जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान पर निबंध Essay on jim corbett national park in hindi

Essay on jim corbett national park in hindi

Jim corbett national park – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पर लिखे निबंध को पढ़ते हैं ।

Essay on jim corbett national park in hindi
Essay on jim corbett national park in hindi

Image source – https://en.m.wikipedia.org/wiki/Jim_Corbett_National_Park

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान के बारे में about jim corbett national park in hindi- जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान भारत देश का सबसे प्राचीन एवं सुंदर  राष्ट्रीय उद्यान है । जिसकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है । यह जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पर्यटकों के लिए बहुत ही दर्शनीय हैं । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क पर लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष घूमने के लिए आते हैं और अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं । दोस्तों यदि हम जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान के निर्माण के बारे में बात करें तो जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का निर्माण 1936 में किया गया था । 1936 में उत्तराखंड राज्य में जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना की गई थी ।

उत्तराखंड राज्य  में जिम कार्बेट नेशनल पार्क की स्थापना बंगाल  के  बाघों  की सुरक्षा के उद्देश्य से की गई थी । जब जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना की गई थी तब इस जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का नाम हैली नेशनल पार्क रखा गया था । यह नाम इसलिए रखा गया था क्योंकि ब्रिटिश शासन के दौरान इस राष्ट्रीय उद्यान का निर्माण किया गया था और हैली नेशनल के नेतृत्व में यहां पर बाघों की सुरक्षा  को देखते हुए इस उद्यान का निर्माण कराया गया था । हैली नेशनल को जानवरों से बहुत प्रेम था । इसलिए जानवरों की रक्षा , सुरक्षा के उद्देश्य से यह उद्यान बनाना बनाया गया था ।

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान भारत देश के उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले के रामनगर में स्थित है । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान को गौरवशाली पशु बिहार भी कहा जाता है । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पतली दून घाटी में , जो राम गंगा में स्थित है वहां पर 1318.54 वर्ग मीटर में फैला हुआ है । जिसकी सुंदरता पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है । प्रतिवर्ष यहां पर आनंद प्राप्त करने के लिए पर्यटक आते हैं और अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं । ब्रिटिश शासन के दौरान इस सुंदर उद्यान का निर्माण कराया गया था ।

इसके निर्माण में किसी भी तरह की कोई भी कमी नहीं रखी गई थी । जब भी कोई पर्यटक जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान को देखने के लिए जाता है वह दोबारा उस उद्यान को देखने की चेष्टा करता है । जो भी व्यक्ति एक बार इस उद्यान को देखने के लिए जाता है वह अपने दोस्तों और परिवारों को घुमाने के लिए फिर से जाता है जिससे आनंद ही आनंद प्राप्त होता है । उत्तराखंड के नैनीताल का सबसे प्रसिद्ध और जाना माना राष्ट्रीय उद्यान जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान सबसे सुंदर और अद्भुत है ।

जहां पर पर्यटक जाकर जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान की सुंदरता का आनंद प्राप्त करते हैं । राष्ट्रीय उद्यान पार्क में पर्यटकों के रुकने की भी व्यवस्था है । राष्ट्रीय उद्यान पार्क में पर्यटकों के लिए खाने , पीने की व्यवस्था भी की गई है क्योंकि लाखों करोड़ों की संख्या में पर्यटक प्रतिवर्ष जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान को देखने के लिए जाते हैं और अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं ।जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क सुंदरता के लिए पहचाना जाता है । इसकी सुंदरता की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में  सभी तरह के जानवर निवास करते हैं ।

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में हाथी , घोड़ा , शेर , बाघ , चिड़िया , अजगर और भी कई प्रजाति के जानवर  रहते हैं । पार्क की हरियाली देखने के लायक है । जब कोई पर्यटक जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में घूमने के लिए जाता है वह जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क की हरियाली देखकर मोहित हो जाता है । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में ऊंचे ऊंचे पहाड़ भी स्थित है जिसकी सुंदरता देखने के लायक है । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क के झरने दर्शनीय हैं ।

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क को और भी सुंदर बनाने के लिए पर्यटन विभाग के द्वारा कार्य किए जाते हैं क्योंकि यह भारत देश का सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क के रूप में पहचाना जाता है । इस राष्ट्रीय उद्यान पार्क की सुंदरता के चर्चे विदेशों में तक किए जाते हैं । यह जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क उत्तराखंड राज्य के लोगों के लिए खुशी लेकर आया है क्योंकि जब विदेशों से पर्यटक इस जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान को देखने के लिए आते हैं तब वहां के आसपास के लोगों का व्यापार बहुत तेज गति से होता है और वह रोजी रोटी कमाते हैं ।

