संगठन की शक्ति पर कविता samgathan ki shakti poem in hindi

संगठन की शक्ति पर कविता

दोस्तों आज की हमारी कविता संगठन में शक्ति पर कविता आप सभी के लिए बहुत ही प्रेरणादायक कविता है ये कविता जरूर ही आपको पसंद आएगी. मेरी इस स्वरचित कविता आपको संगठन की शक्ति बताएगी की कैसे हम इस संगठन की शक्ति के जरिए कुछ भी बड़ा काम कर सकते हैं तो चलिए पढते हैं मेरी स्वरचित कविता को

संगठन की शक्ति पर कविता
संगठन की शक्ति पर कविता

संगठन में शक्ति ही शक्ति होती है

कमजोर जीवो के संगठन में भी शक्ति होती है

राक्षस शेर चीते सब डरते हैं इससे

यह शक्ति तो सबसे बढ़कर होती है

संगठन में सबसे बढ़कर शक्ति होती है

 

जिसने इस शक्ति को पहचान लिया है

वह कभी भी किसी से नही डरा है

पशु पक्षी जीव जंतु इस शक्ति से अवगत हैं

विपरीत परिस्थिति में वह सब सबके संग है

 

जिसने भी इस शक्ति को ना समझा है

वह हमेशा से ही जिंदगी में पीछे रहा है

जिसको घमंड सिर्फ अपने आप पर हुआ है

संगठन को छोड़कर जो अकेला रहा है

वह जरूर ही मुसीबत में फसता रहा है

 

तीन लकड़ियों से सीखिए उनको ना तोड़ पाया है

एक अकेली लकड़ी को सब तोड़ पाते हैं

संगठन में तो शक्ति ही शक्ति होती है

कुत्तों के संगठन में भी शक्ति होती है

शेर को भी भगा भगा कर मजा चखाते हैं

 

संगठन के रूप ने ही देश का रूप बदल दिया

हम स्वतंत्र हैं संगठन की शक्ति का नतीजा

इसकी शक्ति का बखान ना कोई कर पाया है

संगठन में तो शक्ति ही शक्ति होती है

 

बड़ी से बड़ी शक्ति को भी यूं ही झुका दिया

संगठन की शक्ति ने उसे सबक सिखा दिया

कोई भी कार्य इस शक्ति से संभव हो पाया

इस शक्ति के आगे ना कोई चला पाया

संगठन में तो शक्ति ही शक्ति होती है

इससे बढ़कर ना कोई शक्ति होती है.

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