भारत पाकिस्तान युद्ध और बांग्लादेश के निर्माण का इतिहास india pakistan war 1971 history in hindi

Bangladesh 1971 war history in hindi

india pakistan war – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और भारत पाकिस्तान युद्ध के बारे में गहराई से जानते हैं ।

india pakistan war 1971 history in hindi
india pakistan war 1971 history in hindi

Image source – https://en.m.wikipedia.org/wiki/Bangladesh_Liberation_War

भारत-पाकिस्तान युद्ध के बारे में – भारत देश को आजादी मिलने के बाद भारत से पाकिस्तान को अलग कर दिया था । इसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच  कई धमा शान युद्ध हुए । उन युद्ध में सबसे भयानक युद्ध 1971 का युद्ध था । जिस युद्ध में पाकिस्तान की हार हुई थी । 1971 में पाकिस्तान ने भारत पर बिना सूचना दिए आक्रमण कर दिया था । जिसके बाद भारतीय सैनिकों ने डटकर पाकिस्तानी सैनिकों का सामना किया और पाकिस्तानी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब दिया था । अंत में पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया था ।

16 दिसंबर को पाकिस्तान के सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया था । आत्मसमर्पण करने के बाद पूर्वी पार्क को आजाद कर दिया गया था और बांग्लादेश का निर्माण हुआ था । जब 1971 के युद्ध में पाकिस्तान सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया तब ढाका में 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सैनिकों के लेफ्टी जनरल और भारतीय लेफ्ट जनरल जगजीत सिंह अरोरा जी वहां पर उपस्थित थे । उन्हीं की उपस्थिति में पाकिस्तान के सैनिकों ने हस्ताक्षर कर आत्मसमर्पण किया था । वहां पर भारतीय नौसेना वाइस एडमिरल नीलकांत कृष्णन भी मौजूद थे ।

भारतीय वायु सेना के एयर मार्शल मिस्टर हरीश चंद्र दीवान भी मौजूद थे । हरिचंद दीवान के साथ-साथ भारतीय थल सेना के लेफ्टिनेंट जनरल भगत सिंह भी वहां पर मौजूद थे । यह युद्ध दुनिया के धमा शान युद्ध में से एक था । जिस समय 1971 में भारत पाकिस्तान का युद्ध हुआ उस समय भारत के राष्ट्रपति के रूप में बीवी गिरी मौजूद थे । भारत के प्रधानमंत्री के रूप में इंदिरा गांधी जी अपना कार्यभार संभाल रही थी । भारत के विदेश मंत्री के पद पर स्वरण सिंह जी अपना कार्यभार संभाल रहे थे । भारत के रक्षा मंत्री के पद पर जगजीवन राम जीत है ।

जिस समय 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध हुआ उस समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति याह्या खान थे एवं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नूरुल आमीन थे । इस युद्ध से पाकिस्तान को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा था । भारत की सरकार के द्वारा पाकिस्तान को समय-समय पर चेतावनी दी गई थी कि यदि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा तो उसको बहुत नुकसान झेलना पड़ेगा । फिर भी पाकिस्तान ने बिना सूचना दिए 1971 में भारत के वायु सेना पर आक्रमण कर दिया था जिसके बाद भारत की जल थल और वायु तीनों सेनाओं ने पाकिस्तान सैनिकों का डटकर सामना किया और 1971 के युद्ध को जीतकर पाकिस्तान को हराया था ।

जब पाकिस्तान के सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया तब इस युद्ध का समापन हुआ और एक नया देश बांग्लादेश की स्थापना हुई थी ।

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में सैन्य संघर्ष के बारे में – 1971 में भारत-पाकिस्तान का घमासान युद्ध हुआ था ।उस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान के सैनिकों को धूल चटा दी थी क्योंकि भारतीय सैनिकों की ताकत बहुत मजबूत थी । जब भारतीय सरकार ने सैनिकों को लड़ाई का आदेश दिया तब भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देकर उनको आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर दिया था । युद्ध की शुरुआत सबसे पहले पाकिस्तान के द्वारा की गई थी ।

पाकिस्तान के सैनिकों के द्वारा भारतीय वायु सेना के 11 स्टेशनों पर हवाई हमले किए गए थे जिससे भारतीय वायु सेना को काफी नुकसान झेलना पड़ा था । जिसके बाद भारत के सैनिकों ने पाकिस्तान के सैनिकों पर हमला कर दिया था ।जब यह युद्ध प्रारंभ हुआ तब भारतीय सैनिकों को पाकिस्तानी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देने का निर्देश सरकार के द्वारा दिया गया था । यह युद्ध तकरीबन 13 दिनों तक चला था । यह सबसे खतरनाक युद्ध था जिस युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब दिया गया था ।

