अयोध्या राम मंदिर का इतिहास व् जानकारी Ayodhya ram mandir history in hindi

Ayodhya ram mandir history in hindi

Ayodhya ram mandir –  दोस्तों आज हम आपको इस बेहतरीन लेख के माध्यम से अयोध्या राम मंदिर के इतिहास के बारे में एवं अयोध्या राम मंदिर की जानकारी देने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस जबरदस्त लेख को पढ़कर अयोध्या राम मंदिर के इतिहास की जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Ayodhya ram mandir history in hindi
Ayodhya ram mandir history in hindi

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अयोध्या के राम मंदिर के बारे में About ram mandir ayodhya in hindi- दोस्तों अयोध्या में स्थित राम मंदिर का हिंदू धर्म के लोगों के लिए बड़ा महत्व है ।हिंदू धर्म के लोगों की आस्था राम मंदिर से जुड़ी हुई है क्योंकि अयोध्या में भगवान  पुरुषोत्तम राम का जन्म हुआ था। हिंदू धर्म में भगवान राम को सच्चाई का प्रतीक माना जाता है । अधर्म का नाश  करने के लिए उनका जन्म हुआ था और उन्होंने असत्य का नाश करके सत्य की विजय कराई थी । इसीलिए हिंदू धर्म के लोगों का भगवान राम से अटूट गहरा संबंध है ।

सभी उनको पूजते हैं , उनकी उपासना करते हैं । हिंदू धर्म के ग्रंथ रामायण में यह बताया है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था ।हिंदू धर्म के प्राचीन ग्रंथ रामचरितमानस में भी यह बताया गया है कि राम भगवान का जन्म अयोध्या में हुआ था ।इसीलिए हम इस बात को झुटला नहीं सकते हैं कि राम भगवान का जन्म अयोध्या में हुआ था । इसलिए अयोध्या की भूमि को राम जन्मभूमि भी कहा जाता है । अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण विक्रमादित्य ने करवाया था ।

अयोध्या के साथ-साथ तकरीवन 250 से 350 मंदिरों का निर्माण विक्रमादित्य के द्वारा अयोध्या राज्य में करवाया गया था क्योंकि विक्रमादित्य की आस्था हिंदू धर्म से जुड़ी हुई थी । अयोध्या में हिंदू धर्म के महान भगवान राम का जन्म हुआ था इसलिए विक्रमादित्य के द्वारा अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कराया गया था । निर्माण को जब विक्रमादित्य ने बनवाया था तब उस मंदिर को बहुत अधिक सुंदरता विक्रमादित्य के द्वारा दी गई थी । धीरे-धीरे समय बीत जाने के बाद अयोध्या में कुछ धर्मों के लोगों के द्वारा वहां पर क्षति पहुंचाई गई , हिंदू मंदिरों को नष्ट किया गया था ।

ऐसा माना जाता है कि जब हमारे भारत देश में मुगल साम्राज्य का शासन था तब बाबर ने अपने सैनिकों को राम मंदिर एवं अयोध्या में स्थित सभी हिंदू धर्म के मंदिरों को नष्ट करने का आदेश दिया था । इसीलिए मुगल साम्राज्य के सबसे साहसी और ताकतवर राजा बाबर के कहने पर राम मंदिर को नष्ट किया गया था और वहां पर मस्जिद बनाई गई थी । काफी हिंदू धर्म के लोगों ने वहां पर राम मंदिर बनाने का समर्थन किया और साधु संतों के द्वारा वहां पर राम मंदिर पुनर्निर्माण को प्रारंभ कराने के लिए एक आंदोलन चलाया गया था ।

जिसके कारण हिंदू एवं मुस्लिम समुदाय के लोगों में विवाद छिड़ गया था । हिंदू धर्म के लोगों का यह कहना था कि अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था इसलिए अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए और वहां पर जो रामलला की मूर्ति विराजमान है उस मूर्ति को नहीं हटाना चाहिए । उसी तरह से मुस्लिम समुदाय के लोगों का यह कहना है कि वहां पर प्राचीन समय से ही मस्जिद बनी हुई है और वहां पर मस्जिद ही बनना चाहिए ।

इस तरह से हिंदू एवं मुस्लिम दोनों समुदाय के पक्षों में विवाद छिड़ा हुआ है । जिसका निराकरण निकलना संभव नहीं हो पा रहा है । हिंदू धर्म के द्वारा यह बताया जाता है कि मुगल आक्रमणकारी बाबर के द्वारा राम मंदिर को क्षति पहुंचाई गई थी और वहां पर मस्जिद का निर्माण कराया गया था ।

