यदि मैं समाज सेवक होता yadi main samaj sevak hota essay in hindi

yadi mein samaj sevak hota in hindi language

मैं कभी-कभी यह सोचता हूं कि यदि मैं समाज सेवक होता तो मैं किस तरह से समाज को बदलने की कोशिश करता । हमारे देश भारत में कई ऐसे समाज सेवकों के बारे में मैं पढ़ चुका हूं और पढ़ने के बाद मुझे यह महसूस होता है कि मैं भी एक अच्छा समाज सेवक होता तो समाज को बदलने में मेरी भी भूमिका होती । मुझे भी लोग जानते ,पहचानते । मैं कभी कभी यह सोचता हूं कि मैं भी समाज सेवक बनकर लोगों की मदद करूं।

yadi mein samaj sevak hota in hindi language
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मैं कभी-कभी यह सोचता हूं कि यदि मैं समाज सेवक होता तो सबसे पहले मैं समाज में जो कमियां हैं उन कमियों को दूर करता और समाज को ऊंचाइयों पर पहुंचाने के काम भी करता । हमारे समाज में जो गरीब लोग हैं उनको किस तरह से तरक्की के रास्ते पर लाया जाए इसके बारे में सोचता और उनकी मदद करता । मैं ऐसे परिवार के लोगों की मदद करता जिनके परिवार में लड़कियां हैं और उनके पास उनकी शादी करने के लिए पैसे नहीं है तो मैं अपने समाज के माध्यम से और अपने माध्यम से उन लोगों की मदद करता । मैं यह भी सोचता हूं कि यदि मैं समाज सेवक होता तो सबसे पहले अपने आप को बदलता और मैं अपने अंदर यह बदलाव लाता कि मुझे दूसरों के लिए कुछ करना है , दूसरों को आगे बढ़ाना है , अपनी समाज को बदलना है। मेरी समाज के अंदर जो बुराइयां हैं उनको दूर करना है तब मुझे सुकून मिलेगा।

मैं कभी-कभी यह सोचता हूं कि यदि मैं समाज सेवक बन जाऊं तो सबसे पहले देश के युवाओं को बदलने की कोशिश करूंगा । मैं उनके अंदर जो गलत भावना है उनको खत्म करने की कोशिश करूंगा । मैं युवाओं मैं लड़कियों की इज्जत करने की सोच पैदा करूंगा। मैं यदि समाज सेवक बन गया तो सबसे पहले मैं समाज के लोगों से यही कहूंगा कि सभी अपने घर की लड़कियों को शिक्षा दिलाएं और उनको किसी भी फील्ड में आने जाने से ना रोका जाए वह कुछ भी कर सकती हैं । मैं यदि समाज सेवक बन गया होता तो अपने देश को एक नई सोच के साथ अपना योगदान देता । मैं अपने आप के साथ साथ समाज को भी बदलने की कोशिश करता ।

यदि मैं समाज सेवक बन गया तो सबसे पहले मैं ऐसे गरीब परिवार की सहायता करूंगा जिसके घर में कोई व्यक्ति बहुत गंभीर बीमारी से पीड़ित है और उसके पास इलाज कराने के लिए पैसे नहीं है तो मैं सरकार के द्वारा उनको सहायता दिला कर और समाज से सहायता दिला कर उस व्यक्ति की मदद करूंगा । मैं ऐसे लोगों की सोच मैं बदलाव लाऊंगा जिसके अंदर दया भाव की भावना ही नहीं है क्योंकि मैं जानता हूं कि जब हमारे समाज के अंदर दया भाव की भावना आएगी तब हमारा देश और समाज विकास की ओर पहुंच पाएगा । हमारे अंदर जो बुराइयां हैं हम को उन बुराइयों को बदलने की जरूरत है जब जाकर हम समाज और देश को बदल पाएंगे ।

यदि मैं समाज सेवक बन जाऊं तो मैं समाज के हर व्यक्ति को एक साथ लेकर के चलूंगा और हमारे समाज में जो बुराइयां हैं उन बुराइयों को दूर करने की कोशिश करूंगा । मैं उन लोगों की सहायता करूंगा जो असहाय हैं , वह दुखों से पीड़ित हैं। मैं समाज के साथ मिलकर उन लोगों की मदद करूंगा और समाज के साथ-साथ देश के हर उस परिवार को सहारा दूंगा जो गरीब और असहाय हैं । तब जाकर मैं एक अच्छा समाज सेवक बन पाऊंगा । मैं जब ऐसे समाज सेवकों के बारे में पढ़ता हूं जिन्होंने समाज के लिए अपना पूरा जीवन बिता दिया था मुझे बड़ी खुशी होती है कि हमारे देश में ऐसे समाज सेवक जन्म लेते हैं । मैं जरूर समाज सेवक बनके अपने समाज की बुराइयों को दूर करने में सफल रहूंगा ।

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