इस युद्ध के बाद पाकिस्तान को यह बात समझ में आ गई कि भारत से दुश्मनी करना उनके लिए बहुत नुकसानदायक है । इसी सोच से पाकिस्तान ने 1971 के युद्ध में आत्मसमर्पण किया था । पाकिस्तान कभी भी भारत से युद्ध क्षेत्र में जीत हासिल नहीं कर सकता है क्योंकि भारत कभी भी पहले हमला नहीं करता है जब पाकिस्तान हमला करता है तब भारत के द्वारा पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया जाता है । हर युद्ध में पाकिस्तान को भारत से हार मिली है । भारतीय सैनिकों का जज्बा बहुत मजबूत होता है ।

भारतीय सैनिक हर समय दुश्मनों से इंतकाम लेने के लिए तैयार रहते हैं । जब युद्ध का समय होता है तब भारतीय सैनिकों के अंदर युद्ध में जीत हासिल करने का जज्बा होता है । इसलिए भारतीय सैनिक पूरी ताकत के साथ दुश्मनों से लड़ाई करते हैं और जीत हासिल करते हैं । भारतीय सैनिकों को संघर्ष करने से कभी भी डर नहीं लगता है ।  भारतीय सैनिक कभी भी दुश्मन को नहीं छोड़ते हैं ।

यदि दुश्मन पीछे से हमला करता है तो भारतीय सैनिक सामने से हमला करके जीत हासिल करते हैं । भारतीय सैनिको के हिम्मत की हमें प्रशंसा अवश्य करनी चाहिए । जिस समय 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ था उस समय भारतीय सशस्त्र सेनाओं की संख्या 500000 थी । जिस समय भारत पाकिस्तान का युद्ध हुआ उस समय भारतीय मुक्ति वाहिनी की संख्या 175000 थी । जिस समय भारत पाकिस्तान का युद्ध हुआ उस समय कुल सैनिकों की संख्या 675000 थी ।

जो संख्या पाकिस्तानी सैनिकों से बहुत अधिक थी । फिर भी पाकिस्तान सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर हमला किया । पाकिस्तान की सरकार को यह लगता था कि भारतीय सैनिक कमजोर हैं । वह पाकिस्तान की सेनाओं का सामना नहीं कर सकते । जब यह युद्ध हुआ तब भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देकर पाकिस्तान की सरकार को यह बता दिया था कि यदि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा तो भारत को पाकिस्तान को तहस-नहस करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा ।

1971 में हुए भारत पाकिस्तान युद्ध में हुई हानि के बारे में – 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध  13 दिनों तक  चला था । इस घमासान युद्ध मे भारतीय सैनिकों ने डटकर सामना किया था । 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारत के 3843 सैनिक शहीद हो गए थे । 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में 1नौ वहन विभाग क्षतिग्रस्त हो गया था । 1971 में हुए भारत पाकिस्तान युद्ध में भारतीय इंधन सुविधाएं क्षतिग्रस्त हो गई थी । इस युद्ध में भारतीय ओखा बंदरगाह बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था । इस युद्ध में भारतीय पश्चिमी वायु क्षेत्र बहुत बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुआ था ।

फिर भी भारतीय सैनिकों ने डटकर सामना किया और पाकिस्तान को यह दिखा दिया था कि भारतीय सैनिकों की ताकत क्या है । भारतीय सैनिक हमेशा जंग के मैदान में लड़ने के लिए तैयार हैं और पाकिस्तान जब चाहे तब युद्ध क्षेत्र में आकर लड़ाई कर सकता है । हर बार पाकिस्तान को हार का सामना करना ही पड़ेगा ।

1971 में हुए भारत पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों के आत्मसमर्पण के बारे में – 1971 को जब पाकिस्तान के सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर हमला किया तब इस युद्ध की शुरुआत हुई थी भारत-पाकिस्तान युद्ध तकरीबन 13 दिनों तक चला था और इस युद्ध में काफी पाकिस्तानी सैनिकों को मार दिया गया था । भारतीय सैनिक पूरी तैयारी के साथ इस युद्ध में लड़ाई लड़ रहे थे ।पाकिस्तानी सैनिकों को जीतने का मौका भारतीय सैनिकों ने नहीं दिया था ।

भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी बनाकर भारतीय सैनिक कैंप मे  रोक कर के रखा था । यह युद्ध  पूर्वी बंगाल एवं पश्चिमी बंगाल दोनों क्षेत्रों में हुआ था । पूर्वी बंगाल एवं पश्चिमी बंगाल दोनों भागों में भारतीय सैनिकों की जीत हुई थी । भारतीय सैनिकों की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है । भारतीय सैनिकों ने अपनी बुद्धि और ताकत के बल पर पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी बना लिया था । इस युद्ध में भारतीय सैनिकों के द्वारा पाकिस्तान की 93000 सैनिकों को बंदी बना लिया था ।

जिसमें 91000 सैनिक जो वर्दी धारक थे उनको बंदी बनाकर तहखाने में बंद कर दिया गया था । जब पाकिस्तानी सैनिक कमजोर पड़ने लगे और पाकिस्तान की सरकार को यह लगने लगा कि पाकिस्तान को बहुत नुकसान हो रहा है । इसके बाद पाकिस्तान की सरकार ने पाकिस्तान के सैनिकों को यह आदेश दिया कि अब इस युद्ध के समापन की तैयारी कर लेनी चाहिए और पाकिस्तानी सैनिकों के बड़े अधिकारियों के द्वारा भारतीय सरकार को यह पैगाम दिया गया कि हम आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हैं ।

इसी के साथ आत्मसमर्पण की तैयारी की गई । जिस आत्मसमर्पण में पाकिस्तान के जाने-माने सैनिक भारत के योद्धा सैनिक शामिल हुए और ढाका में यह आत्म समर्पण समारोह रखा गया था । जो 16 दिसंबर 1971 के दिन पाकिस्तानी सैनिकों से समर्पण हस्ताक्षर करा कर इस युद्ध को समाप्त किया गया था । इस युद्ध के समापन के बाद भारतीय सैनिकों की जीत हुई थी और पाकिस्तान को यह पता चला था कि भारतीय सैनिकों से युद्ध करना आसान नहीं है ।

यदि  भारत से युद्ध किया तो काफी नुकसान पाकिस्तान की सेना को भुगतना पड़ेगा । इसी के साथ इस युद्ध का समापन हुआ था ।

1971 में हुए भारत पाकिस्तान युद्ध के कारण के बारे में – जब भारत देश को आजादी प्राप्त हुई तब पाकिस्तान को भारत से अलग कर दिया गया था । जिसके बाद पाकिस्तान भारत के कई क्षेत्रों पर अपनी निगाहें जमा करके बैठा हुआ था । पाकिस्तान यह चाहता था कि वह अपनी ताकत से भारत के इलाकों को हड़प लेगा । परंतु पाकिस्तान यह नहीं जानता था कि भारत से दुश्मनी करना उसके लिए कितना भारी पड़ सकता है । पाकिस्तान को अलग कर देने के बाद पाकिस्तान में कई संघर्ष वहां के लोगों के बीच में हुआ था ।

पाकिस्तान को दो भागों में विभाजित किया गया था । वहां के लोग पाकिस्तान को दो भागों में बांटना चाहते थे । पश्चिमी पाकिस्तान एवं पूर्वी पाकिस्तान दोनों के बीच 1947 के समय वहां के संयुक्त राजशाही लोगों के द्वारा कई राजनीतिक तनाव उत्पन्न हो गए थे । जिसके कारण कई आंदोलन वहां के लोगों के द्वारा किया गया था । जिस आंदोलन को कई लोगों के द्वारा आगे बढ़ाया गया था । पूर्वी पाकिस्तान के लोगों के द्वारा 1950 में भाषा आंदोलन प्रारंभ किया गया था क्योंकि पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच की दूरी बहुत अधिक थी ।

दोनों पाकिस्तान के लोगों की  भाषा , रहन सहन  अलग था । जिसके कारण पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान के लोगों के बीच में संघर्ष चल रहा था । धीरे-धीरे संघर्ष आगे बढ़ता चला गया और पाकिस्तान के पूर्व में सन 1964 में आंदोलन बड़े दंगे के रूप में बदल गया था । जिस दंगे में काफी लोगों की जान चली गई थी । कुछ समय तक यह दंगा फसाद चलता रहा । फिर वहां की सरकार ने जनता को समझा-बुझाकर दंगे फसाद बंद करवाएं थे । परंतु वहां के लोग सहमत नहीं थे ।

