गंगा नदी की आत्मकथा पर निबंध ganga ki atmakatha essay in hindi

ganga ki atmakatha essay in hindi

मैं गंगा नदी बोल रही हूं । मैं भारत मैं रहती हूं, मेरे पास अथाह जल है । मैं अपने जल से लोगों की प्यास बुझाती हूं और मेरे जल का उपयोग सभी लोग अपने दैनिक जीवन में करते हैं । मैं खेत खलिहान को अपने पानी के द्वारा हरी-भरी करती हूं । मैं कई वर्षों से लोगों को पानी दे रही हूं लेकिन आज मुझे बड़ा दुख होता है कि लोग मेरे पानी को दूषित कर रहे हैं । मेरे पानी के आसपास गंदगी फैला रहे हैं । मैं उन लोगों से कहना चाहती हूं कि अगर आप मेरे पानी को साफ करके नहीं रखोगे तो मैं आपको आने वाले समय में स्वच्छ पानी कहां से दे पाऊंगी ।

ganga ki atmakatha essay in hindi
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आप सभी को मेरे विषय में सोचने की आवश्यकता है कि आप मेरे पानी को किस तरह से साफ रखोगे । आप लोगों को यह कोशिश करना चाहिए कि आप सभी मिलकर मेरे पानी को स्वच्छ रखें और लोगों को भी जागरुक करे कि मेरे पानी के आसपास गंदगी ना फैलाएं । जहां जहां से मेरी नदी जा रही है वहां के आसपास कचरा ना डालें जिससे मेरा जल स्वच्छ रहे और आप उस जल को पी सकें । मैं आपसे विनम्र निवेदन करती हूं कि आप मेरे जल में गंदगी , केमिकल ना डालें क्योंकि आपको वही पानी पीना है इसके कारण आपको बीमारी हो सकती है ।

मैं आप लोगों से कहना चाहती हूं कि आप लोगों ने मुझे बड़ा ही प्रेम, मान सम्मान दिया है तो आप मुझे गंदा क्यों करते हो? आप मुझे गन्दा करके मेरा इस तरह का अपमान क्यों करते हो? आप मुझे उपयोग में लाओ, मुझे गंदा मत करो। जब मैं नदी में बहती हूं तो कितनी सुंदर दिखाई देती हूं । मेरा पानी कभी नीला दिखाई देता है तो कभी चमकीला दिखाई देता है । मेरे पानी की जो लहरें हैं कितनी सुंदर दिखाई देती है । यदि आप मुझे गंदा करोगे , मेरे तट पर प्रदूषण फैलाओगे तो क्या आपको यह चमक दिखाई देगी ? नहीं। मैं आप लोगों से कहना चाहती हूं कि हमारे भारत की संस्कृति में मुझे सबसे पवित्र नदी माना गया है तो आप मुझे गंदा क्यों करते हो ।

आप सभी लोग आगे बढ़कर मेरे सफाई अभियान में योगदान दो । आप सभी के योगदान से ही मैं साफ स्वच्छ हो पाऊंगी । मेरी नदी के आसपास पेड़ पौधे लगाओ और आसपास की साफ सफाई में अपना योगदान दो । तब मुझे बड़ी खुशी होगी और मैं आपको शुद्ध जल दे पाऊंगी । आप उस जल को पीकर अपनी प्यास बुझाओ और मेरे पानी के माध्यम से आप अच्छी अच्छी फसल की पैदावार करो । आप मेरे पानी का उपयोग अपने जीवन में करो । मैं कई वर्षों से आप लोगों को अपना पानी दे रही हूं तो आप लोगों का कर्तव्य बनता है कि आप मुझे साफ रखे, मुझे दूषित न करे। मेरे तट पर किसी तरह का कोई केमिकल का उपयोग मत करो तब जाकर मुझे खुशी होगी ।

मैं गंगा नदी हूं मैंने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा है । मैंने हमेशा लोगों की मदद की है आप लोग मुझे दूषित क्यों कर रहे हो । मैंने आपके जीवन को जल देकर आपकी प्यास बुझाई है तो आप मुझे इस तरह की पीड़ा क्यों पहुंचा रहे हो । मैं सुंदर और स्वच्छ रहना चाहती हूं। आप सभी अपना योगदान दें और मुझे स्वच्छ करें । आज मैं यह सोच कर दुखी हो रही हूं और मेरे नेत्रों से आंसू बह रहे हैं कि मैंने जिन लोगों को जल देकर उनकी प्यास बुझाई है वही लोग मुझे दूषित कर रहे हैं। मैं आपसे कहती हूं कि आप मुझे साफ करने में अपना योगदान दें और किसी तरह का कोई प्रदूषण मेरी नदी के आसपास ना होने दें । तब जाकर मुझे खुशी प्राप्त होगी और मैं पूरी खुशी के साथ नदी में बहती रहूंगी और नीले सुंदर और पवित्र जल की लहरें आपको दिखाती रहूंगी ।

मुझे धरती पर आप लोगों को जल देने के लिए भेजा गया है । मैं आपको जल देती रहूंगी लेकिन आप लोगों का यह दायित्व बनता है कि आप मुझे दूषित ना करें। मैं ईश्वर के द्वारा यहां पर भेजी गई हूं और मैं कई राज्यों और प्रांतों से होते हुए समुद्र में मिल जाती हूं। आप मेरे पानी का उपयोग अपने दैनिक जीवन में कर सकते हैं । आप जब मेरे जल का उपयोग करते हैं तो उसी समय आप लोगों को यह वादा मुझसे करना चाहिए की आप किसी तरह की कोई गंदगी मेरे आस-पास नहीं फेलाएंगे ।

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