बूंद की आत्मकथा Boond ki atmakatha in hindi

Boond ki atmakatha in hindi

दोस्तों कैसे आप सभी, दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं बूंद की आत्मकथा पर हमारे द्वारा लिखित एक काल्पनिक आर्टिकल तो चलिए पढ़ते हैं आज के इस आर्टिकल को।

Boond ki atmakatha in hindi
Boond ki atmakatha in hindi

मैं एक बूंद हूं मैं बादलों की गोद में रहती हूं बरसात के मौसम में, मैं बादलों की गोद में से निकलकर धरती पर आने लगती हूं. मेरे साथ में और भी कई बूंदे धरती की ओर आने लगती हैं मैं जब धरती पर आती हूं तो कभी मैं धरती की धूल में मिल जाती हूं तो कभी मैं नदी में मिल जाती हु, कभी मैं पेड़ पौधों के पत्तों पर गिर जाती हु, तो कभी खिलते हुए फूलों पर जाकर उन्हें और भी सुंदर बना देती हूं। आज वर्षा होने वाली है मैं भी और बूंदों के साथ धरती पर जा गिरूँगी।

बहुत से लोग मुझ बूंद को देखकर खुशी महसूस करते हैं लोग एक एक बूंद के लिए गर्मी के मौसम में तरस जाते हैं मैं एक बूंद हूं मुझे वास्तव में गर्व है कि मैं किसी प्यासे इंसान की प्यास बुझाने में मदद कर पाती हु। कहते हैं कि बूंद बूंद से सागर बनता है वास्तव में, मैं अपने आप को खुशनसीब समझती हूं. मैं चाहे मिट्टी में गिरु जिससे पेड़ पौधों एवं फसलों के विकास में एक योगदान दे सकू, चाहे में नदी में मिलकर सागर के विकास में भूमिका निभा सकू. मैं प्यासे व्यक्ति कि मदद करती हूं वास्तव मे मुझे गर्व है कि मैं इस दुनिया के हर एक प्राणी की किसी न किसी तरह से मदद करती हूं।

गर्मियों के दिनों में जब पानी नहीं बरसता तो लोग एक-एक बूंद के लिए तरसते हैं सभी चाहते हैं कि मैं अपनी और सखियों के साथ बरसू क्योंकि गर्मी के दिनों की गर्मी से चारों ओर गर्मी का एहसास होता है जब मैं बरसती हूं तो वास्तव में चारों ओर हरियाली सी प्रतीत होने लगती हैं, पक्षी चहचाहने लगते हैं, मोर मोरनी नाचने लगते हैं, बच्चे मुस्कुराने लगते हैं। जब मैं अपनी सखियों के साथ बरसती हूं तो हर किसी के चेहरे पर मुस्कान आ जाती हैं, लोगों को ठंडक महसूस होती है वास्तव में, मैं बहुत खुश हूं कि मैं धरती पर स्थित हर एक जीव जंतु के कुछ काम आती हूं।

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