अयोध्या में स्थित राम मंदिर पर हिंदू एवं मुस्लिम समुदाय के दोनों पक्षों में विवाद – दोस्तों भारत देश में स्थित उत्तर प्रदेश के अयोध्या मे स्थित राम मंदिर पर काफी विवाद है क्योंकि दोनों पक्ष यह चाहते हैं कि उनके धर्म की जीत हो । हिंदू धर्म के लोगों का यह कहना है कि वहां पर प्राचीन समय से ही राम मंदिर स्थित था और आज भी वहां पर राम मंदिर बनना चाहिए ।

उसी तरह से मुस्लिम धर्म के समुदाय के लोगों का भी यह मानना है कि वहां पर बाबर के द्वारा मस्जिद का निर्माण कराया गया था और उस मस्जिद को क्षति पहुंचा कर वहां पर राम मंदिर का निर्माण कराया गया है वहां पर मस्जिद ही बनना चाहिए । दोनों पक्षो में विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है । भारत देश में यह विवाद हिंदू एवं मुस्लिम समुदाय के लोगों में तकरीबन 80 से 100 साल पहले से चला आ रहा है जोकि कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है ।

कोर्ट के माध्यम से भी कई बार इस पर फैसले सुनाए गए परंतु एक समुदाय उस फैसले को ना मानकर आगे सुनवाई करने के लिए याचिका दायर कर देते हैं । इसी कारण से अयोध्या राम मंदिर विवाद कई सालों से चलता आ रहा है । हिंदू धर्म के लोगों को राम मंदिर के निर्माण का बहुत इंतजार है क्योंकि हिंदू धर्म के लोगों की आस्था राम मंदिर से जुड़ी हुई है क्योंकि राम भगवान  हिंदू धर्म में पूजनीय है , इष्ट देवता के रूप में राम भगवान को पूजा जाता है ।

इसलिए हिंदू धर्म के लोगों का कहना है की अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए । इसके लिए हिंदू धर्म के लोगों को जो भी करना पड़े करेंगे ।

राम मंदिर बनाने के पक्ष में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं भारतीय जनता पार्टी के द्वारा छेड़ा गया आंदोलन – 6 दिसंबर 1992 को हिंदू धर्म , आस्था , संस्कृति की रक्षा करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं भारतीय जनता पार्टी के द्वारा एक आंदोलन छेड़ा गया था । आंदोलन करने का सिर्फ भारतीय जनता पार्टी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक ही उद्देश्य था कि अयोध्या में प्राचीन समय में राम मंदिर था और अभी वहां पर राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए । यह हिंदू धर्म की आस्था की बात है ।

यदि वहां पर राम मंदिर नहीं बना तो हिंदू धर्म को काफी क्षति होगी , हिंदू धर्म की संस्कृति को नुकसान होगा । इसलिए वहां पर राम मंदिर ही बनना चाहिए । जब 6 दिसंबर 1992 को राम मंदिर पर विवाद हुआ तब विवाद में हिंदू धर्म के लोग भड़क उठे थे और उन्होंने वहां मस्जिद को क्षतिग्रस्त कर दिया था और वहां पर राम भगवान की मूर्ति की स्थापना कर दी थी । जब यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा था और इस आंदोलन में काफी लोगों की जान जा चुकी थी ।

दोनों समुदाय हिन्दू एवं मुस्लिम लड़ाई करने लगे थे और कई बेगुनाहों की जान चली गई थी । दंगे को देखते हुए सरकार के द्वारा दोनों समुदाय के ऊपर शक्ति से काम लिया गया था और यह मामला कोर्ट में पहुंच गया था । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना का सबसे बड़ा उद्देश्य अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए किया गया था और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं भारतीय जनता पार्टी दोनों ने मिलकर अयोध्या में राम मंदिर बनने का निर्णय लिया था और लोगों को एकत्रित करके राम मंदिर बनाने के लिए आंदोलन छेड़ा गया था ।

1528 को अयोध्या में राम जन्मभूमि एवं मस्जिद के निर्माण के लिए दोनों पक्षों के द्वारा सवाल जवाब कोर्ट में किए गए । हिंदू धर्म के वकील के द्वारा यह बताया गया था कि भारतीय हिंदू ग्रंथ रामायण एवं रामचरितमानस में भी ये बताया गया है कि अयोध्या में ही राम भगवान का जन्म हुआ था और अयोध्या में राम मंदिर ही बनना चाहिए ।