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क के अंदर की सुंदरता के बारे में – भारत देश के उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर में स्थित जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क अंदर से दर्शनीय है । जैसे ही हम रामनगर रेलवे स्टेशन पर पहुंच जाते हैं तब इस जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क के गृह प्रवेश गेट की दूरी तकरीबन 12 किलोमीटर रह जाती है ।जब हम प्रवेश ग्रह से अंदर प्रवेश करते हैं तब हम अंदर की सुंदरता  देख पाते हैं  जब हम जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क की सुंदरता देखते हैं तब हमें आनंद प्राप्त होता है ।

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क के अंदर वहां पर आने वाले पर्यटकों को रूकने के लिए , पार्क के अंदर अतिथि गृह बनाया गया है । जिस अतिथि गृह में तकरीबन 150 से 200 पर्यटक आसानी से रुक सकते है ।  पर्यटकों के लिए सभी तरह की व्यवस्था अतिथि गृह में की गई है । जब हम जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क के अतिथि गृह की सुंदरता को देखेंगे तब हमें पता चलेगा की यह  जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क का सबसे सुंदर अतिथि ग्रह है ।पर्यटकों के लिए  जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में घूमने रुकने की व्यवस्था पर्यटन विभाग की ओर से की गई है ।

एक सुंदर केविन भी पर्यटकों के लिए जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में  बनाई गई है जो सभी पर्यटकों का मन मोह लेती है । इस जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में 10% हरे भरे घास के मैदान हैं जिसकी सुंदरता दर्शनीय है । जंगल के तकरीबन 73 प्रतिशत भाग में पार्क बनाया गया है ।जिस पार्क में पर्यटक जाकर घूमते हैं और अपनी फैमिली के साथ आनंद प्राप्त करते हैं । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क के अंदर तकरीबन 580 प्रजातियां पक्षियों की पाई जाती है जो सभी पर्यटकों का मन मोह लेते हैं । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में तकरीबन 110 प्रजातियां पेड़ों की है जिसकी सुंदरता बहुत अच्छी है ।

रंग , बिरंगी पेड़ों से जब फूल झड़ते हैं तब काफी आनंद जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान के पार्क में आता है । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में तकरीबन 50 प्रजातियां स्तनधारियों की मौजूद है जो दर्शनीय हैं । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में 25 प्रतिशत प्रजातियां सरीसृप की पाई जाती है । जब कोई पर्यटक उत्तराखंड घूमने के लिए जाता है वह नैनीताल जिले के रामनगर में स्थित जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क को देखने के लिए अवश्य जाता है क्योंकि यह पार्क पर्यटकों का मन मोह लेता है । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क के अंदर की सुंदरता की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है ।

इसलिए हमें उत्तराखंड में स्थित नैनीताल जिले के रामनगर में स्थित जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क को देखने के लिए अवश्य जाना चाहिए और अपनी फैमिली को भी साथ में ले जाना चाहिए । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क के अंदर दलदलीए  गड्ढे ,  अंदर सबसे सुंदर और प्रसिद्ध जगह पहाड़ी इलाका है जो 520.8 मीटर के एरिया में फैला हुआ है जिसकी सुंदरता दर्शनीय है । जहां पर लाखों पर्यटक आकर अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं इसके बाद पार्क के अंदर नदी के बेल्ट देखने के लायक है ।

जो लोग जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क के अंदर की सुंदरता देखने के लिए आते हैं  वह अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं । इसीलिए लाखों पर्यटक इस जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क की सुंदरता का आनंद लेने के लिए आते है । जो भी पर्यटक  जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क  में घूमने  के लिए आता है वह नदी के बेल्ट को अवश्य देखता है । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क के अंदर  स्थित बड़ी-बड़ी झीलें और घास के मैदान को कोई भी पर्यटक देखता हैं  वह कभी भी इसकी सुंदरता को भूलता नहीं है  क्योंकि यही वह सुंदर इलाका है जिसकी सुंदरता को सभी पर्यटक अपने कैमरे में कैद करके ले जाते हैं ।

इसलिए भारत देश का सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन राष्ट्रीय उद्यान जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान है ।जिसकी सुंदरता के चर्चे देश ही नहीं बल्कि विदिशो में तक  किए जाते है और कई पर्यटक इसकी सुंदरता को देखने के लिए भारत देश में घूमने के लिए आते हैं ।

