंदर जाने का तरीका बता रहे थे, अर्जुन की पत्नी के गर्भ में अभिमन्यु ने सब कुछ सुना लेकिन इतना बताने के बाद ही अभिमन्यु की मां की नींद लग गई जिस वजह से अर्जुन से अभिमन्यु ने चक्रव्यूह से बाहर आने का तरीका नहीं सुन पाया था।

abhimanyu chakravyuh story in hindi
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जब महाभारत का युद्ध हुआ था तब कौरवों ने चक्रव्यूह की रचना की। चक्रव्यूह के जरिए कौरव पांडवों को काफी नुकसान पहुंचा रहे थे, इस चक्रव्यूह को तोड़ना बेहद जरूरी था लेकिन चक्रव्यूूूह के अंदर जाने का तरीका अर्जुन श्री कृष्ण और अभिमन्यु को ही पता था। श्री कृष्ण और अर्जुन युद्ध में कहीं दूर थे वह एक और युद्ध को संभाल रहे थे अब केवल अभिमन्यु ही था जो जल्द से जल्द इस चक्रव्यू के अंदर जाकर पांडवों की सेना एवं बड़े बड़े योद्धा की रक्षा कर सकें।

भीम एवं कई योद्धाओं ने अभिमन्यु को चक्रव्यू में ना जाने को कहा लेकिन यह कहकर अभिमन्यु अंदर चला गया कि यदि मैंने इस चक्रव्यूह को नहीं तोड़ा तो हमारे बड़े बड़े योद्धा धराशाई हो जाएंगे इसीलिए मेरा जाना जरूरी है वरना मैं अपने पिताश्री को मुंह नहीं दिखा पाऊंगा तभी यह निर्णय लिया गया कि चक्रव्यूह में जैसे ही अभिमन्यु अंदर प्रवेश करेगा पीछे से भीम एवं अन्य महारथी उस चक्रव्यूह में प्रवेश करेंगे

लेकिन चक्रव्यू में केवल अभिमन्यु वी प्रवेश कर सका। चक्रव्यू के अंदर भीम जैसे योद्धा भी प्रवेश नहीं कर पाए और चक्रव्यू के अंदर अभिमन्यु अकेला पड़ गया अकेले होने के बावजूद भी कौरवों की सेना का सामना किया तभी दुर्योधन का पुत्र अभिमन्यु के सामने आया और दोनों का युद्ध हुआ, अभिमन्यु ने दुर्योधन के पुत्र का युद्ध में बध कर दिया।

जब यह खबर दुर्योधन को पता लगी तो वह बहुत ही क्रोधित हुआ और उसने युद्ध के नियम तोड़ दिए और अभिमन्यु को अपने और योद्धाओं के साथ मिलकर घेर लिया। अभिमन्यु की तलवार टूट चुकी थी धनुष भी उसके पास नहीं था। अभिमन्यु ने अपने रथ का पहिया उठाकर योद्धाओं का खाकी मुकाबला किया लेकिन कुछ समय बाद ही अभिमन्यु का यह पैया भी चूर चूर हो गया। सभी योद्धाओं ने उस निहत्थे अभिमन्यु को घेरकर मार डाला और युद्ध के नियम तोड़ डाले।

जब यह खबर अर्जुन को मिली तो वह काफी क्रोधित हुआ अब युद्ध में अभिमन्यु को मारने वाले महारथियों को मारना उसका मकसद बन चुका था। वास्तव में इस वीर अभिमन्यु ने अकेले ही कौरवों का डटकर सामना किया था और बड़े बड़े योद्धा उसके सामने जाने से कांप रहे थे वास्तव में अभिमन्यु महावीर था।

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