सन 1853 में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर को लेकर विवाद की स्थिति – 1853 में अयोध्या में हिंदू एवं मुस्लिम धर्म के लोगों के बीच में मंदिर मस्जिद को लेकर विवाद बहुत तेज गति से आगे बढ़ने लगा था । इस विवाद को जब ब्रिटिश सरकार ने देखा तो उसने इस विवाद को सुलझाने के के लिए फैसले लिए । सन 1859 में ब्रिटिश सरकार के माध्यम से दोनों समुदाय के लोगों को बातचीत के माध्यम से इस समस्या का समाधान निकालने को कहा गया था । परंतु दोनों समुदाय के लोग आपसी सहमति से इस समस्या का समाधान निकालने में असफल हुए थे ।

क्योंकि जब भी दोनों समुदाय इस मुद्दे पर बातचीत करने के लिए आमने सामने आते हैं तब दोनों समुदाय के बीच में दंगा फसाद होने लगता है । क्योंकि दोनों समुदाय एक दूसरे की बात नहीं सुनते हैं क्योंकि दोनों समुदाय के लोग अपने धर्म की रक्षा के लिए लड़ने , दंगा फसाद करने के लिए तैयार रहते हैं । उनको भारतीय कानून की किसी तरह की कोई भी फिकर नही है । जब दोनों समुदाय के द्वारा दंगे फसाद होते हैं तब निर्दोष लोगों की उस दंगे फसाद मे जान चली जाती है ।

सरकार ने इसको रोकने के लिए 1859 में दोनो समुदाय के पक्ष के लोगों को बुलाया गया और ब्रिटिश सरकार के द्वारा यह फैसला लिया गया था कि अंदर वाले हिस्से में मस्जिद एवं बाहर वाले हिस्से में हिंदू धर्म का मंदिर बनाया जाए । हिंदू एवं मुस्लिम समुदाय के लोग पूजा एवं नवाज पढ़ सकते हैं । परंतु दोनों समुदाय के लोगों ने ब्रिटिश सरकार के इस फैसले को नहीं माना और यह विवाद निरंतर बढ़ता चला गया जोकि आज तक नहीं सुलझ पाया है ।

1949 में अयोध्या में राम मंदिर  को लेकर विवाद की स्थिति  – अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो इसके लिए हिंदू धर्म के लोग काफी मेहनत कर रहे थे । हिंदू धर्म के लोगों के द्वारा आंदोलन किया जा रहा था और भारतीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं भारतीय जनता पार्टी दोनों ने मिलकर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर जंग छेड़ दी थी ।

1949 में राम मंदिर के निर्माण के लिए अयोध्या नगरी में रहने वाले हिंदू धर्म के लोगों ने वहां पर अंदर की तरफ भगवान राम की मूर्ति स्थापित कर दी थी । जिसके बाद दोनों पक्षों में विवाद छिड़ गया था । जब दोनों पक्षों में विवाद गहराने लगा था तब भारतीय सरकार के द्वारा वहां पर ताले लगा दिए गए थे और हिंदू एवं मुस्लिम धर्म के लोगों को किसी भी तरह का कोई भी दंगा फसाद ना करने के लिए सरकार के द्वारा कहा गया था ।

हिंदू धर्म के लोगों के द्वारा 1986 में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर एक याचिका जिला न्यायाधीश के समक्ष दायर की गई थी – जब सरकार के द्वारा 1949 के समय अयोध्या में राम मंदिर पर ताले लगा दिए थे तब हिंदू धर्म के लोगों के द्वारा जिला न्यायाधीश के समक्ष एक याचिका दायर की गई थी । जिसमें वहां पर हिंदू मंदिर बनाने की गुहार न्यायधीश के समक्ष पेश की गई थी । दोनों पक्षों को जिला न्यायाधीश के द्वारा बुलाया गया था । अदालत में दोनों पक्षों की बहस सुनी गई थथी ।

न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के सबूत गवाहों को देखकर एवं सुनकर यह फैसला लिया था कि वहां पर प्राचीन समय से राम मंदिर था इसीलिए हिंदू धर्म के लोगों के लिए वहां पर पूजा करने की अनुमति देना चाहिए और जो ताला लगाया गया था उसे सरकार के द्वारा फिर से खोल दिया गया था । इस तरह से मंदिर में हिंदू धर्म के लोगों को पूजा करने की अनुमति दे दी गई थी । इस निर्णय का विरोध मुस्लिम समुदाय के लोगों के द्वारा किया गया था ।

