अनुभूति पर निबंध Anubhuti essay in hindi

Anubhuti essay in hindi

Anubhuti – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से अनुभूति पर लिखे निबंध के बारे में बताने जा रहे हैं । तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़कर अनुभूति पर लिखे निबंध के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Anubhuti essay in hindi
Anubhuti essay in hindi

अनुभूति बारे में –  अनुभूति एक प्रकार से व्यक्ति का एहसास होता है जो वह महसूस करता है । जब व्यक्ति एहसास से अनुभूति का अहसास शारीरिक रूप से करता है । व्यक्ति अनुभूति का एहसास दृष्टि , स्पर्श , सुनकर या गंध सूंघकर कर सकता है । इसके बाद जो विचार उसके मन में उत्पन्न होते हैं उसे हम अनुभूति कहते हैं । हमारे कहने का तात्पर्य यह है कि व्यक्ति की भावनाओं से उत्पन्न होने वाले विचार ही अनुभूति कहलाती है । अनुभूति के बारे में यह कहा जाता है कि किसी व्यक्ति में अनुभव से ही अनुभूति का उदय होता है । वह व्यक्ति जो पांच इंद्रियों मन एवं बुद्धि के माध्यम से जो अनुभव प्राप्त करता है वह अनुभूति कहलाता है ।

उदाहरण के तौर पर मैं आपको बता देना चाहता हूं कि अनुभव क्या होता है ? अनुभूति का उदाहरण जैसे कि मुझे मटर पनीर की सब्जी खाना बहुत पसंद है । तो यह मेरा अनुभव है । मैं अपने बच्चे से बहुत प्रेम करता हूं और उससे प्रेम करने की चेष्टा करता हूं तो यह मेरा अनुभव है । व्यक्ति के अंदर पांच इंद्रियों मन एवं बुद्धि  से अनुभूति होती हैं । मनुष्य का एहसास जब अनुभूति में परिवर्तित हो जाता है तब अनुभूति की उत्पत्ति होती है । जब कोई व्यक्ति पांच इंद्रियों मन एवं बुद्धि से ऐसी घटना के बारे एहसास करें जो घटना होती ही नहीं है तब मनुष्य के द्वारा अनुभूति जागृत होती है ।

उदाहरण के तौर पर मैं आपको समझा देना चाहता हूं कि यदि मैं चंदन की अनुपस्थिति में चंदन की सुगंध महसूस करता हूं तो यह मेरे द्वारा उत्पन्न की गई अनुभूति होती है । यदि  मुझे मिठाई पसंद है और मैं मिठाई के बारे में सोच रहा हूं और यह महसूस कर रहा हूं कि मैं अच्छी-अच्छी मिठाइयां खा रहा हूं तो यह मेरी अनुभूति है कि मैं मिठाई की अनुपस्थिति में ही मिठाई का स्वाद महसूस कर रहा हूं । ऐसे कई उदाहरण अनुभूति के देखने को मिल जाते हैं । कई बार कुछ लोग भूत के ना होने पर भी भूत की उपस्थिति की अनुभूति कर लेते हैं जिसके कारण उनके अंदर भय उत्पन्न हो जाता है और वह डर जाता हैं ।

अनुभूति ही मनुष्य के द्वारा उत्पन्न की जाती है । मनुष्य के अनुभूति  इंद्रियों मन बुद्धि के माध्यम से जागृत होती है ।अनुभूति के बारे में मैं आपको बता देना चाहता हूं कि जैसे-जैसे हमारा आध्यात्मिक स्तर बढ़ता जाता है वैसे वैसे ही हमारे अंदर अनुभूति का स्तर बढ़ता जाता है और हम अनुभूति का अनुभव करते हैं । यदि हमारे अंदर आध्यात्मिक स्तर बढ़ता है तो अनुभूति भी हमें कई तरह की होने लगती हैं । हमारा कहने का तात्पर्य यह है कि आध्यात्मिक स्तर के बढ़ने पर ही अनुभूति उत्पन्न होती है । एक बार मैं रात में सो रहा था और मैं यह अनुभूति कर रहा था कि मैं ट्रेन में चल रहा हूं और दिल्ली शहर में पहुंचने वाला हूं ।

दिल्ली शहर में जाना मेरी अनुभूति है ।जबकि में सो रहा होता हूं परंतु मैं अनुभूति कर रहा हूं कि मैं दिल्ली में पहुंचने वाला हूं । यदि मुझे सुंदर रंग-बिरंगे कपड़े पहनना पसंद है और मैं मन ही मन मे यह सोच रहा हूं कि वह सुंदर रंग-बिरंगे कपड़े मेरे पास है और मैं उन कपड़ों को पहनने वाला हूं तो कपड़ों की अनुपस्थिति में कपड़े की अनुभूति मुझे हो रही है । यह मन बुद्धि और इंद्रियों से उत्पन्न अनुभूति है । जो ना होने पर भी होने का दावा कर रही है । अनुभूति एक ऐसी क्रिया है जिस क्रिया से व्यक्ति उस स्थिति का अनुभव करता है जो स्थिति उस समय होती ही नहीं है ।

किसी व्यक्ति से झगड़ा होता है झगड़ा होने के बाद जब कोई व्यक्ति यह सोचता है कि मैंने अपने दुश्मन को मात दे दी जबकि वह उस व्यक्ति से दूर रहता है । परंतु मन बुद्धि और इंद्रियों के कारण उसके अंदर यह अनुभूति होती है कि उसने अपने शत्रु को हरा दिया है  यह अनुभूति होती है । जो मनुष्य अनुभव करता है , एहसास करता है । यदि किसी व्यक्ति का बच्चा विदेश में पड़ रहा है और वह अपने देश में ही रहकर अपने बच्चे को प्यार करने का एहसास  करता है तो वह अनुभूति होती है । जो अपने बच्चे से प्रेम करते समय यह सोचता है कि उनका बच्चा उनके पास में ही बैठा हुआ है और वह अपने बच्चे से प्यार कर रहे हैं तो इस तरह की अनुभूति मनुष्य के अंदर जागृत होती है । मनुष्य के एहसास से अनुभूति की उत्पत्ति होती है ।

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