गुट निरपेक्ष आंदोलन में भारत की भूमिका Gut nirpeksh andolan me bharat ki bhumika

गुट निरपेक्ष आंदोलन में भारत की भूमिका

गुट निरपेक्ष आंदोलन में कई देश एकजुट होकर, एक साथ काम करते हैं और गुटनिरपेक्ष आंदोलन मैं कई देश शामिल होते हैं कहने का तात्पर्य यह है कि गुट निरपेक्ष आंदोलन का गठन विश्व के कई देशों ने मिलकर किया है । गुट निरपेक्ष आंदोलन में ऐसे कई देश भाग लेते है जो अपने पड़ोसी देशों से आपसी विवाद को नहीं सुलझा पाते वह गुटनिरपेक्ष आंदोलन के मंच पर अपना विवाद सुलझा सकते हैं .इस मंच पर सभी अपनी अपनी बात रखते हैं और कमेटी इसका फैसला करती हैं कि कौन सही है और कौन गलत।

इस झगड़े को खत्म करने के लिए कमेटी बीच का रास्ता निकालती हैं जिससे कि दोनों देश आपस में ना लड़ें । इस मंच के माध्यम से उन देशों की मदद की जाती है जिन देशो की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और वह देश जो आज के दौर में निवेश और उपनिवेश की समस्याओं से जूझ रहे हैं इस मंच के माध्यम से उनकी मदद कि जाती है । जब गुटनिरपेक्ष आंदोलन का गठन किया गया तब कुछ देश आजाद हो चुके थे और कुछ देश आजाद होने वाले थे, जब इस गुट निरपेक्ष आंदोलन का गठन किया गया तो हमारे भारत के पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू जी भी उस गठन में शामिल थे ।

गुट निरपेक्ष आंदोलन में भारत की भूमिका
गुट निरपेक्ष आंदोलन में भारत की भूमिका

हमारे देश के प्रधानमंत्री जी की सोच थी की हमारे देश का विकास और सुरक्षा मे किसी भी तरह की ढील ना दी जाए और हमारे देश का विकास दिन प्रतिदिन बढ़ता जाए .लेकिन गुटनिरपेक्ष आंदोलन के सदस्य सहायता नहीं कर रहे थे इसलिए हमारे देश के प्रधानमंत्री सम्मेलन में शामिल नहीं हुए , गुटनिरपेक्ष आंदोलन की समिति ने कभी भी भारत की मदद नहीं की।

गुट निरपेक्ष आंदोलन का गठन करने का एक ही उद्देश्य था कि जो देश निवेश उपनिवेश नहीं कर पा रहे है उन देशों को आगे बढ़ाना । नक्सलियों और साम्राज्यवाद के विरोध में इस आंदोलन का गठन किया गया था, हमारे भारत का जब 1962 में चीन के साथ युद्ध हुआ तो इस मंच ने हमारी सहायता नहीं की और 2002 में मुंबई हमले में भी इस मंच के द्वारा हमको सहायता नहीं मिली लेकिन जब यह मंच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होता है तो सभी देशों के एक ही विचार होते है । किसी भी देश में नक्सलवाद को बढ़ावा ना दिया जाए और सभी देश एक दूसरे के साथ आपसी संबंध सुधार सकें इसलिए गुटनिरपेक्ष को बनाया गया.

आज गुटनिरपेक्ष आंदोलन के मंच के द्वारा भारत को फायदा हो सकता है जैसे कि पाकिस्तान के साथ भारत का जो विवाद है वह वहां पर रखा जा सकता है और पाकिस्तान जिस तरह से आतंकवादियों को पनाह दे कर नक्सलवादियों को बढ़ावा दे रहा है, तो भारत इस मंच पर पाकिस्तान की करतूत को सब देशों के सामने ला सकता है जिससे कि जो देश पाकिस्तान की मदद कर रहे हैं वह उनकी मदद ना करें क्योंकि पाकिस्तान नक्सलवादी को पालने में मदद करता है जिसके कारण नक्सलवाद बढ़ रहा है जिससे कई देशों को नुकसान हो सकता है ।

हमारा भारत संयुक्त राष्ट्र संघ की सदस्यता लेना चाहता है और इसके लिए गुटनिरपेक्ष आंदोलन समिति का साथ जरूरी है । जब यह गुटनिरपेक्ष आंदोलन समिति के जो देश हैं सभी भारत का सपोर्ट करेंगे तब भारत संयुक्त राष्ट्र संघ समिति में शामिल होगा । गुट निरपेक्ष आंदोलन समिति में संयुक्त राष्ट्र संघ देशों में जो देश शामिल होते हैं वह देश उचाईयों की बुलंदियों पर पहुंचते हैं क्योंकि उस मंच पर जितने भी देश होते हैं वह सभी देश एक दूसरे की मदद करते हैं ।

जो देश पिछड़ रहे हैं जिस देश में शिक्षा की , स्वास्थ्य की समस्याएं हैं उन देशों की मदद की जाती है जिससे कि पिछड़े हुए देश भी विकास की ओर बढ़ सकें और अगर कोई नक्सलवादियों को बढ़ावा दे रहा है तो उसके विरुद्ध भी संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच पर आवाज उठा सकता है जहां पर सभी देश आपस में मिलकर उसके विरुद्ध कार्यवाही करते है जिससे कि नक्सलवादियों को खत्म किया जा सके।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन के मंच पर और संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच पर ऐसे कई विवाद रखे जाते हैं जिससे दो देशों के बीच का जो तनाव है उसको खत्म किया जा सके क्योंकि जब दो देश आपस में लड़ते हैं तो दोनों का नुकसान होता है वह देश कई साल पीछे पहुंच जाते हैं और वहां की जनता भी परेशान होती है इसलिए यह मंच बनाए गए हैं जिससे की लड़ाई की आवश्यकता ना पड़े और वह अपने विवादों को इस मंच पर सुलझा सके ।

हमे बताये की ये पोस्ट गुट निरपेक्ष आंदोलन में भारत की भूमिका आपको कैसी लगी.

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *