सेल्युकस निकेटर का इतिहास Seleucus nicator history in hindi

Seleucus nicator history in hindi

Seleucus nicator – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से सेल्यूकस निकेटर के इतिहास  के बारे में बताने जा रहे हैं । तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस जबरदस्त आर्टिकल को पढ़कर  सेल्यूकस निकेटर के इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Seleucus nicator history in hindi
Seleucus nicator history in hindi

सेलियूकस निकेटर के बारे में –  सेल्यूकस निकेटर एक ऐसा सेनापति था जिस ने सेनापति के पद पर रहकर कई वीरता वाले कार्य किए थे । सेल्यूकस निकेटर एलेग्जेंडर यानी सिकंदर का सबसे योग्य , भरोसेमंद सेनापतियों में से एक था । जो हमेशा सिकंदर के साथ रहकर लड़ाई लड़ता था । सिकंदर की मेहनत और लगन को देखकर सेलियूकस निकेटर उनके आदर्शों पर चलता था । जब सिकंदर का देहांत हो गया था तब सेल्यूकस निकेटर को सिकंदर का उत्तराधिकारी बनाया गया था । भारत के विभिन्न क्षेत्रों पर वह अपना  आधिपत्य स्थापित करना चाहता था ।

भारत देश में सिकंदर के द्वारा जो  राज्य जीता गया था वह सेल्यूकस निकेटर उन राज्यों पर अपना आधिपत्य पुनः स्थापित करने के उद्देश्य भारत में युद्ध करने के उद्देश्य से आया था और 305 ईसवी पूर्व के समय में सेल्यूकस निकेटर ने भारत पर पुनः हमला कर दिया था । जब सेल्यूकस निकेटर के द्वारा भारत पर हमला किया गया तब सम्राट चंद्रगुप्त ने पश्चिमोत्तर भारत के यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर को हराकर सेल्यूकस निकेटर और उसकी सेना को खदेड़ दिया था । जिसके बाद चंद्रगुप्त सम्राट चंद्रगुप्त के द्वारा अराकोसिया , जेड्रोसिया , पेरोपेनिसडाई  के भूभाग को अधिकृत कर विशाल मौर्य साम्राज्य की स्थापना की गई थी ।

जब सेल्यूकस निकेटर की इतनी बुरी तरह से हार हुई तब सेल्यूकस निकेटर ने अपनी पुत्री यानी हेलन का विवाह चंद्रगुप्त से करने का फैसला कर दिया था । सेल्यूकस निकेटर बचपन से ही एक सेनापति बनना चाहता था । सेल्यूकस निकेटर का जन्म 358 ईसा पूर्व में हुआ था । सेल्यूकस निकेटर के पिताजी का नाम एंटी ओकस था  और सेल्यूकस निकेटर की माता जी का नाम लेओडायस था । सेलियूकस निकेटर के द्वारा 312 ईसा पूर्व से 281 ईसवी तक शासन किया गया था । सेलियूकस निकेटर का सबसे बड़ा और भयंकर खतरनाक युद्ध चंद्रगुप्त से हुआ था जिस युद्ध की दास्तां इतिहास में दर्ज है ।

जब हम इतिहास में सेल्यूकस निकेटर और चंद्रगुप्त के युद्ध के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं तब हमें पता चलता है कि सेल्यूकस निकेटर ने भारत पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के उद्देश्य हमला किया था और उस हमले में सेल्यूकस निकेटर ने काफी तैयारी की थी । यह कहा जाता है कि सेल्यूकस निकेटर ने चंद्रगुप्त से युद्ध करने के लिए दो लाख पैदल सैनिकों को तैयार किया था । सेल्यूकस निकेटर ने चढ़ाई करने के उद्देश्य से 40000 घुड़सवार  सेना भी तैयार की थी ।

सेल्यूकस निकेटर के मित्र राज्यों के द्वारा सेल्यूकस निकेटर की सहायता के लिए 60000 सैनिकों की फोज सेल्यूकस निकेटर को दी गई थी । इस तरह से सेल्यूकस निकेटर ने भारत पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिए चंद्रगुप्त से युद्ध करने के लिए तीन लाख भारी फौज को तैयार करके भारत पर चढ़ाई की थी । पूरी योजना के साथ सेल्यूकस निकेटर ने चंद्रगुप्त पर चढ़ाई की थी । जब सेल्यूकस निकेटर भारत पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के उद्देश्य से चंद्रगुप्त को युद्ध में हराने के उद्देश्य से अपनी सेना के साथ भारत की सीमा में प्रवेश कर गया था तब वह  अपने आप को ताकतवर समझ रहा था ।

सेलियूकस निकेटर सिंधु नदी पार करके जब भारत से मुकाबला करने के उद्देश्य से आया तब सिंधु नदी के पार सेल्यूकस निकेटर की सेना को चंद्रगुप्त की महान शक्तिशाली सेना से सामना हुआ था । चंद्रगुप्त मौर्य की सेना ने सेल्यूकस निकेटर की सेना को परास्त कर दिया था । 3 से 4 घंटे के बाद सेल्यूकस निकेटर को इस युद्ध में यह महसूस होने लगा था कि यदि इस युद्ध को बंद नहीं किया गया तो सभी  सैनिक मारे जाएंगे और सेल्यूकस निकेटर को भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ जाएगा । यह सोचकर सेल्यूकस निकेटर में इस युद्ध को बंद कर दिया था ।

युद्ध के बाद सेल्यूकस निकेटर ने संधि करने का फैसला किया था । आचार्य चाणक्य जोकि चंद्रगुप्त मौर्य के गुरु और प्रधानमंत्री के रूप में उपस्थित थे उन्होंने सेल्यूकस के साथ संधि करने के लिए शर्तें रखी थी । जिन शब्दों को सेल्यूकस निकेटर ने स्वीकार कर लिया था । इसके बाद सेल्यूकस निकेटर ने संधि करने के बाद हार मान ली और वह अपना जीवन जीने लगा था । सेल्यूकस निकेटर का देहांत 281  इसवी पूर्व के समय हो गया था । जिस समय  सेल्यूकस निकेटर  का देहांत हुआ उस समय उनकी उम्र 77 साल की थी ।

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