आंगनबाड़ी पर निबंध Anganwadi essay in hindi

Anganwadi essay in hindi

Anganwadi – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से आंगनबाड़ी पर लिखे निबंध के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और आंगनवाड़ी पर लिखे निबंध के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Anganwadi essay in hindi
Anganwadi essay in hindi

Image source – https://en.m.wikipedia.org/wiki/Anganwadi

आंगनबाड़ी के बारे में – हमारे भारत देश में आंगनबाड़ी का गठन भारत देश के बच्चों की देेेहभाल , सुरक्षा और गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए खोली गई है । देश में आंगनवाड़ी का गठन करने का सिर्फ एक ही उद्देश्य था कि जो बच्चे जन्म के दौरान किसी बीमारी से ग्रसित होते हैं तब उन बच्चों को आंगनवाड़ी के द्वारा उचित स्वास्थ्य व्यवस्थाएं प्रदान की जाएं । आंगनवाड़ी का गठन हमारे भारत देश में 1975 में किया गया था और आज यह सुविधा भारत के सभी गांवों एवं जिलों में है । आंगनबाड़ी में महिलाओं को कार्यकर्ताओं के रूप में रखा गया है ।

आंगनवाड़ी में महिलाओं को ट्रेनिंग देकर बच्चों की देखभाल , गर्भवती महिलाओं की देखभाल करने के बारे में बताया जाता है क्योंकि छोटे बच्चे हमारे देश के भविष्य होते हैं । कुछ सालों पहले हमारे भारत देश में पोलियो से ग्रसित बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा थी । जब से भारत देश में आंगनवाड़ी का गठन किया गया है तब से भारत देश में से पोलियो से ग्रसित बच्चों की संख्या में कमी आई है । यदि हम आंगनवाड़ी की महत्वता के बारे में बात करें तो आंगनबाड़ी की आवश्यकता देश में बहुत हैं क्योंकि जब तक हमारे देश के बच्चे  स्वस्थ , रोग मुक्त नहीं होंगे तब तक हमारे देश का विकास नहीं हो सकता है ।

आंगनवाड़ी का शाब्दिक अर्थ होता है आंगन आश्रय । यह नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि आंगनबाड़ी में गर्भवती महिलाओं को , छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल एवं उनके पोषण की शिक्षा प्रदान की जाती है । बच्चों को आंगनबाड़ी के माध्यम से पोस्टिक आहार वितरित किया जाता है । गर्भवती महिलाओं को किस तरह से अपनी देखभाल करना चाहिए और गर्भवती महिला को भोजन में क्या क्या खाना चाहिए यह शिक्षा आंगनवाड़ी में दी जाती है ।

आंगनबाड़ी में काम करने वाली  कार्यकर्ताओं के बारे में – भारत देश में आंगनबाड़ी केंद्रों पर काम करने वाली महिलाओं को इसलिए रखा गया है क्योंकि एक महिला ही दूसरी महिला एवं बच्चों की परेशानी को समझ सकती है । आंगनवाड़ी का मुख्य उद्देश्य है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता  एक मां की तरह बच्चों के स्वास्थ्य की देखरेख करें और गर्भवती महिलाओं को उनके खाने-पीने के बारे में शिक्षा दे सके । भारत देश में बच्चों को अच्छा जीवन मिले , गर्भवती महिला कमजोरी का शिकार ना हो इसके लिए लाखों करोड़ों बच्चों , गर्भवती महिलाओं की देखरेख के लिए महिला आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का गठन किया गया है ।

आंगनबाड़ियों का कामकाज महिला बाल विकास मंत्रालय देखता है और सभी आंगनबाड़ियों को किस तरह से मजबूत बनाया जाए इसके विषय में भारत देश की सरकार के द्वारा अधिकतर यह प्रयास किए जाते हैं की देश की आंगनबाड़ियों में सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर देश की महिलाओं , बच्चों का ध्यान रखें , उनके पोषक तत्व की देखरेख करें । जब से भारत देश में आंगनबाड़ियों का गठन किया गया है तब से भारत देश के गांवों में रहने वाले लोगों को काफी लाभ प्राप्त हुआ है । पहले गांव में रहने वाले बच्चे को पोस्टिक आहार नहीं मिल पाता था जिसके कारण वह बच्चा बीमारी का शिकार हो जाता था ।

