यौगिक श्वसन पर निबंध Yogic swasan par nibandh

Yogic swasan par nibandh

दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से यौगिक श्वसन पर लिखे निबंध के बारे में बताने जा रहे हैं ।तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस बेहतरीन आर्टिकल को पढ़कर यौगिक श्वसन पर लिखे निबंध के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Yogic swasan par nibandh
Yogic swasan par nibandh

यौगिक श्वसन के बारे में –  किसी व्यक्ति के द्वारा श्वास लेने एवं श्वास छोड़ने की जो क्रिया होती है वह श्ववासन क्रिया कहलाती है । सांस लेकर ही मनुष्य जीवित रहता है । सांस लेने की जो प्रक्रिया है वह प्रक्रिया उम्र के हिसाब से रहती है । जब बच्चा जन्म लेता है  और उसकी उम्र 2 महीने से  2 साल की होती है तब उस बच्चे के अंदर सांस लेने की प्रतिक्रिया 35 प्रति मिनट तक होती है । जब वह बच्चा 6 साल का हो जाता है तब 6 साल से लेकर 12 साल तक वह बच्चा 23 बार प्रति मिनट के हिसाब से सांस लेता है । जब बच्चा 12 वर्ष का हो जाता है तब वह 12 वर्ष से लेकर 15 वर्ष तक 18 बार प्रति मिनट के हिसाब से सांस लेता है ।

जब बच्चा 15 साल का हो जाता है तब 15 साल से लेकर 21 साल तक वह 16 से 18 बार प्रति मिनट के हिसाब से सांस लेता है । यदि मनुष्य के शरीर में सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया गड़बड़ाती है तो उसे कई तरह की बीमारियों जकड़ लेती हैं । शरीर की श्वास क्रियाओं को निरंतर चलाने के लिए प्राणायाम करने की आवश्यकता होती है । यदि व्यक्ति प्रतिदिन 10 मिनट रेगुलर प्राणायाम करें तो स्वास्थ्य संबंधी कोई भी समस्या उस व्यक्ति को नहीं आ सकती है ।

प्रतिदिन व्यक्ति को अपने शरीर की श्वास प्रक्रिया को निरंतर चलाने के लिए ताड़ासन , वीरासन , त्रिकोणासन , वज्रासन , सूर्य नमस्कार , गोमुखासन , पवनमुक्तासन आदि व्यायाम करके श्वसन क्रिया को सुचारु रुप से स्वस्थ और तंदुरुस्त रख सकता है । दोस्तों जो यौगिक क्रियाएं होती हैं उन सभी यौगिक क्रियाओं के अंदर सुलभ  तथा सहज अत्यंत प्रभावी होती है । श्वास की क्रिया के द्वारा ही शरीर की सभी क्रियाएं सुचारू रूप से चलती हैं । अब हम आपको श्वास गति के बारे में बताने जा रहे हैं । जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति पर क्रोध करता है तब उस व्यक्ति की श्वास गति तेज हो जाती है ।

इसके साथ-साथ जब कोई व्यक्ति मेहनत का कार्य करता है या व्यायाम करता है तब भी उस व्यक्ति की श्वास गति तेज हो जाती है । श्वास गति को धीमा करने के लिए मनुष्य को आराम करना चाहिए । जब किसी व्यक्ति को क्षय रोग , निमोनिया , दमा , पीलिया , मलेरिया , गुर्दों के रोग जैसी समस्या हो जाती है तब उसके शरीर में श्वास गति तेज हो जाती है । शरीर की श्वास गति को निरंतर और सुचारू रूप से चालू रखने के लिए व्यायाम करना बहुत ही जरूरी होता है । हमें व्यायाम करने से पहले व्यायाम के बारे में पूरी जानकारी अवश्य लेना चाहिए ।

यदि हमें श्वास की समस्या है तो हमें यह पता करना चाहिए कि श्वास की समस्या से छुटकारा पाने के लिए कौन सा प्राणायाम करने की आवश्यकता होती है । जब हम व्यायाम करना सीखते हैं तब हमें यह पता चल जाता है कि हमारी श्वसन क्रिया हमारे शरीर के अंदर किस तरह से कार्य करती है । जब हम उदर प्राणायाम करते हैं तब हम गहरी श्वास लेते हैं और श्वास पेट के अंदर तक ले जाते हैं । जब हम गहरी श्वास पेट के अंदर ले जाते हैं तब फैफड़ों  में अधिक मात्रा में वायु चली जाती है जिससे हमारी श्वास लेने की क्रिया ठीक हो जाती है ।

शरीर के अंदर एक चपटी मांसपेशी होती है उस मांसपेशी को हम डायफ्राम कहते हैं । मेरे कहने का यह तात्पर्य है कि यदि मनुष्य को लंबे समय तक जीवित रहना है , एक स्वस्थ जीवन जीना है तो उसे अपनी श्वास क्रिया को स्वस्थ रखना होगा क्योंकि श्वसन क्रिया का मनुष्य जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है । मनुष्य को अपना जीवन लंबे समय तक जीने के लिए श्ववसन क्रिया की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है । मनुष्य की श्वसन क्रिया की जो गति होती है उसी गति से मनुष्य की आयु निर्धारित होती है ।श्वसन क्रिया का हमारे शरीर के अंदर एक केंद्र होता है जो फेफड़ों में होता है ।

फेफड़ों में श्वसन क्रिया के माध्यम से एक बार में तकरीबन 3 से 4 लीटर वायु हमारे फैफड़ों मे जाती है ।

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