सविनय अवज्ञा आंदोलन पर निबंध savinay avagya andolan in hindi

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दोस्तों आज मैं आप सभी को हमारे भारत को स्वतंत्र कराने के लिए जो सविनय अवज्ञा आंदोलन किया गया था उसके बारे में बताने जा रहा हूं । इस आंदोलन में हमारे देश के कई लोगों ने हिस्सा लिया था । इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए हमारे देश के महान नेता महात्मा गांधी जी के द्वारा इस आंदोलन को प्रारंभ गया था । इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य था कि हमारे देश को पूर्ण रूप से स्वतंत्रता प्रदान की जाए। अंग्रेजो के द्वारा हमारे देश के गरीब किसानों और गरीब जनता के ऊपर जो अत्याचार किए जा रहे थे । उनके खिलाफ आवाज उठाने के लिए यह आंदोलन प्रारंभ किया गया था । चलिए जानते हैं सविनय अवज्ञा आंदोलन कैसे सफल हुआ था।

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image source- http://hindipatrika.in

सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत 6 अप्रैल 1930 को महात्मा गांधी जी के द्वारा हुई थी । साइमन कमीशन को जिस तरह से भारत में लाया गया था। लोगों के मन में अनेक तरह के सवाल आ रहे थे कि यह हमारे देश को लूटने की साजिश है । देश के लोगों ने इसका बहिष्कार भी किया था । जनता के बहिष्कार को देख कर महात्मा गांधी जी ने यह सोचा कि अब समय आ गया है कि हम सभी आंदोलन करें । महात्मा गांधी जी एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कई नेताओं एवं स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत को पूर्ण रूप से स्वतंत्रता दिलाने के लिए लाहौर अधिवेशन में आंदोलन करने की घोषणा कर दी थी । उन्होंने उस अधिवेशन में यह कहा था कि अब हम सभी नागरिकों का लक्ष्य है । भारत को पूर्ण रूप से स्वतंत्रता दिलाना। हम सभी नागरिकों को अंग्रेजो के द्वारा किए गए अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना चाहिए । महात्मा गांधी जी ने इस आंदोलन को जोर देने के लिए 6 अप्रैल 1930 को सविनय अवज्ञा आंदोलन को प्रारंभ किया और नागरिकों को भी इसके बारे में बताया कि हमें इस आंदोलन में अंग्रेजो के खिलाफ किस तरह से आवाज उठानी है ।

महात्मा गांधी जी ने नागरिकों को बताया कि हमें अंग्रेजों के द्वारा दी गई नौकरियों को त्यागना चाहिए, विदेशी कपड़े एवं सामान का बहिष्कार करना चाहिए और अंग्रेजों की सरकार के द्वारा जो नमक पर कर लगाया गया है उसका भी विरोध करना चाहिए । सभी ने महात्मा गांधी जी की इन बातों को माना महात्मा गांधी जी ने देश की महिलाओं से भी कहा था की आप लोग अंग्रेजो के द्वारा बनाई गई शराब की दुकानों पर धरना दीजिए । क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने हमारे भारत के वरिष्ठ नेता मोतीलाल नेहरू ने जो रिपोर्ट भेजी थी उसको ब्रिटिश सरकार ने अस्वीकार कर दिया जिसके कारण हम सभी को आज आंदोलन करने की आवश्यकता पड़ी है । अंग्रेजों ने हमारे साथ जो वादे किए थे वह वादे निभाने से पीछे हट रहे हैं अब हमें उनका विरोध करने की आवश्यकता है । लोगों ने उनकी इस बात को गंभीरता से लिया और सभी नागरिक अंग्रेजों से असंतोष जता रहे थे । सभी भारत के नागरिकों ने इस आंदोलन में भाग लेने का फैसला भी लिया था ।

इस आंदोलन को और भी मजबूत करने के लिए महात्मा गांधी जी ने 12 मार्च को दांडी यात्रा प्रारंभ की थी । इस यात्रा में गांधी जी के साथ कांग्रेस के 78 नेता चल पड़े थे । जब उनकी यह यात्रा निकली तो कई जगहों से होती हुई दांडी की ओर जा रही थी रास्ते में उनका साथ देने के लिए भारत के कई नागरिक एकत्रित होते गए । देखते ही देखते इस आंदोलन में महात्मा गांधी जी के साथ बहुत सारे लोग जुड़ चुके थे। इस आंदोलन में यात्रा करते हुए 5 अप्रैल को दांडी पहुंचे और उन्होंने नमक बनाया । इसके माध्यम से अंग्रेजों से कहा कि अब हम नमक पर कर अदा नहीं करेंगे । अब हमारे देश को स्वतंत्रता चाहिए इस आंदोलन के बाद देश के 60,000 नागरिकों को अंग्रेजो के द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था । 5 मई को गांधी जी और उनके अन्य साथियों को भी अंग्रेजो के द्वारा गिरफ्तार किया गया था ।

उनकी गिरफ्तारी के बाद भी यह आंदोलन खत्म नहीं हुआ । देश के कई नागरिकों के द्वारा यह आंदोलन चलाया गया । जिसका उद्देश्य था हमारे देश को पूर्ण रूप से स्वतंत्रता दिलाना । महात्मा गांधी जी की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने भारतीय नागरिकों से यह कहा था कि आप यह आंदोलन करने के लिए हिंसा का प्रयोग ना करें किसी भी तरह की तोड़फोड़ एवं आगजनी घटनाओं को अंजाम ना दें । इस आंदोलन के बाद अंग्रेज भी समझ चुके थे कि अब हम इस देश पर राज नहीं कर सकते हैं क्योंकि भारत देश की जनता जागरूक हो चुकी है। अंग्रेजों ने इस आंदोलन को बंद करवाने के लिए कई तरह के प्रयास भी किए लेकिन हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानी के लोग उनका विरोध करने से पीछे नहीं हटे। इस आंदोलन के बाद हमारा देश स्वतंत्रता की ओर बढ़ रहा था । यह आंदोलन देश हित के लिए किया गया था और इस आंदोलन में सफलता भी मिली थी। यह सफलता हमें महात्मा गांधी जी के विचारों से मिली थी ।

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