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में जाने के रास्ते – उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर में स्थित जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में जाने के लिए सबसे पहले दिल्ली जाना होता है । दिल्ली से हम बस के माध्यम से या ट्रेन के माध्यम से मुरादाबाद जाना होता है । इसके बाद काशीपुर जाते हैं । काशीपुर से सीधे हम रामनगर जाते हैं । रामनगर के रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के बाद हम बस के माध्यम से , सिटी बस के माध्यम से , रेल के माध्यम से , फोर व्हीलर के माध्यम से , टूरिस्ट वैन के माध्यम से , आटो के माध्यम से जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में जा सकते हैं ।

दिल्ली से एक कुमाऊ विकास निगम की ओर से जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क की सैर कराई जाती है । यदि हम इस विकास निगम में पंजीयन कराते हैं तो कुमाऊ विकास निगम पर्यटक को शुक्रवार के दिन दिल्ली से सीधे जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क तक ले जाती है और पूरे पार्क का भ्रमण करवाती है । यदि हम जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क की सुंदरता को देखना चाहते हैं तो हमें अपने परिवार के साथ में नवंबर से मई महीने के बीच में जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क की सुंदरता को देखने के लिए अवश्य जाना चाहिए क्योंकि नवंबर , मई के महीने में काफी पर्यटक इस जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क की सुंदरता को देखने के लिए आते हैं ।

यदि हम भी इस जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क की सुंदरता को देखना चाहते हैं तो हमें अपने परिवार को साथ में लेकर इस जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार की सुंदरता को देखने के लिए अवश्य जाना चाहिए ।

उत्तराखंड के नैनीताल के रामनगर में स्थित जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में स्थित जानवर एवं पक्षियों के बारे में – उत्तराखंड के नैनीताल के रामनगर में स्थित जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में स्थित जानवरों , पक्षियों एवं पेड़ पौधों की सुंदरता देखने के लायक है । जो भी व्यक्ति वहां के जानवरों को देखता है वह अपने जीवन में आनंद प्राप्त करता है । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में शेर , भालू , हाथी , सूअर , बाघ , हिरण , सांभर , पांडा , नीलगाय , कांकड़ , घुरल , चीता , सर्प प्रजातियां एवं अजगर की प्रजातियां स्थित है । जब कोई पर्यटक जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क के अंदर प्रवेश करता है वह शेर की दहाड़ , चीते की छलांग देखकर आनंद प्राप्त करता है ।

नीलगाय की सुंदरता को देखने के लिए काफी पर्यटक दूर-दूर से आते हैं और नीलगाय की सुंदरता को अपने कैमरे में कैद करके ले जाते हैं । नैनीताल के रामनगर में स्थित जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में रंग-बिरंगे पक्षी दर्शनीय है ।जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में बंदरों की कई प्रजातियां पाई जाती है जो दर्शनीय है । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में रंग-बिरंगे पंछियों की तकरीबन 500 से 600 प्रजातियां पाई जाती है जिन पक्षियों को देखकर पर्यटकों को आनंद प्राप्त होता है ।

जब इस जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क की स्थापना की गई थी तब इस पार्क की स्थापना करने का सिर्फ एक ही उद्देश्य था जो बाघ प्रजाति को सुरक्षित रखना था ।

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क के नामकरण के बारे में –  जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क कि जब 1936 में स्थापना की गई थी तब इस पार्क का नाम हैंली  नेशनल पार्क रखा गया था क्योंकि उस समय हमारा देश ब्रिटिश शासन के अधीन था ।  ब्रिटिश शासन के दौरान माइकल हैंली गवर्नर थे । उन्हीं के नाम पर इस जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क का नामकरण किया गया था । इसके बाद जब हमारा भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद  हो गया था तब भारत सरकार के द्वारा जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क का नाम रामगंगा नेशनल पार्क रख दिया गया था ।

काफी समय तक इसी  नाम से यह जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क प्रसिद्ध रहा था । परंतु कुछ समय पश्चात रामगंगा नेशनल पार्क का नाम परिवर्तित किया गया था और इस पार्क का नाम प्रसिद्ध शिकारी जिम कार्बेट के नाम पर रख दिया गया था । जिम कार्बेट के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह वहां के आसपास रहने वाले लोगों की रक्षा करता था । जिम कार्बेट ने कई बार आदमखोर जानवरों का शिकार करके कई लोगों की जान बचाई थी । भारत की सरकार जिम कार्बेट के काम से बहुत खुश थी । इसीलिए जिम कार्बेट के नाम पर ही इस पार्क का नाम रख दिया गया था ।

