बूँद बूँद से घट भरता है की कहानी boond boond se ghada bharta hai kahani

हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी,काफी समय पहले की बात है गौतम बुद्ध नगर में रुके हुए थे वो सभी नगर वासियों को अपने उपदेश देकर उनका मार्गदर्शन करते थे.एक समय की बात है कि उस नगर में अकाल पड गया जिस वजह से अकालपीडित लोगो को दो वक्त का भोजन भी नहीं मिल पा रहा था.गौतम बुद्ध को अकाल पीड़ित लोगों पर काफी दया आती थी.

बूँद बूँद से घट भरता है की कहानी
बूँद बूँद से घट भरता है की कहानी

एक दिन वह धनी वर्ग के लोगों से मिलने गए और उन्होंने धनी वर्ग के लोगों से अकाल पीड़ित लोगों की मदद करने को कहा लेकिन धनी वर्ग के लोग इसके प्रति किसी तरह की अपनी सहमति नहीं दे रहे थे तभी उस सभा में एक बालिका भी बैठी हुई थी उसने खड़े होकर गौतम बुद्ध से कहा कि महात्मा कोई अकाल पीड़ित लोगों की मदद करें या ना करें लेकिन मैं हर तरह से अकाल पीड़ित लोगों की मदद करने के लिए तैयार हु. गौतम बुद्ध ने उस नन्ही सी बालिका से कहा कि तुम्हारे पास तो कुछ भी नहीं है तुम कैसे इन अकाल पीड़ित लोगों की मदद करोगी तभी वह नन्ही बच्ची बोली कि महात्मा भगवान ने मुझे दो हाथ दिए हैं मैं नगर में हर एक घर में जाकर भीख मांगूगी और अन्य एकत्रित करूंगी.में अन्न एकत्रित करके अकाल पीड़ित लोगों का भरण पोषण करूंगी क्योंकि कहते हैं कि बूंद-बूंद से ही घड़ा भरता हैं.

वह आगे बोली कि मैं अकाल पीड़ित लोगों को भूखे नहीं मरने दूंगी बच्ची की इस तरह की बातों को सुनकर धनी वर्ग के लोग भी अचंभित रह गए आखिर में उन्होंने सोचा कि जब नन्ही सी बच्ची अकाल पीड़ित लोगों की मदद करने के लिए तैयार है तो हमको भी इन लोगों की मदद करने के लिए आगे आना चाहिए और सभी ने गौतम बुद्ध की बात रखी और अकाल पीड़ित लोगों की मदद की.

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