पेंसिल की आत्मकथा इन हिंदी Pencil ki atmakatha in hindi

Pencil ki atmakatha in hindi

दोस्तों नमस्कार, आज हम आपके लिए लाए हैं पैन्सिल की आत्मकथा पर लिखित एक काल्पनिक आरतिकल आप इसे जरूर पढ़ें तो चलिए पढ़ते हैं आज की पेंसिल की आत्मकथा को

Pencil ki atmakatha in hindi
Pencil ki atmakatha in hindi

मैं एक पेंसिल हूं मेरा जन्म 1954 में हुआ था। मैं ग्रेफाइट और लकड़ी के द्वारा बनाई जाती हूं, मैं बच्चों और नौजवानों के लिखने के काम में आती हूं। जब मेरा जन्म हुआ तब जन्म के बाद मुझे एक डिब्बे में रख दिया गया उस डिब्बे में मेरी तरह और भी कई पेंसिले थी। मैं उनके साथ में रहकर बहुत ही अच्छा महसूस कर रही थी फिर ऐसे ही कई सारे डिब्बों के साथ मेरा डिब्बा भी यातायात के साधन के द्वारा मुझे किसी दुकान पर पहुंचाया गया, उस दुकान पर जैसे ही मुझे उतारा गया तो मैंने देखा कि उस दुकान पर तरह-तरह की सामग्री थी मुझे खुशी हुई कि मैं इस सामग्री के साथ में इस दुकान में सजाई जाऊंगी।

मुझे अपनी अन्य पेंसिल साथियों के साथ अच्छी तरह से उस दुकान में सजा दी गई। उस दुकान पर तरह तरह के लोग तरह तरह की चीजें खरीदने के लिए आते तब मैं देखती कि वह कुछ रुपए देकर अपनी जरूरत का सामान खरीद लेते थे। एक दिन एक बच्चा अपनी मां के साथ आया उसे पेंसिल खरीदना था उसने अपनी मां से कहा और उस दुकान में से एक पेंसिल खरीदी गई तभी मैं समझ गई कि इस पेंसिल की तरह एक दिन मुझे भी कोई खरीदेगा इसी सोच के साथ मेरे दिन गुजरते गए।

मुझे उस दुकान में रहना बहुत ही अच्छा लगता था मैं यह सोचकर थोड़ी सी दुखी हुई कि कोई अब मुझे खरीद लेगा लेकिन किसी अन्य जगह पर घूमने का मुझे मौका मिलेगा यह सोचकर मैं थोड़ी सी खुश थी। कुछ महीनों के बाद एक 20 साल का लड़का आया और उसने पेंसिल मांगी तब दुकानदार ने मुझ पेंसिल को निकालकर उसे पेंसिल दे दी उसने अपने एक बैग में उस पेंसिल को रखा और अपने घर की ओर जाने लगा। वह लड़का एक साइकिल से अपने घर की ओर जा रहा था जब वह साइकिल से जा रहा था तो मैं बैग में रखी रखी हिल दुल रही थी, मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं किसी झूले में झूल रही हूं।

कुछ समय बाद मैं उस लड़के के बैग में रखी घर पर पहुंची उसने घर के एक कोने में मुझे रख दिया और शाम को अपने किसी कॉलेज के प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए मेरा उपयोग करने का सोचा उसने सबसे पहले मुझे एक कोने से छीला तो मुझे थोड़ा सा दर्द हुआ लेकिन एक खुशी भी थी कि मैं इस लड़के की कुछ काम तो आऊंगी। अब वह लड़का अपने कॉलेज का कोई प्रोजेक्ट का कार्य मुझ पेंसिल से करने लगा जब भी उससे पेंसिल के द्वारा कुछ गलत लिखा होता तो वह पास में रखी रबड़ से उन लिखे हुए शब्दों को हटाकर फिर से कुछ लिखता। 1 घंटे में उसने अपना प्रोजेक्ट पूरा किया और मुझे एक बॉक्स के अंदर रखकर अपने बैग में सजा लिया।

अब जब सुबह हुई तो वह लड़का तैयार होकर मेरे पास आया और मुझे अपने कंधे पर तांगकर अपने कॉलेज की ओर ले जाने लगा।कॉलेज में पहुंचकर मैंने देखा कि कई सारे छात्र टेबल पर बैठे हुए हैं सबके पास एक नई नई पेंसिल है यह सब देख कर मुझे खुशी हुई कि चलो अब रोज रोज इन पेंसिलो से मिलना भी हो जाएगा यही सोचकर मुझे अच्छा लग रहा था।

काफी दिनों तक वह लड़का मेरा उपयोग कर्ता गया आखिर में मैं बोनी हो गई और मुझे लगने लगा कि जरूर ही अब यह लड़का मुझे फेंक देगा क्योंकि कुछ ही समय बाद में उसके बिल्कुल भी कार्य नहीं कर पाऊंगी आखिर में वह दिन भी आया और उस लड़के ने घर के कोने में  मुझको रख दिया, मैं एक ही जगह पड़ी पड़ी दुखी होती लेकिन मुझे खुशी भी थी कि चलो मैं इस लड़के के कुछ काम तो आई।

दोस्तों मेरे द्वारा लिखित पेंसिल की आत्मकथा एक काल्पनिक आर्टिकल Pencil ki atmakatha in hindi आपको कैसा लगा जरूर बताएं और इसी तरह के बेहतरीन आर्टिकल पाने के लिए हमे सब्सक्राइब भी जरूर करें।

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