भारत सरकार के द्वारा 1957 को इस पार्क का नाम जिम कार्बेट के नाम पर रख दिया गया था । तभी से सभी इस पार्क को जिम कार्बेट नाम से जानने लगे थे । पूरी दुनिया में यह पार्क जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क के नाम से पहचाना जाता है । जिस पाक की सुंदरता को देखने के लिए लाखों-करोड़ों पर्यटक भारत देश घूमने के लिए आते हैं और इस जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क की सुंदरता को देखकर अपने जीवन में आनंद ही आनंद प्राप्त करते हैं । यदि हम इस पार्क की सुंदरता करीब से देखना चाहते हैं तो हमें अपने परिवार के साथ नैनीताल घूमने के लिए अवश्य जाना चाहिए ।

रामनगर के जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क को देखने के लिए अवश्य जाना चाहिए , वहां के रंग-बिरंगे पक्षियों को देखने के लिए अवश्य जाना चाहिए । जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क में स्थित एक से एक सुंदर जानवरों को जब हम देखते हैं तब हमें बड़ा आनंद आता है और हम उन जानवरों के साथ खड़े होकर अपने मोबाइल या कैमरे के माध्यम से सेल्फी लेते हैं जो कई सालों तक यादगार बनी रहती है । हमें अपने जीवन के व्यस्त समय में से कुछ समय निकालकर जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पार्क को देखने के लिए अवश्य जाना चाहिए और अपने जीवन में  आनंद प्राप्त करना चाहिए ।

जिम कार्बेट के बारे में – जिम कार्बेट एक शिकारी था जो जानवरों का शिकार करने के लिए जंगलों में जाता था । वह सिर्फ खूंखार जानवरों का ही शिकार करता था  जो अपने आतंक से मानव प्रजाति को नुकसान पहुंचाता था ।जिम कार्बेट का पूरा नाम जेम्स एडवर्ड कार्बेट था जो एक शिकारी के नाम से पहचाना जाता था । जिम कार्बेट गढ़वाल में स्थित जंगल में शिकार करने के लिए जाता था । गढ़वाल में स्थित एक आदमखोर शेर रहता था वह शेर वहां के आसपास रहने वाले लोगों को परेशान करता था ।

जो भी व्यक्ति उस आदमखोर शेर की चपेट में आ जाता था वह शेर उस व्यक्ति पर हमला कर देता था । उस शेर का शिकार करने का प्लान जिम कार्बेट ने बनाया था और पूरी प्लानिंग के साथ वह शेर का शिकार करने के लिए निकल पड़ा था । जिम कार्बेट ने आदमखोर शेर का शिकार कर दिया था । इस तरह से कई बार आदमखोर जानवरों से कई व्यक्तियों को जिम कार्बेट ने बचाया है ।उसकी इस महानता से भारत सरकार बहुत खुश थी ।

वहां के रहने वाले लोगों का समर्थन जिम कार्बेट के साथ में था इसीलिए भारत सरकार ने 1957 को जिम कार्बेट के नाम पर राष्ट्रीय उद्यान पार्क का नाम रख दिया गया था । जिम कार्बेट शिकार करने के साथ-साथ पुस्तकें लिखना भी पसंद करता था । जिम कार्बेट के द्वारा एक पुस्तक भी लिखी गई है जिस पुस्तक का नाम द मैन ईटर ऑफ रूद्र प्रयाग था । जिस पुस्तक को काफी लोगों ने पढ़ा है । यदि हम जिम कार्बेट के जन्म की बात करें तो जिम कार्बेट का जन्म 25 जुलाई 1775 को हुआ था ।

जिम कार्बेट एक साहसी और निडर व्यक्ति था । जिम कार्बेट ताकतवर से ताकतवर जानवरों का शिकार करने से नहीं डरता था । जब वह किसी जानवर का शिकार करने के लिए जंगल में जाता था तब वह पूरी प्लानिंग के साथ जंगल में जाता था । जिम कार्बेट जंगल से जब तक वापस नहीं आता था जब तक वह जानवर का शिकार नहीं कर लेता था । जिम कार्बेट ने कई पर्यटक की जान आदमखोर जानवर से बचाई है ।  जो भी व्यक्ति जिम कार्बेट से मिलता था वह व्यक्ति जिम कार्बेट का गहरा एवं लोकप्रिय दोस्त बन जाता था ।

जिम कार्बेट ने काफी लोगों का दिल जीता था । इसीलिए नैनीताल के रामनगर में स्थित राष्ट्रीय उद्यान पार्क का नाम जिम कार्बेट के नाम पर रखा गया था ।

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