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस बात का विरोध जताने के लिए , व्यक्त करने के लिए मुस्लिम मस्जिद बाबरी एक्शन कमेटी का गठन मुस्लिम समुदाय के द्वारा किया गया था ।  मुस्लिम बाबरी मस्जिद कमेटी के द्वारा इस निर्णय का विरोध व्यक्त करने के लिए याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई थी और उस याचिका के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के लोगों ने यह कहा था कि यह मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ अन्याय है । यह फैसला एकतरफा लिया गया है ।

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया था ।

1989 में अयोध्या में राम मंदिर को लेकर एक और विवाद जुड़ा – 1989 में विश्व हिंदू परिषद के माध्यम से अयोध्या के विवादित क्षेत्र से जुड़ी हुई जमीन पर राम मंदिर बनने की मुहिम चलाई थी और पूरी तरह की तैयारी अयोध्या में राम मंदिर को लेकर कर ली गई थी । इस तरह से हिंदू एवं मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच में अयोध्या में राम मंदिर एवं मस्जिद बनाने के लिए दोनों समुदाय के लोग किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार थे । दोनों समुदाय के द्वारा हर तरह की कोशिश की जा रही है ।

इसीलिए पूरे देश में अयोध्या में स्थित राम मंदिर एवं मस्जिद बनने का विवाद गहराया हुआ है क्योंकि दोनों समुदाय के लोग यह चाहते हैं कि वहां पर उनके धर्म की जीत हो ।

अयोध्या के राम जन्मभूमि पर राम मंदिर को लेकर 1992 की स्थिति – अयोध्या में राम मंदिर बने इसके लिए हिंदू धर्म के लोग निरंतर काम करते रहते हैं और वह हर तरह से लड़ने के लिए तैयार रहते हैं । 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या के राम मंदिर के पास से बाबरी मस्जिद को नष्ट कर दिया गया था , तोड़ दिया गया था जिसके बाद  वहां पर  दंगे फसाद होना शुरू हो गए थे । यह दंगे बहुत तेज गति से बढ़ते चले गए थे । इन दंगों में बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी ।

इस दंगे में तकरीबन 1500 से 2000 लोगों की जान चली गई थी । अयोध्या में सरकार के द्वारा पुलिस फोर्स तैनात की गई थी । जिससे कि यह दंगा और आगे ना बड़े और सरकार के द्वारा इन दंगों पर लगाम लगा दी गई थी । काफी लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था क्योंकि 6 दिसंबर 1992 को मस्जिद के ढांचे को गिरा दिया गया था । वहां पर राम भगवान का अस्थाई मंदिर का निर्माण कर दिया गया था ।

अयोध्या में राम मंदिर को लेकर भारतीय कानून के द्वारा लिए गए फैसले Ram mandir ayodhya case – अयोध्या में हिंदू एवं मुस्लिम दोनों पक्षों के विवाद को सुलझाने के लिए भारतीय कानून के द्वारा 16 दिसंबर 1992 को लिब्रहान आयोग का गठन किया गया था । जिसका सिर्फ एक उद्देश्य था कि दोनों पक्षों का विवाद शांति पूर्वक सुलझ सके । इस विवाद को सुलझाने की पूरी जिम्मेदारी आंध्र प्रदेश के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश एम एस लिब्रहान को दी गई थी ।

लिब्रहान को इस आयोग का अध्यक्ष चुना गया था और भारत सरकार के द्वारा इस आयोग को यह कहा गया था कि इस मामले की पूरी रिपोर्ट 3 महीने में कोर्ट को देनी होगी । इस तरह से कोर्ट ने आयोग बनाकर इस मामले की पूरी जिम्मेदारी आयुक्त पर छोड़ दी थी । 16 मार्च 1993 को इस विवाद की पूरी जिम्मेदारी लिब्रहान आयोग को सौंप दी थी । परंतु इस विवाद को सुलझाने की पूरी रिपोर्ट अभी तक आयोग के द्वारा तैयार नहीं की गई है ।

तकरीबन 17 साल बीत चुके हैं और आयोग ने रिपोर्ट अभी तक अदालत  को नहीं सौंपी है । आयोग रिपोर्ट सौंपने में विफल रहा है ।