सन 1969 मे वहां के लोगों के द्वारा एक बार फिर भारी विरोध प्रदर्शन किया गया था । इस विरोध प्रदर्शन में लाखों की संख्या में लोग शामिल हुए और दंगा फसाद होने लगे थे । यह विरोध प्रदर्शन इतना बढ़ गया कि वहां के प्रधानमंत्री अयूब खान को दोनों भाग को एक साथ संभालना मुश्किल पड़ गया था । जिसके कारण वहां के राष्ट्रपति अयूब खान को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा था ।

जिसके लिए अयूब खान ने वहां के प्रमुख जनरल सेना याह्या खान को पाकिस्तान की केंद्र सरकार को संभालने का न्योता दिया गया और उनके इस न्योते को वहां के सेना प्रमुख जनरल याह्या खान ने स्वीकार कर लिया था । याह्या खान के नेतृत्व में  वहां की सरकार बनी थी ।  यदि हम पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान की भौगोलिक दूरी के बारे में बात करें तो वह दूरी बहुत अधिक थी ।

जिसके कारण दोनों क्षेत्रों का मिलाप नहीं हो पा रहा था । बंगाली संस्कृति एवं पाकिस्तानी संस्कृति एक दूसरे से मेल नहीं खा रही थी । दोनों की अलग-अलग संस्कृति राष्ट्रीय एकीकरण के प्रतीक प्रयास में बांधा बनती थी । कई बार पाकिस्तान की सरकार ने दोनों क्षेत्रों को एक करने का प्रयास किया था परंतु पाकिस्तान सरकार का यह प्रयास विफल रहा था । पाकिस्तान की सरकार के द्वारा बंगाली भाषा बोलने वाले क्षेत्रों पर प्रभाव डालने का भी प्रयास किया गया था ।

पाकिस्तान की सरकार के द्वारा यह प्रयास किया गया था कि बंगाली प्रभाव वाले क्षेत्रों को इस्लामाबाद कि केंद्रीय सरकार बना दी जाए , इसमें इस्लामाबाद की हिस्सेदारी कर दी जाए । पाकिस्तान की सरकार को इस्लामाबाद की हिस्सेदारी देने के अधिकार से रोकने के लिए वहां के लोगों ने विवाद कर दिया और एक यूनिट कार्यक्रम चलाने की घोषणा की गई । उस यूनिट कार्यक्रम में वहां के लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था क्योंकि वह जानते थे यदि आज वहां के लोगों ने आंदोलन नहीं किया तो वह कभी भी अपने हक के लिए लड़ाई नहीं कर पाएंगे ।

जिसके अंतर्गत वहां के लोगों ने पूर्वी पाकिस्तान एवं पश्चिमी पाकिस्तान की स्थापना कर दी थी । परंतु पश्चिमी लोगों ने इसका घोर विरोध व्यक्त किया था ।  जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने यह देखा कि अब तो दोनों को एक साथ संभालना बहुत मुश्किल है और वहां के राष्ट्रपति से पाकिस्तान का कार्यभार संभाला नहीं जा रहा था । उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का निर्णय कर लिया था ।

जब वहां के न्यू राष्ट्रपति याह्या खान ने राष्ट्रपति बनने का फैसला किया और राष्ट्रपति बनने के बाद याह्या खान ने वहां पर प्रथम आम चुनावों की घोषणा कर दी थी परंतु आम चुनावों की घोषणा के बाद भी वहां के लोगों में संतुष्टि नहीं देखी गई थी । जिसके बाद वहां पर वहां के लोगों के द्वारा मुक्ति संघर्ष प्रारंभ किया गया था । इस मुक्ति संघर्ष के कारण ही 1971 में भारत पाकिस्तान के बीच में धमाशान युद्ध हुआ था । भारत पाकिस्तान युद्ध में मुक्ति संघर्ष ने आग में तेल डालने का काम किया था ।

जिसके बाद तकरीबन 13 दिनों तक भारत पाकिस्तान के बीच में घमाशान युद्ध चला जिस युद्ध में पाकिस्तान की बहुत बुरी तरह से हार हुई थी और भारतीय सैनिकों की जीत हुई थी । जिस जीत का जश्न भारत देश में अभी तक मनाया जाता है , भारतीय सैनिकों की प्रशंसा की जाती है ।  भारतीय सैनिकों ने 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब दिया था और उस युद्ध में जीत हासिल की थी । इस बात की प्रशंसा हम सभी को करनी चाहिए , भारतीय सैनिकों की प्रशंसा करनी चाहिए ।