परंतु जब से गांव में आंगनबाड़ियों का गठन हुआ है तब से बच्चों को समय के अनुसार पोस्टिक आहार आंगनवाड़ियों के माध्यम से वितरित किया जाता है । भारत सरकार से कई योजनाएं गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए प्रारंभ की गई है । आंगनबाड़ी में कार्यकर्ता पूरी मेहनत और लगन से काम करती हैं । उनके काम की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है । सभी आंगनबाड़ियों में सुबह के समय सभी बच्चे आते हैं और उन बच्चों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से उचित शिक्षा दी जाती है , प्रारंभिक शिक्षा दी जाती है और उनके भविष्य को उज्जवल बनाने की कोशिश की जाती है ।

जिस तरह से बच्चा थोड़ा चलना सीख जाता है और शिक्षा प्राप्त करने लगता है उसी तरह से आंगनबाड़ी मे भी बच्चे को उठना , बैठना , पढ़ना लिखना , खाना-पीना सिखाया जाता है । आंगनबाड़ी में काम करने वाली सभी कार्यकर्ता छोटे-छोटे बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाने के लिए घर घर जाती हैं और बच्चों को पोलियो की दवाई पिलाती हैं । यह अभियान भारत देश में काफी समय से चल रहा है क्योंकि भारत देश में कई बच्चे पोलियो के शिकार हो चुके हैं । जिसके कारण कोई का जीवन बर्बाद हो गया है ।

पोलियो की बीमारी की रोकथाम के लिए पोलियो मुक्त भारत अभियान चलाया गया और आज सरकार के अथक प्रयासों से , आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के अथक प्रयासों से पोलियो धीरे-धीरे नष्ट होता जा रहा है क्योंकि पोलियो की बीमारी बच्चों को कमजोर बना देती थी । अब बच्चों को उनकी छोटी उम्र में ही पोलियो की दो बूंद पिला दी जाती है । बच्चों को  पोस्टिक आहार आंगनबाड़ियों के माध्यम से दिया जाता है । आंगनबाड़ी में काम करने वाली कार्यकर्ता का सबसे बड़ा दायित्व होता है कि वह कार्यकर्ता अपने आसपास रहने वाली गर्भवती महिलाओं की देखरेख , बच्चों की देखरेख एवं प्रसव पूर्व देखभाल सुनिश्चित रूप से करें ।

जो कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं और शिशु की देखभाल अच्छी तरह से करती है वह देश के होनहार बच्चों को नया जीवन देने का काम करती है क्योंकि यही बच्चे आने वाले देश के भविष्य होते हैं ।

आंगनबाड़ी के द्वारा की जाने वाले टीकाकरण के बारे में – आंगनबाड़ी के द्वारा गर्भवती महिलाओं को टीका लगाया जाता है । जिससे कि बच्चा और उसकी मां दोनों प्रसव के दौरान स्वस्थ रहें । इसके बाद जब गर्भवती महिला बच्चे को जन्म देती है और जब बच्चे की उम्र 6 वर्ष से कम की होती है तब आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से टीकाकरण बच्चे का किया जाता है । आंगनवाड़ी के माध्यम से गर्भवती महिला का टीकाकरण इसलिए किया जाता है क्योंकि प्रसव के दौरान बच्चे की मां काफी कमजोर होती है और वह अपने बच्चे को भी कमजोर कर देती है ।

जब गर्भवती महिलाओं को टीका लगाया जाता है तब वह अपने शरीर को स्वस्थ और मजबूत महसूस करती है और छोटे बच्चे को भी अपनी मां के द्वारा पोस्टिक आहार , प्रोटींस , मिनरल्स , विटामिंस मां के दूध के माध्यम से प्राप्त होते हैं ।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के द्वारा किए जाने वाले अहम कार्यों के बारे में – आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के द्वारा गर्भनिरोधक की शिक्षा महिलाओं को दी जाती है ।आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से आपूर्ति पोषण शिक्षा अनुपूरक के बारे में सभी महिलाओं को एकत्रित करके शिक्षा दी जाती है । पूर्व विद्यालयों की गतिविधियों के बारे में भी आंगनबाड़ी में समझाया जाता है । यदि हम आंगनबाड़ियों की संख्या के बारे में बात करें तो भारत देश के बच्चों की और गर्भवती महिलाओं की रक्षा , सुरक्षा के लिए 31 जनवरी 2013 तक देश के गांव जिलों में तकरीबन 1300000 आंगनबाड़ी एवं मिनी आंगनवाड़ी केंद्र खोल दिए गए हैं ।

जो आंगनबाड़ियों ए डब्ल्यू सी एवं मिनी ए डब्ल्यू सी से परिचालित हैं । सबसे ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार दिया जाता है । पोषण स्वास्थ्य और शिक्षा यह तीन ऐसे मुख्य काम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से किया जाता है जिन कामों की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है । आंगनवाड़ी के माध्यम से यह सभी सेवाएं रेफरल सेवा के एवं सिविल सेवा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों से सहायता प्राप्त करके सभी गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को इन सभी सुविधाओं का लाभ दिया जाता है ।