1993 मे अयोध्या में राम मंदिर की स्थिति – जब भारत की केंद्र सरकार ने सन 1993 में अयोध्या के राम जन्मभूमि पर अधिग्रहण किया तब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को चुनौती दी । परंतु सुप्रीम कोर्ट में चुनौती को खारिज कर दिया था । 1993 में राम जन्मभूमि की कमेटी ने केंद्र सरकार से राम जन्म भूमि की जमीन मांगी । परंतु केंद्र सरकार ने राम जन्मभूमि कमेटी की गुहार ठुकरा दी थी ।

इसके बाद राम जन्मभूमि कमेटी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की लेकिन 1997 को हाईकोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी थी । समय बीत जाने के बाद लिब्रहान आयोग ने 30 जून 2009 को तकरीर 700 पन्नों की एक रिपोर्ट तैयार की थी और इस रिपोर्ट को केंद्र की सरकार को सौंप दी थी । जिस समय लिब्रहान आयोग ने रिपोर्ट सौंपी उस समय भारत के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह एवं भारत के गृहमंत्री पी चिदंबरम थे ।

कई बार लिब्राहान कमेटी का कार्यकाल बढ़ाया गया था जिससे कि जल्द से जल्द इस विवाद को सुलझाया जा सके ।

सन 2010 में इलाहाबाद के उच्च न्यायालय में राम मंदिर जन्मभूमि विवाद की सुनवाई – अयोध्या के राम मंदिर विवाद को लेकर 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में खंडपीठ के द्वारा सुनवाई की गई थी और कुछ खंडपीठ के माध्यम से दोनों समुदाय के पक्षों की बात सुनने के बाद गवाहों को देखने के बाद यह निर्णय लिया गया था कि विवादित जन्म भूमि पर राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए और उस विवादित स्थान को राम जन्मभूमि घोषित कर दिया गया था ।

अयोध्या के राम जन्मभूमि पर निर्मोही अखाड़ा – न्यायालय के द्वारा कई फैसले अयोध्या के राम मंदिर को लेकर किए गए जब न्यायालय ने यह फैसला सुनाया कि राम जन्मभूमि पर ही राम भगवान का जन्म हुआ है इसलिए वहां पर राम मंदिर बनना चाहिए । राम जन्मभूमि घोषित भी न्यायालय के द्वारा की गई थी । इसके बाद निर्मोही अखाड़े ने न्यायालय में अपने अधिकार होने  की याचिका दायर की थी तब न्यायालय ने सबूत देखकर फरियादी की बात सुनकर यह फैसला सुनाया था कि राम चबूतरा एवं सीता रसोई पर निर्मोही अखाड़ा का कब्जा रहेगा ।

विवादित स्थान पर एक तिहाई हिस्सा नमाज पढ़ने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों को देने का फैसला किया गया था । हिंदू एवं मुस्लिम समुदाय के लोगो ने , दोनों समुदाय के लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय में जाने का फैसला किया था और वहां पर एक याचिका दायर की थी । सर्वोच्च न्यायालय में 7 से 8 वर्षों तक विवाद चलता रहा इस तरह से अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर कई विवाद होते रहे ।

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा यह फैसला लिया गया था कि 11 अगस्त 2017 के बाद से तीन मुख्य न्यायाधीशों की पीठ के द्वारा इस विवाद पर प्रतिदिन सुनवाई की जाएगी । जब कोर्ट के माध्यम से कुछ फैसला लिया गया तब मुस्लिम समुदाय के सिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की कि उनके साथ सुनवाई में भेदभाव या पक्षपात किया गया।

इस तरह से अयोध्या के राम मंदिर पर हिंदू मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच में विवाद चल रहा है और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की एक खंडपीठ के माध्यम से इस विवाद पर सुनवाई प्रतिदिन की जाने का निर्णय भी सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से लिया गया था । इसके बाद हिंदू एवं मुस्लिम दोनों पक्ष के लोगों को अपने अपने गवाह सबूत पेश करने के लिए कहां गया था क्योंकि सुप्रीम कोर्ट भी यह चाहती है कि अयोध्या में राम मंदिर को लेकर जो विवाद है उस विवाद को जल्द से जल्द सुलझाया जाए ।

जिससे कि देश में सुख शांति हो और किसी तरह का कोई भी विवाद की स्थिति पैदा ना हो जिससे कि दंगे फसाद देश में ना हो ।

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