हम सभी भारतीयों को भारतीय सैनिकों पर गर्व होना चाहिए कि भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी सैनिकों से डटकर सामना किया और 1971 के युद्ध को जीत लिया था ।

बांग्लादेश के निर्माण के इतिहास के बारे में –  बांग्लादेश के निर्माण का इतिहास काफी संघर्षों से भरा रहा है । जब 1947 को भारत देश को आजादी मिली थी तब भारत देश मे हिंदू बहुल के लोग एवं मुस्लिम बहुल के लोग आपस में झगड़े करने लगे थे । जिसके कारण भारत का विभाजन करने का निर्णय लिया गया था । भारत विभाजन में भारत हिंदू बहुल भारत एवं मुस्लिम बहुल भारत में बट गया था । जब भारत से पाकिस्तान को अलग किया गया तब बंगाल के दो हिस्से किए गए थे ।

हिंदू इलाके बाले बंगाल को भारत में ही रखा गया और उस इलाके का नाम पश्चिम बंगाल रखा गया था । दूसरा हिस्सा पाकिस्तान में चला गया था । जिसे पूर्वी बंगाल कहते थे । 1955 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जी ने पूर्वी बंगाल का नाम बदलकर पूरी पाकिस्तान रख दिया था । उस तरह से बंगाल दो भागों में विभाजित हो गया था । 1 भाग भारत में एवं दूसरा भाग पाकिस्तान में चला गया था । पाकिस्तान में जो भाग गया था वहां के लोग पाकिस्तान से खुश नहीं थे ।

विभाजन के बाद 1950 में पूर्वी बंगाल मे वहां के लोगों के द्वारा एक आंदोलन चलाया गया था । जो धीरे धीरे बढ़ता गया । लोग इस आंदोलन से जुड़ते गए । 1950 का आंदोलन पूर्वी बंगाल के लोगों ने पाकिस्तान के द्वारा किए गए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए किया गया था । जो आगे चलकर 1952 के बांग्ला भाषा आंदोलन से जुड़ गया था । जो बहुत ही भयानक आंदोलन हो गया था । जब पाकिस्तान के राजनेताओं की द्वारा सन 1955 में पूर्वी बंगाल का नाम बदलकर पूर्वी पाकिस्तान रखा गया तब वहां के लोग भड़क गए थे और सभी लोग पाकिस्तान की इस फैसले से खुश नहीं थे ।

वहां के राजनेताओं को पाकिस्तान सरकार के द्वारा परेशान किया जा रहा था  तभी वंग बंधु शेख मुजीवुररहमान ने बांग्लादेश की आजादी की नींव रखी थी और पूर्वी बंगाल के सभी लोगों को अपने आंदोलन में जोड़ लिया था । जो आगे चलकर बहुत ही भयानक आंदोलन बन गया था । जो आंदोलन बांग्लादेश की स्वाधीनता की आवाज उठा रहा था । उस आंदोलन में पाकिस्तान के सैनिकों ने पूर्वी बंगाल के लोगों को मारना प्रारंभ कर दिया था । खूनी संघर्ष प्रारंभ हो गया था ।

जब वहां के लोगों ने मदद की गुहार लगाई तब भारत ने अपनी सीमाओं पर बंगाल के लोगों को शरण दी थी । 1971 के खूनी संघर्ष में पूर्वी बंगाल के लगभग 1000000 से भी ज्यादा बांग्लादेशी भारत में शरणार्थी के रूप में आए । भारत ने उन सभी लोगों को भारतीय इलाकों में रहने की जगह दी , कैंप लगाकर उनको पाकिस्तान के कहर से बचाया । जब यह खूनी आंदोलन बहुत तेज गति से बढ़ने लगा था तब भारत ने हस्तक्षेप किया था । जिसके कारण भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 का युद्ध हुआ था । जिस युद्ध में पाकिस्तान की हार हुई थी ।

जब पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था तब बांग्लादेश का निर्माण हुआ था । इस तरह से बांग्लादेश का गठन हुआ था । जब बांग्लादेश को पाकिस्तान से अलग किया गया था तब बांग्लादेश के पहले प्रधानमंत्री के रूप मे मुजीबुई   रहमान को चुना गया था । मुजीबुई   रहमान की अगुवाई में बांग्लादेश का विकास आगे बढ़ाया गया था । इस तरह से बांग्लादेश के गठन का इतिहास रहा है ।

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