असहयोग आंदोलन पर निबंध asahyog andolan in hindi

असहयोग आंदोलन क्या है Asahyog andolan in hindi

असहयोग आंदोलन हमारे भारत के स्वतंत्रता सेनानियों और महात्मा गांधी जी के द्वारा किया गया था । इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए महात्मा गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कई नेताओं ने अपना योगदान दिया था । यह आंदोलन इसलिए प्रारंभ किया गया था कि अंग्रेज हमारे भारत को स्वतंत्रता प्रदान करे । हमारे देश में कई आंदोलन किए गए थे । जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद गांधी जी यह समझ चुके थे की ब्रिटिश शासन हमारे देश के नागरिकों के साथ कभी न्याय नहीं करेंगे । महात्मा गांधी जी ने देश के सभी स्वतंत्रता सेनानियों को साथ मिलाकर यह आंदोलन चलाया । गांधी जी ने इस आंदोलन के माध्यम से अंग्रेजों से राष्ट्र के सहयोग को वापस लेने की कोशिश की थी । इस कोशिश को सफलता दिलाने के लिए असहयोग आंदोलन प्रारंभ किया गया था ।

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असहयोग आंदोलन की शुरुआत

यह आंदोलन सितंबर 1920 को प्रारंभ किया गया था। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य था अंग्रेजों को यह बताना कि अब हमारा देश स्वतंत्रता पाने के लिए तैयार है । अब हम तुम्हारा जुल्म सहन नहीं करेंगे । यह आंदोलन महात्मा गांधी और उनके कई साथियों के द्वारा प्रारंभ किया गया था । इस आंदोलन से देश के सभी नागरिक जागरुक हुए थे । सभी नागरिकों के दिलों में आजादी का जुनून पैदा हुआ था और सभी हमारे देश भारत को आजाद कराने के लिए अपना योगदान देने के लिए आगे आए थे । यह आंदोलन इतना मजबूर था की अंग्रेज डर चुके थे । अंग्रेजों को यह भय होने लगा था की अब हम ज्यादा दिनों तक भारत देश को गुलाम नहीं बना सकते हैं । उन्होंने इस आंदोलन को बंद करने के लिए कई प्रयास किए लेकिन यह आंदोलन इतना आगे बढ़ चुका था की भारत के नागरिक सिर्फ भारत को आजाद कराने मैं जुट गए थे । इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए देश के युवा देश के स्वतंत्रता सेनानी और देश की महिलाएं भी अपना योगदान दे रही थी क्योंकि देश के सभी लोग यह जान चुके थे कि यदि हमने आज अंग्रेजो के खिलाफ आवाज नहीं उठाई तो हमारा देश कभी भी आजाद नहीं हो पाएगा । इसलिए हम सभी को अपना योगदान देना चाहिए।

असहयोग आन्दोलन का कारण

असहयोग आंदोलन को प्रारंभ करने का सबसे बड़ा कारण था कि अंग्रेजो के द्वारा जो वादा किया गया था वह अपने वादों से मुकर रहे थे । उन्होंने देश के साथ गद्दारी की थी और हमारे देश के सभी नेताओं को धोखा दिया था । उन्होंने तुर्की देश का विभाजन कर दिया था । तुर्की का विभाजन अंग्रेजो के द्वारा किया गया था जिसका एक भाग ब्रिटेन को दे दिया गया एवं दूसरा भाग फ्रांस को दे दिया गया था । यह देखकर कि अंग्रेज सरकार भारत की जनता को धोखा देने लगी है तब महात्मा गांधी जी ने इसका विरोध करने का विचार बनाया और असहयोग आंदोलन प्रारंभ किया। आंदोलन को सफल बनाने के लिए सभी को योगदान देने के लिए भी आगे बढ़ाया था । इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए देश के मुसलमानों ने भी असहयोग आंदोलन में भाग लिया था क्योंकि जब तुर्की का विभाजन किया गया था तब मुसलमानों को बुरा लगा था । उन्होंने अंग्रेजों से बगावत छेड़ दी थी क्योंकि मुसलमानों को तुर्की देश से बहुत ही लगाव था। अंग्रेजो के द्वारा किया गया यह विभाजन ब्रिटिश सरकार को महंगा पड़ा ।

देश के मुसलमान भी असहयोग आंदोलन से जुड़ने लगे थे । महात्मा गांधी जी ने देश के नागरिकों को यह भरोसा दिलाया था कि अगर यह आंदोलन हमारा सफल हुआ तो हम हमारे देश को जल्द ही आजाद करा लेंगे । इस आंदोलन के प्रारंभ के कुछ समय बाद ही इस आंदोलन के प्रमुख नेता बाल गंगाधर तिलक जी का निधन हो गया था। लेकिन फिर भी इस आंदोलन को रोका नहीं गया देश के और भी नेताओं के द्वारा इस आंदोलन को आगे बढ़ाया गया था । यह आंदोलन असफल रहा था। लेकिन इस आंदोलन के माध्यम से हमारी देश की जनता जागरूक हुई थी । यह आंदोलन देश के नेताओं की कुछ कमी हो जाने के कारण असफल रहा था ।

असहयोग आंदोलन का महत्व

जब यह आंदोलन असफल हुआ तब हमारे देश के नागरिकों को बड़ा दुख हुआ था । तब हमारे देश के वरिष्ठ नेता महात्मा गांधी जी ने लोगों को बताया कि भले ही यह आंदोलन असफल रहा । लेकिन हम सभी नागरिको ने एक साथ मिलकर इस आंदोलन को सफल बनाने की कोशिश की और अंग्रेजो को बता दिया की हम हमारे देश को आजाद कराने के लिए हम सभी भारतवासी एक साथ खड़े हैं । यही हमारी सबसे बड़ी सफलता है । इस आंदोलन के कारण ही हम अंग्रेजों को बताने में सफल हुए हैं कि अब अंग्रेजों का राज हिंदुस्तान में नहीं चलेगा । इस आंदोलन के कारण ही हम देश की जनता को एक मंच पर लाने में सफल हुए हैं और देश के सभी नागरिकों ने बच्चों ने , स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने काम को छोड़कर इस आंदोलन में सहयोग दिया यह हमारी सबसे बड़ी सफलता है । इस आंदोलन के कारण ही हम देश के सभी नागरिकों के दिल में देश के लिए प्रेम, राष्ट्र के लिए प्रेम , धरती की मिट्टी के लिए प्रेम जगाने में सफल हुए हैं । इस आंदोलन के माध्यम से ही हम लोगों को विश्वास दिलाने में सफल हुए हैं कि हमारे देश को आजाद कराया जा सकता है ।

इस आंदोलन के कारण ही देश के नागरिकों के मन में यह विचार आया था कि हमें विदेशी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए और हमें अंग्रेजों के द्वारा दिए गए रोजगार को छोड़ देना चाहिए । उस हर चीज का बहिष्कार करना चाहिए जो अंग्रेजों के माध्यम से हमें दिए जा रहे हैं। महात्मा गांधी जी ने लोगों से यह भी कहा था कि आप लोग दुखी मत होना । हमारा यह आंदोलन असफल नहीं हुआ है हमने इस आंदोलन से सीख ली है और हम इस आंदोलन के माध्यम से आगे भी आंदोलन करते रहेंगे । हमारे देश को आजाद कराने में किसी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ेंगे महात्मा गांधी के इन विचारों से देश के नागरिकों को हौसला मिला और वह हर आंदोलन में शामिल होने के लिए तत्पर खड़े रहे ।

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