आंगनबाड़ी के माध्यम से  लिखित रूप में गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चों के स्वास्थ्य और चिकित्सा की जांच की निगरानी बहुत अच्छी तरह से की जाती है । आंगनबाड़ियों में काम करने वाली कार्यकर्ता छोटे बच्चों के लिए एक शिक्षक की भूमिका भी अदा करती है ।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दी जाने वाली जिम्मेदारियों के बारे में – आंगनबाड़ी केंद्र में जो भी महिला एक कार्यकर्ता के रूप में काम करती है । उन सभी कार्यकर्ताओं को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा  आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दिशा निर्देश निर्धारित किया जाता है । बाल विकास मंत्रालय के द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सभी परिवारों को नियंत्रण रुप से त्वरित सर्वेक्षण करने की जिम्मेदारी भी दी जाती है । महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पूर्व स्कूल की गतिविधियों का आयोजन करने एवं जो महिला गर्भवती होती है उस महिला को स्तनपान कराने के बारे में बताने की जिम्मेदारी भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को दी जाती है ।

आंगनबाड़ी की सभी कार्यकर्ताओं को छोटे बच्चों को सही समय पर पोलियो की दवा पिलाने की जिम्मेदारी भी दी जाती है ।छोटे बच्चों को पोषण आहार एवं शिक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दी जाती है ।आंगनबाड़ी की सभी कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देकर भारत में यह अभियान चलाने की जिम्मेदारी भी दी जाती है कि वह घर घर जाकर परिवार नियोजन के बारे में लोगों को समझाएं , घर घर जाकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चे के माता-पिता को इस बारे में समझाते हैं कि वह बच्चे का विकास किस तरह से कर सकते हैं और बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए किस तरह का भोजन देना चाहिए ।

भारत सरकार के द्वारा हाल ही में किशोरी शक्ति योजना का शिलान्यास किया गया है और किशोरी शक्ति योजना की सभी जिम्मेदारियां आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दी गई है ।आंगनबाड़ी केंद्रों के द्वारा सभी कार्यकर्ता सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम आदि को आयोजन करते हैं जिसके माध्यम से किशोर अवस्था की सभी लड़कियों को एवं उन सभी लड़कियों के माता-पिता को शिक्षित करने की जिम्मेदारी भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को दी गई है । भारत देश में जो बच्चे विकलांग हैं उन सभी बच्चों की खोज करके उन सभी बच्चों को एक पहचान भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के द्वारा दी जाती है ।

इस तरह से भारत सरकार के द्वारा कई जिम्मेदारियां आंगनवाड़ी केंद्रों को दी गई हैं ।जब किसी महिला की डिलीवरी होती है तब उस महिला को सरकार के द्वारा पोषक आहार एवं प्रोटीन मिनरल्स विटामिंस जैसे फल फ्रूट खाने के लिए आंगनवाड़ी के केंद्रों के द्वारा पैसा भी दिया जाता है जिससे वह महिला अपने शरीर को शक्ति प्रदान करने के लिए अच्छे-अच्छे व्यंजन का सेवन कर सके । हमारे भारत देश में जब से आंगनवाड़ी केंद्रों में कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ी है तब से कई गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं के द्वारा सहायता मिली है ।

आंगनवाड़ी केंद्रों में सभी बच्चों के माता-पिता को यह शिक्षा दी जाती है कि  किस उम्र में बच्चे का कितना वजन होना चाहिए यदि उम्र के हिसाब से किसी बच्चे का वजन कम है तो उस बच्चे को आंगनवाड़ी के द्वारा प्रोटीन की गोलियां दी जाती हैं और टीकाकरण भी किया जाता है । यह सभी कार्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के द्वारा किए जाते है ।

आंगनबाड़ियों की योजनाओं के बारे में –  आंगनबाड़ी के माध्यम से कई योजनाओं का लाभ गर्भवती महिलाओं और शिशु को दिया जाता है । आंगनबाड़ी की योजनाओं के माध्यम से 6 वर्ष की आयु के तकरीबन आठ करोड़ बच्चों को लाभ दिया जाता है ।जब बच्चे की उम्र 3 वर्ष की होती है तब बच्चे और उसकी मां को आंगनवाड़ी केंद्र के माध्यम से टीकाकरण और बच्चे और बच्चे की मां के स्वास्थ्य की जांच का जिम्मा भी आंगनबाड़ी के ऊपर होता है । यही योजना सबसे महत्वपूर्ण योजना है जिस योजना को सफल बनाने के लिए  केंद्र सरकार पैसा खर्च करती है ।

केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकार भी इस योजना में पैसा खर्च करती है । सबसे अधिक पैसा केंद्र सरकार इस योजना में लगाती है जिससे कि बच्चे और मां के स्वास्थ्य को स्वस्थ रखा जा सके । इस योजना का शुभारंभ तकरीबन 1985 के समय किया गया था और इस योजना में भारत देश के सभी राज्यों की सरकारों ने 2010 में अपना योगदान देने की घोषणा की थी । जिसमें राज्य की सभी सरकारें इस योजना के तहत सभी बच्चे और माता को जांच की सुविधा प्रदान करती है ।

बाल विकास विभाग के द्वारा नवजात शिशु के स्वास्थ्य के लिए नवजात शिशु की मां और उसके परिवार को शिक्षित करने के लिए यह निर्णय लिया गया था कि हर महीने की 5 तारीख को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बचपन दिवस मनाया जाएगा जिसमें नवजात शिशु की मां को और उसके बच्चे को शामिल किया जाता है । इस फैसले का शुभारंभ बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के द्वारा किया गया था ।  बचपन दिवस हर प्रति माह की 5 तारीख को केक काटकर मनाया जाता है । जिसके बाद वहां पर बच्चे की मां को किस तरह का भोजन करना चाहिए यह भी शिक्षा दी जाती है ।

बच्चे की मां को खान पान के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है और बताया जाता है कि बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य के लिए बच्चे की मां को भी स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है और बच्चे की मां जब स्वस्थ रहेगी तब वह पोस्टिक आहार ग्रहण करें । बच्चे की मां को अपने बच्चे के स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए मौसमी फल , हरी पत्तेदार सब्जी का सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए ।जिन हरी सब्जियों से बच्चे की मां को पोस्टिक आहार प्राप्त होंगे और मां के दूध के माध्यम से बच्चे को वह प्रोटीन मिनरल्स विटामिन प्राप्त होंगे और बच्चे की मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहेंगे ।

आंगनबाड़ी की कई योजनाओं में किए गए बदलाव के बारे में – जब भारत देश में आंगनबाड़ी की आवश्यकता को महसूस किया गया था तब भारत देश की सरकारों के माध्यम से कई योजनाएं प्रारंभ की गई थी और उन सभी योजनाओं के द्वारा नवजात शिशु और उनकी मां को लाभान्वित करने के लिए आंगनवाड़ी का शुभारंभ किया गया था । जिसका लाभ कई गर्भवती महिलाओं को प्राप्त हुआ है । इस योजना के तहत भारत सरकार की ओर से 18681 करोड रुपए खर्च करने का विचार बनाया था । जो कई समय तक चलता रहा ।

जब समय बीत जाने के बाद वित्तीय वर्ष में इस योजना के बजट को घटाकर 8335 करोड रुपए कर दिया गया था तब भारत देश की सभी आंगनबाड़ियों को कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ा है । वित्तीय बजट की कमी के कारण आंगनवाड़ी में उचित सुविधा का अभाव देखा गया है । जब आंगनवाड़ी को और भी मजबूत करने का विचार सरकार के द्वारा बनाया गया था तब केंद्र की सरकार के द्वारा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना प्रारंभ की गई थी । जिस योजना के तहत गर्भवती महिला को उसके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए ₹5000 दिए जाते हैं ।

यह ₹5000 गर्भवती महिला को बच्चे के जन्म के बाद प्राप्त होते हैं । जब गर्भवती महिला टीकाकरण कराती है तब विभाग की ओर से यह पैसे तीन चरणों में गर्भवती महिला को दिए जाते हैं । जब प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना प्रारंभ की गई थी तब सभी आंगनबाड़ियों की कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण भी दिया गया था कि वह गर्भवती महिला को इस योजना का लाभ किस तरह से दिला सकती है । प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का शुभारंभ 1 जनवरी 2017 को प्रारंभ किया गया था ।

इस योजना के तहत जो महिला 1 जनवरी 2017 के बाद पहली बार गर्भवती हुई है उस महिला को इस योजना का लाभ प्राप्त हो सकता है । इसके बाद गर्भवती महिला को प्रसव पूर्ण हो जाने के बाद उस गर्भवती महिला को चिकित्सा विभाग की ओर से 1400 रुपए दिए जाते है । यह 1400 रुपए जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिला को दिए जाते हैं । जिससे कि वह गर्भवती महिला अपने खान-पान को अच्छी तरह से ग्रहण कर सके , अपना और अपने बच्चे के स्वास्थ्य को स्वस्थ रख सकें ।

इस योजना के प्रारंभ होने के बाद कई गर्भवती महिलाओं को इस योजना का लाभ मिला है ।

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